मेरठ, 16 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश के मेरठ में अमित कश्यप हत्याकांड में अदालत ने उसकी पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। अभियोजन पक्ष के मुताबिक, दोनों ने अमित की हत्या करने के बाद घटना को सांप के काटने से हुई मौत दिखाने की कोशिश की थी। अदालत ने मामले को ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ यानी विरलतम श्रेणी का अपराध माना।
अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश-12 जयवीर सिंह नागर की अदालत ने यह फैसला सुनाया। सजा तय करने से पहले वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से दोनों की बात सुनी गई। दोनों ने अपने परिवार की जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए अदालत से राहत की गुहार लगाई।
क्या है मेरठ का सांप कांड?
यह मामला मेरठ के बहसूमा क्षेत्र के अकबरपुर सादात गांव का है। अमित कश्यप की मौत के बाद शुरुआती तौर पर मामला सांप के काटने से जुड़ा प्रतीत हुआ था। हालांकि, पोस्टमार्टम और पुलिस जांच में सामने आए तथ्यों ने मामले को नया मोड़ दिया।
जांच के मुताबिक, अमित की गला दबाकर हत्या की गई थी और मौत को सर्पदंश का परिणाम दिखाने के लिए उसके शव के पास जीवित सांप रखा गया था। पुलिस ने जांच के दौरान परिस्थितिजन्य साक्ष्य, गवाहों के बयान और अन्य तथ्यों को आधार बनाया। अभियोजन पक्ष ने अदालत में इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर अपना पक्ष रखा।
अदालत ने सुनवाई के बाद रविता और अमरदीप को हत्या के मामले में दोषी ठहराया और 16 अक्टूबर को दोनों को मृत्युदंड सुनाया।
सजा सुनने से पहले दोनों ने परिवार का दिया हवाला
सजा के बिंदु पर सुनवाई के दौरान रविता ने अपने तीन छोटे बच्चों की देखभाल का मुद्दा उठाया। वहीं, अमरदीप ने अपने बुजुर्ग माता-पिता की जिम्मेदारी का जिक्र करते हुए अदालत से राहत मांगी।
अदालत ने अपराध की प्रकृति और मामले में सामने आए तथ्यों पर विचार करने के बाद सख्त सजा सुनाई। फैसले के बाद दोनों की तबीयत और मानसिक स्थिति को लेकर जेल प्रशासन की ओर से निगरानी रखे जाने की जानकारी भी सामने आई।
131 पन्नों के फैसले में न्याय और दंड का उल्लेख
रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत का फैसला 131 पन्नों का है। इसमें न्याय, दंड और निष्पक्षता के महत्व को समझाने के लिए प्राचीन ग्रंथों के संदर्भ भी दिए गए। फैसले में मनुस्मृति के एक श्लोक और आत्रेय संहिता के उल्लेख की जानकारी सामने आई है।
अदालत ने अपराध की गंभीरता, उसे छिपाने की कोशिश और उपलब्ध साक्ष्यों पर विचार करते हुए इसे विरलतम श्रेणी में रखा। हालांकि, मृत्युदंड सुनाए जाने का अर्थ यह नहीं है कि सजा पर सभी कानूनी प्रक्रियाएं पूरी हो गई हैं। दोषियों को कानून के तहत आगे अपील और अन्य उपलब्ध न्यायिक विकल्पों का अधिकार रहता है।
मेरठ में कुछ ही दिनों में चार दोषियों को मृत्युदंड
मेरठ में यह फैसला ऐसे समय आया है, जब चर्चित नीला ड्रम हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को भी 14 अक्टूबर को मृत्युदंड सुनाया गया था। अब रविता और अमरदीप को सजा सुनाए जाने के बाद दोनों मामलों में कुल चार दोषियों को कुछ ही दिनों के भीतर मृत्युदंड दिया गया है।
दोनों मामले अलग-अलग हैं, लेकिन फैसलों ने गंभीर आपराधिक मामलों में न्यायिक प्रक्रिया और साक्ष्यों की भूमिका पर चर्चा तेज कर दी है। कानून के तहत मृत्युदंड के मामलों में आगे की न्यायिक समीक्षा महत्वपूर्ण होती है।
नोट: इस मामले में अदालत ने रविता और अमरदीप को दोषी ठहराकर मृत्युदंड सुनाया है। आगे की कानूनी प्रक्रिया और अपीलों की स्थिति से जुड़े अपडेट उपलब्ध होने पर खबर को संशोधित किया जाना चाहिए।










