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धीरेंद्र शास्त्री के समर्थन में उतरे वृंदावन के संत, अखिलेश यादव के बयान से गरमाई सियासत

वृंदावन / लखनऊ। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री को लेकर उत्तर प्रदेश की सियासत और धार्मिक जगत में विवाद गहराता जा रहा है। भगवान श्रीराम और श्रीकृष्ण के स्वरूप को लेकर दिए गए उनके बयान पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव की आपत्ति के बाद अब वृंदावन के कई संत-महंत और धर्माचार्य उनके समर्थन में सामने आए हैं।

गुरुवार को वृंदावन के राधाकांत मंदिर में आयोजित संत सभा में वक्ताओं ने धीरेंद्र शास्त्री के बयान का आध्यात्मिक संदर्भ समझने की बात कही। संतों का कहना था कि भगवान श्रीकृष्ण के त्रिभंगी स्वरूप का वर्णन भक्ति और धार्मिक परंपरा का हिस्सा है। किसी कथन को उसके संदर्भ से अलग करके विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।

वृंदावन की संत सभा में क्या बोले धर्माचार्य

सभा की अध्यक्षता महंत फूलडोल बिहारी दास महाराज ने की। उन्होंने कहा कि भक्त और भगवान के बीच भाव का संबंध होता है और किसी भी धार्मिक कथन को उसके आध्यात्मिक भाव के साथ समझना जरूरी है।

भागवताचार्य मृदुल कांत शास्त्री ने भगवान श्रीकृष्ण के त्रिभंगी स्वरूप का उल्लेख करते हुए कहा कि रसिक संतों और भक्त कवियों की परंपरा में इस स्वरूप का वर्णन लंबे समय से होता आया है।

अखाड़ा परिषद ब्रज प्रांत के अध्यक्ष महंत हरिशंकर दास नागा ने भी श्रीकृष्ण के त्रिभंगी स्वरूप को धार्मिक परंपरा का अभिन्न हिस्सा बताया। धर्म रक्षा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सौरभ गौड़ और ब्रज तीर्थ देवालय न्यास के अध्यक्ष रमाकांत गोस्वामी ने भी धार्मिक विषयों पर आपसी सौहार्द बनाए रखने की अपील की।

आखिर किस बयान से शुरू हुआ विवाद

विवाद की शुरुआत मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करेरा में आयोजित रामकथा के दौरान धीरेंद्र शास्त्री की भगवान राम और भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप को लेकर की गई टिप्पणी से हुई। उनका कथन सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद कई कृष्ण भक्तों और संगठनों ने आपत्ति जताई।

विवाद बढ़ने पर धीरेंद्र शास्त्री ने वीडियो संदेश जारी कर सफाई दी। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य भगवान राम और श्रीकृष्ण के बीच किसी तरह का अंतर बताना या किसी की धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाना नहीं था। उन्होंने अपनी बात से किसी को दुख पहुंचने पर क्षमा भी मांगी।

अखिलेश यादव ने उठाई कार्यक्रमों पर रोक की मांग

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने भगवान राम और श्रीकृष्ण को लेकर की गई टिप्पणी पर आपत्ति जताते हुए कहा कि धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाली बयानबाजी स्वीकार नहीं की जा सकती।

अखिलेश यादव ने पहले धीरेंद्र शास्त्री के उत्तर प्रदेश में प्रवेश को लेकर टिप्पणी की थी। इसके बाद उन्होंने प्रदेश में प्रस्तावित उनके धार्मिक कार्यक्रमों को अनुमति नहीं देने और आयोजनों को रद्द करने की मांग भी उठाई।

अखिलेश ने आयोजकों और प्रायोजकों से भी अपील की कि वे धार्मिक कार्यक्रमों में वक्ताओं को आमंत्रित करने से पहले उनके बयानों और सार्वजनिक आचरण पर विचार करें।

राजा भैया की कथा को लेकर भी बढ़ी चर्चा

इस विवाद के बीच प्रतापगढ़ के कुंडा में प्रस्तावित धीरेंद्र शास्त्री की कथा भी चर्चा में है। यह आयोजन जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के अध्यक्ष और कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया की ओर से 17 से 20 नवंबर के बीच आयोजित होना प्रस्तावित है।

अखिलेश यादव की ओर से उत्तर प्रदेश में धीरेंद्र शास्त्री के कार्यक्रमों को अनुमति नहीं देने की मांग के बाद इस आयोजन को लेकर भी राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।

धार्मिक बयान से राजनीतिक बहस तक पहुंचा मामला

धीरेंद्र शास्त्री के बयान पर जहां वृंदावन के कुछ संतों ने उनका समर्थन किया है, वहीं अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी की ओर से विरोध जारी है। इस पूरे प्रकरण में धार्मिक भावनाओं, सार्वजनिक मंचों पर दिए जाने वाले बयानों और राजनीतिक प्रतिक्रिया को लेकर बहस तेज हो गई है।

अब सबकी नजर इस बात पर है कि आगामी दिनों में संत समाज की ओर से इस मुद्दे पर क्या रुख सामने आता है और प्रतापगढ़ में प्रस्तावित कथा को लेकर प्रशासनिक स्तर पर क्या निर्णय होता है।

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