गरीब मरीजों की जान से खिलवाड़ का आरोप, सीएमओ और नोडल अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की मांग
पूर्वांचल राज्य संवाददाता : दीपु तिवारी
सोनभद्र। जिले में कथित अवैध अस्पतालों के संचालन और मरीजों की मौत से जुड़े मामलों को लेकर भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. धर्मवीर तिवारी ने चिंता जताई है। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए जिलाधिकारी से मामले में हस्तक्षेप करने तथा मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) और संबंधित नोडल अधिकारियों की भूमिका की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। डॉ. तिवारी ने कहा कि वह इस पूरे प्रकरण को लेकर जल्द ही मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपेंगे।
डॉ. धर्मवीर तिवारी ने आरोप लगाया कि जिले में गरीब मरीजों को दलालों के माध्यम से कथित अवैध निजी अस्पतालों तक पहुंचाया जा रहा है। उनका कहना है कि इलाज के दौरान मरीजों की मौत की शिकायतें गंभीर चिंता का विषय हैं। उन्होंने स्वास्थ्य विभाग से ऐसे मामलों की गहन जांच कराकर जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की।
डॉ. तिवारी ने आरोप लगाया कि कुछ आशा कार्यकर्ताओं द्वारा आर्थिक लाभ के लिए मरीजों को निजी अस्पतालों में भेजे जाने की शिकायतें हैं। साथ ही उन्होंने कुछ नोडल अधिकारियों पर कथित तौर पर 50 हजार से एक लाख रुपये तक लेकर अवैध अस्पतालों के संचालन की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की मांग की।
उन्होंने सवाल उठाया कि जब निजी अस्पतालों के निरीक्षण और अवैध रूप से संचालित प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को सौंपी गई है, तो नियमित जांच और प्रभावी कार्रवाई क्यों नहीं दिखाई देती? उनके मुताबिक, कई मामलों में घटना सामने आने के बाद ही विभागीय सक्रियता नजर आती है। उन्होंने जिले में चिह्नित अवैध अस्पतालों की सूची सार्वजनिक करने की भी मांग की।
डॉ. तिवारी के दावे के अनुसार, रॉबर्ट्सगंज में लगभग 23, घोरावल में 19 और दुद्धी क्षेत्र में 14 अस्पताल अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं। उन्होंने निजी आवासों में चल रहे अस्पतालों को लाइसेंस दिए जाने के आधार और उनकी वैधानिक स्थिति की जांच कराने की मांग भी की।
इसके अलावा उन्होंने अवैध पैथोलॉजी और डायग्नोस्टिक सेंटरों के संचालन पर चिंता जताई। उनका दावा है कि सोनभद्र मुख्यालय पर सात रेडियोलॉजिस्ट होने के बावजूद 16 डायग्नोस्टिक सेंटरों को लाइसेंस दिए जाने के मामले की जांच होनी चाहिए। उन्होंने संबंधित आंकड़ों, लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया और निर्धारित मानकों के अनुपालन की पड़ताल कर वास्तविक स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
डॉ. तिवारी ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में कार्रवाई के दौरान अस्पतालों को सील किया जाता है, लेकिन कुछ समय बाद वे फिर से संचालित होने लगते हैं। उन्होंने जिलाधिकारी से पूरे मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने और सीएमओ सहित संबंधित नोडल अधिकारियों की भूमिका की जांच कराने की मांग की।
उन्होंने कहा कि अवैध अस्पतालों के संचालन पर प्रभावी रोक लगाने के लिए नियमित निरीक्षण, पारदर्शी कार्रवाई और जिम्मेदारी तय करना आवश्यक है। डॉ. तिवारी ने मांग की कि जांच में दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए, ताकि गरीब मरीजों के कथित शोषण पर रोक लग सके।
उन्होंने दोहराया कि जिले में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति और कथित अवैध अस्पतालों के संचालन से जुड़े आरोपों को लेकर वह जल्द ही मुख्यमंत्री के समक्ष शिकायत रखेंगे।










