पूर्वांचल राज्य ब्यूरो वाराणसी/जौनपुर।
राष्ट्रीय राजमार्ग-233 (वाराणसी-आजमगढ़ मार्ग) स्थित ढेरही टोल प्लाजा को लेकर जारी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। 30 सितंबर को हुए किसान आंदोलन के दौरान अजगरा विधायक त्रिभुवन राम (टी. राम) द्वारा टोल वसूली अस्थायी रूप से स्थगित किए जाने संबंधी दिए गए आश्वासन के बावजूद गुरुवार को भी टोल प्लाजा पर पूर्ववत वसूली जारी रही। इससे किसानों और स्थानीय लोगों में नाराजगी बढ़ गई है तथा क्षेत्र में इस मुद्दे को लेकर चर्चाओं का दौर जारी है।
विधायक के बयान के बाद टला था आंदोलन
बुधवार को ढेरही टोल प्लाजा हटाने की मांग को लेकर पूर्वांचल किसान संगठन के नेतृत्व में बड़ा प्रदर्शन हुआ था। प्रदर्शन के दौरान किसान और पुलिस आमने-सामने आ गए थे तथा स्थिति तनावपूर्ण हो गई थी। इसी बीच विधायक त्रिभुवन राम ने एक वीडियो संदेश जारी कर दावा किया था कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हस्तक्षेप और संबंधित अधिकारियों से हुई बातचीत के बाद टोल वसूली को अगले आदेश तक अस्थायी रूप से रोकने का निर्णय लिया गया है।
विधायक के इस आश्वासन के बाद किसान नेता अजीत सिंह डोभी ने आंदोलन को समाप्त करने के बजाय फिलहाल स्थगित करने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि क्षेत्रीय विधायक के आश्वासन और मुख्यमंत्री के नाम का उल्लेख होने के कारण किसान कुछ समय तक इंतजार करेंगे।
लिखित आदेश नहीं मिला- टोल प्रबंधन
हालांकि गुरुवार देर शाम तक टोल प्लाजा पर सभी श्रेणी के वाहनों से नियमित रूप से टोल टैक्स वसूला जाता रहा। इस संबंध में टोल संचालक मनीष पाठक ने बताया कि उन्हें अब तक किसी सक्षम प्राधिकारी का कोई लिखित आदेश प्राप्त नहीं हुआ है।
उन्होंने कहा कि जब तक भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) अथवा शासन स्तर से आधिकारिक निर्देश प्राप्त नहीं होते, तब तक टोल संचालन पूर्ववत जारी रहेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किसी बयान के आधार पर टोल वसूली बंद नहीं की जा सकती, क्योंकि इससे अनुबंधीय शर्तों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। यदि शासन या एनएचएआई की ओर से कोई आदेश प्राप्त होता है तो उसकी पुष्टि के बाद तत्काल आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
किसान नेता ने दी आंदोलन तेज करने की चेतावनी
पूर्वांचल किसान संगठन के नेता अजीत सिंह डोभी ने कहा कि किसानों ने विधायक के आश्वासन पर भरोसा करते हुए आंदोलन को अस्थायी रूप से स्थगित किया था, समाप्त नहीं किया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के नाम का उल्लेख होने के कारण किसानों ने संयम बरता और आगे की कार्रवाई के लिए कुछ समय देने का निर्णय लिया।
अजीत सिंह ने आरोप लगाया कि आंदोलन के बाद उन्हें प्रशासनिक निगरानी में रखा गया है। उन्होंने कहा कि यदि किसानों के साथ वादाखिलाफी हुई और टोल वसूली बंद नहीं की गई तो संगठन और अधिक प्रभावी तरीके से आंदोलन करने को बाध्य होगा। उन्होंने कहा कि किसानों की मांगें पूरी नहीं होने पर जल्द ही आगे की रणनीति घोषित की जाएगी।
आंदोलन के बाद किसान नेता हाउस अरेस्ट
धरना-प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए किसान नेता अजीत सिंह को बुधवार को राजातालाब थाने ले जाया गया था। बाद में देर रात पुलिस उन्हें उनके पैतृक आवास जौनपुर जिले के चन्दवक थाना क्षेत्र के बोड़सर गांव लेकर पहुंची, जहां उन्हें हाउस अरेस्ट कर दिया गया।
सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर उनके आवास पर दो उपनिरीक्षकों सहित आठ पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। अजीत सिंह का आरोप है कि शांतिपूर्ण ढंग से विरोध कर रहे किसानों को प्रताड़ित किया जा रहा है और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया जा रहा है।
टोल प्लाजा पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था
टोल विरोधी आंदोलन और संभावित विरोध-प्रदर्शनों को देखते हुए ढेरही टोल प्लाजा पर पुलिस की कड़ी निगरानी जारी है। टोल परिसर और आसपास के क्षेत्र में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
फिलहाल किसानों की निगाहें शासन और एनएचएआई के अगले कदम पर टिकी हैं। यदि टोल वसूली को लेकर स्पष्ट आदेश जारी नहीं होता, तो आने वाले दिनों में आंदोलन एक बार फिर तेज होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।










