पूर्वांचल राज्य ब्यूरो
महराजगंज (सोनौली)। नो‑मैन‑लैंड के पास सरकारी जमीनों पर दशकों से बने अवैध ढाँचे और दुकानें बुधवार सुबह राजस्व विभाग की बड़ी कारर्वाई में मिनटों में जमींदोज कर दी गईं। एसएसबी चेक पोस्ट कैंप के ठीक बगल स्थित इस संवेदनशील इलाके में बुलडोजर चलने से अतिक्रमणकारियों में हड़कंप मच गया और मौके पर अफरा‑तफरी का माहौल बन गया। सुरक्षा के व्यापक इंतजामों में पुलिस और सशस्त्र सीमा बल भी तैनात रहे।
कार्यवाही का मंच और तरीका
सुबह लगभग 8 बजे शुरू हुई यह कार्रवाई सोनौली अंतरराष्ट्रीय सीमा के समीप स्थित उस इलाके में हुई जहाँ मोहरों‑बंद सरकारी जमीन पर दशकों से अस्थायी दुकानें, ठेले और शेड कायम थे। राजस्व टीम ने बुलडोजर, जेसीबी और अन्य मशीनरी के साथ पहुंचकर अतिक्रमण हटाने का अभियान तेज किया। सुरक्षा के लिए एसएसबी और स्थानीय पुलिस की फोर्स ने इलाके को पूरी तरह घेर लिया और छावनी जैसा माहौल बन गया।
मिनटों में बरबादी
कुछ ही मिनटों में दर्जनों दुकानें, ठेले और झुग्गी‑शेड मलबे में तब्दील हो गए। कई दुकानदार अपने सामान बचाने का प्रयास करते दिखे, पर भारी मशीनरी ने मौके पर पलभर में स्थिति बदल दी। स्थानीय लोगों ने कहा कि कई परिवारों की आजीविका इस जगह से जुड़ी थी, इसलिए नुकसान अधिक हुआ। प्रशासन ने कहा कि नोटिस जारी कर विधिक प्रक्रिया पूरी की गई थी, फिर भी प्रभावितों के आंसू और नराजगी दिखी।
अधिकारी बयान
जिलाधिकारी ( गौरव सिंह सोगरवाल) ने कहा, “यह जमीन पूरी तरह सरकारी है और सीमा सुरक्षा के दृष्टिकोण से अतिक्रमण खतरा बन रहा था। कई बार चेतावनी देने के बाद भी हटना नहीं हुआ, इसलिए कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्यवाही की गई।” एसएसबी के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सुरक्षा को ध्यान में रखकर स्थान पर अतिरिक्त जवान तैनात किए गए थे ताकि किसी भी तरह की law‑and‑order समस्या न हो।
प्रभावितों की आवाज़
कारोबारियों और अतिक्रमणकारियों ने प्रशासन पर अचानक कार्रवाई का आरोप लगाया। एक दुकानदार ने कहा, “हम सालों से यही करते आ रहे हैं, नोटिस नहीं मिला और आज हमारी कमाई एक झटके में खत्म कर दी गई।” प्रशासन ने कहा कि जिन लोगों के पास वैध दावेदारी के प्रमाण होंगे, उन्हें नियमों के अनुसार सुनवाई का अवसर दिया जाएगा, मगर अवैध कब्जा स्वीकार्य नहीं होगा।
आगे की रणनीति
राजस्व विभाग ने संकेत दिया है कि संबंधित जमीनों की पुनःसेवा और निगरानी के लिए नियमित पेट्रोलिंग और सर्वे लागू होगा। यह भी कहा गया कि सीमांत सुरक्षा को देखते हुए भविष्य में ऐसे अतिक्रमणों की तत्काल पहचान कर सख्त कदम उठाए जाएंगे। साथ ही प्रभावितों के नुकसान की विवरणी तैयार कर कानूनी रूप से उठाये जाने वाले कदमों का पुख्ता रिकॉर्ड रखा जाएगा।
स्थानीय राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रिया
कार्रवाई की खबर फैलते ही स्थानीय नेता और समाजसेवी मौके पर पहुँचे। कुछ ने प्रशासन की सख्ती को जायज़ ठहराया तो कुछ ने प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और नर्म व्यवहार की मांग की। इस बीच सीमा‑संबंधी सुरक्षा और विकास की नीति पर सार्वजनिक बहस भी तेज हुई है।
संदर्भ और नोट
यह कार्रवाई सोनौली बॉर्डर के बिल्कुल नज़दीक हुई और सुरक्षा कारणों से इसे संवेदनशील माना गया है। प्रकाशन से पहले समय, संख्या और अधिकारियों के नामों की पुष्टि आवश्यक है।
सोनौली पर बुलडोजर: नो‑मैन‑लैंड के पास दशकों पुराने अवैध ठेले‑दुकान मिनटों में जमींदोज










