अयोध्या। श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में आने वाले नकद चढ़ावे के पैटर्न को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। मंदिर से जुड़े सूत्रों के अनुसार, हाल के दिनों में दान पेटियों में 10, 20 और 50 रुपये के नोटों की संख्या पहले की तुलना में अधिक दिखाई दे रही है, जबकि पहले 100, 200 और 500 रुपये के नोट बड़ी मात्रा में मिलते थे। हालांकि, श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इस संबंध में कोई आधिकारिक आंकड़ा या पुष्टि जारी नहीं की है।
क्या चढ़ावे का तरीका बदल रहा है?
धार्मिक मामलों के जानकारों का मानना है कि नकद दान में बदलाव के पीछे कई कारण हो सकते हैं। एक संभावना यह भी है कि श्रद्धालु अब डिजिटल माध्यमों से अधिक दान कर रहे हों। दूसरी ओर, हाल के दिनों में चढ़ावा गिनती से जुड़े कथित गबन मामले के बाद कुछ लोग इसे श्रद्धालुओं के व्यवहार में आए बदलाव से जोड़कर देख रहे हैं। फिलहाल इस संबंध में कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।
चढ़ावा विवाद के बाद बढ़ी पारदर्शिता
चढ़ावे में कथित अनियमितताओं की जांच के बीच मंदिर ट्रस्ट ने नकदी गिनने की पूरी प्रक्रिया को और सख्त कर दिया है। अब काउंटिंग रूम में दो-स्तरीय सुरक्षा जांच, मोबाइल फोन पर प्रतिबंध, बिना जेब वाली यूनिफॉर्म, व्यक्तिगत सामान ले जाने पर रोक और निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया है ताकि भविष्य में किसी भी तरह की गड़बड़ी की संभावना कम हो सके।
SIT कर रही है जांच
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) कथित चढ़ावा गबन मामले की जांच कर रहा है। अब तक कई लोगों से पूछताछ की जा चुकी है और कुछ आरोपियों की गिरफ्तारी भी हुई है। ट्रस्ट का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट होगी। महासचिव चंपत राय ने भी कहा है कि अंतिम रिपोर्ट आने तक पूरी जांच प्रक्रिया पर नजर रखी जाएगी।
ट्रस्ट की ओर से नहीं आया आधिकारिक दावा
फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि नकद चढ़ावे में वास्तव में कमी आई है या केवल नोटों के मूल्यवर्ग (Denomination) में बदलाव हुआ है। ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं की संख्या या कुल दान में कमी की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। ऐसे में छोटे नोटों की बढ़ती संख्या को लेकर किए जा रहे दावों को जांच पूरी होने तक अंतिम निष्कर्ष नहीं माना जा सकता।
(नोट: यह रिपोर्ट उपलब्ध जानकारी, सूत्रों और आधिकारिक बयानों के आधार पर तैयार की गई है। नकद चढ़ावे में बदलाव के कारणों को लेकर अभी कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।)









