हरदोई निवासी प्रदीप शुक्ला झांसी में सत्यानंद शुक्ला के नाम से रह रहा था, सेना जैसी वर्दी पहनकर लगाता था दरबार; सोशल मीडिया पर एक लाख से अधिक फॉलोअर्स होने का दावा
उत्तर प्रदेश के झांसी में ‘काली सरकार’ के नाम से दिव्य दरबार लगाने वाला प्रदीप शुक्ला एक बार फिर पुलिस की गिरफ्त में है। हरदोई पुलिस ने उसे 4 नवंबर को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया। पुलिस के मुताबिक, उसके खिलाफ करीब 31 साल पुराने आपराधिक मामलों में अदालत से वारंट जारी था और लंबे समय से वह पेशी पर उपस्थित नहीं हो रहा था।
प्रदीप शुक्ला मूल रूप से हरदोई के चौहान थोक का निवासी है। झांसी के मऊरानीपुर क्षेत्र के कुरैचा गांव में वह सत्यानंद शुक्ला उर्फ ‘काली सरकार’ के नाम से रह रहा था। वहां एक मंदिर में रहकर वह धार्मिक आयोजन और दिव्य दरबार आयोजित करता था।
सेना जैसी वर्दी पहनकर लगाता था दिव्य दरबार
पुलिस और उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदीप शुक्ला दिव्य दरबार के दौरान सेना जैसी वर्दी पहनता था। वह लोगों की बीमारियां ठीक करने और उनकी परेशानियां दूर करने का दावा करता था। उसके दरबार में देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालुओं के पहुंचने की जानकारी सामने आई है। विदेश से भी कुछ अनुयायियों के आने की बात कही गई है।
सोशल मीडिया पर भी उसकी पहचान बनी हुई थी। रिपोर्टों के अनुसार, उसके इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक लाख से अधिक फॉलोअर्स थे। इसी पहचान के चलते वह ‘काली सरकार’ के नाम से चर्चित हुआ।
1993 और 1998 के मामलों में अदालत से वारंट
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, प्रदीप शुक्ला के खिलाफ वर्ष 1993 में आयुध अधिनियम के तहत मामला दर्ज हुआ था। उसी वर्ष भारतीय दंड संहिता की लूट और अन्य संबंधित धाराओं में भी मुकदमा दर्ज किए जाने की जानकारी है। इसके बाद 1998 में मारपीट से जुड़ा एक और मामला दर्ज हुआ।
पुलिस का कहना है कि इन मामलों में अदालत में लगातार पेश न होने के कारण उसके खिलाफ वारंट जारी हुए थे। हरदोई के सीओ सिटी अजीत चौहान के मुताबिक, पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर चलाए जा रहे अभियान के तहत न्यायालय से वारंट प्राप्त कर प्रदीप शुक्ला को गिरफ्तार किया गया और अदालत में पेश किया गया।
10 अक्टूबर को भी हिरासत में लिया गया था
इस मामले में एक अहम घटनाक्रम यह भी है कि पुलिस ने 10 अक्टूबर को भी प्रदीप शुक्ला को हिरासत में लिया था। उस समय पुराने आपराधिक रिकॉर्ड तत्काल उपलब्ध नहीं होने के कारण उसे अदालत से राहत मिल गई थी। बाद में रिकॉर्ड जुटाने और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुलिस ने वारंट के आधार पर दोबारा गिरफ्तारी की।
नाबालिग से जुड़े मामले की भी जांच
प्रदीप शुक्ला के खिलाफ नाबालिग से कथित यौन उत्पीड़न से जुड़ा मामला दर्ज होने की जानकारी भी सामने आई है। इस आरोप की पुलिस जांच कर रही है। इस मामले में आरोपों को अभी साबित तथ्य नहीं माना जा सकता।
दूसरी ओर, नवंबर की शुरुआत में सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में प्रदीप शुक्ला ने खुद को निर्दोष बताते हुए पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए थे। उसने कथित हिरासत और मारपीट का दावा किया था और अपने खिलाफ दर्ज नाबालिग से जुड़े मामले को गलत बताया था। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
अब आगे क्या
पुलिस की कार्रवाई के बाद प्रदीप शुक्ला को न्यायालय में पेश किया गया है। पुराने मामलों में जारी वारंट और अन्य आरोपों से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया अब अदालत के सामने आगे बढ़ेगी। नाबालिग से जुड़े मामले की जांच के निष्कर्ष भी आगे की कार्रवाई में महत्वपूर्ण होंगे।
‘काली सरकार’ की गिरफ्तारी के बाद अब यह मामला केवल उसके दिव्य दरबार और सोशल मीडिया पर लोकप्रियता तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पुराने आपराधिक मामलों, पहचान बदलकर रहने के पुलिस के दावों और नए आरोपों की जांच को लेकर भी चर्चा में है।










