लखनऊ, 9 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चल रही चुनावी प्रक्रिया पूरी हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) के आठ और समाजवादी पार्टी (SP) के दो प्रत्याशी निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए हैं। सभी सीटों पर उम्मीदवारों की संख्या निर्धारित सीटों के बराबर रहने के कारण मतदान की नौबत नहीं आई।
निर्वाचन अधिकारी अजीत कुमार वर्मा के अनुसार, नामांकन वापसी की अंतिम तारीख शुक्रवार, 9 अक्टूबर को किसी भी प्रत्याशी ने अपना नाम वापस नहीं लिया। इसके साथ ही सभी 10 उम्मीदवारों के निर्विरोध निर्वाचन का रास्ता साफ हो गया।
BJP के ये आठ प्रत्याशी पहुंचे राज्यसभा
भाजपा की ओर से निर्विरोध निर्वाचित होने वाले प्रत्याशियों में उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री धर्मपाल सिंह, पार्टी के ओबीसी मोर्चा से जुड़े प्रकाश पाल, श्रुति गंगवार, विद्यासागर सोनकर, प्रियंका सिंह रावत, राधाकांत ओझा, गोपी कृष्ण पांडेय और राम प्रताप सिंह चौहान शामिल हैं।
भाजपा ने उम्मीदवारों के चयन में जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखा। सूची में पिछड़े वर्ग, अनुसूचित जाति और सामान्य वर्ग के अलग-अलग समुदायों का प्रतिनिधित्व शामिल है। पार्टी ने दो महिला उम्मीदवारों—प्रियंका सिंह रावत और श्रुति गंगवार—को भी मौका दिया।
सपा के राम गोपाल यादव और धनराज नथवानी निर्विरोध निर्वाचित
समाजवादी पार्टी की ओर से वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय महासचिव राम गोपाल यादव तथा धनराज परिमल नथवानी राज्यसभा के लिए निर्विरोध चुने गए हैं।
चुनाव से पहले सपा के तीसरे प्रत्याशी को मैदान में उतारने की संभावनाओं पर चर्चा हो रही थी। हालांकि, पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने तीसरा उम्मीदवार उतारने की अटकलों पर विराम लगाते हुए विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर जोर दिया।
अखिलेश यादव ने अपने राजनीतिक संदेश में कहा कि अब पार्टी का फोकस तीन सीटों पर नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर है। इसे 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारी के लिहाज से अहम संकेत माना जा रहा है।
दो निर्दलीय प्रत्याशियों के नामांकन खारिज
राज्यसभा की 10 सीटों के लिए कुल 12 नामांकन दाखिल किए गए थे। इनमें भाजपा के आठ, सपा के दो और दो निर्दलीय प्रत्याशी शामिल थे।
नामांकन पत्रों की जांच के दौरान निर्दलीय उम्मीदवार कांते स्याना और ओंकार नाथ चौरसिया के नामांकन अनिवार्य शर्तें पूरी नहीं करने के कारण खारिज कर दिए गए। इसके बाद चुनावी मैदान में भाजपा और सपा के कुल 10 प्रत्याशी ही रह गए।
चूंकि ये सभी उम्मीदवार उपलब्ध 10 सीटों के मुकाबले में निर्विरोध चुने गए, इसलिए मतदान कराने की जरूरत नहीं पड़ी।
2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक संदेश
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव का यह परिणाम भाजपा और सपा के बीच आगामी राजनीतिक मुकाबले के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है। भाजपा ने आठ सीटें हासिल कीं, जबकि सपा को दो सीटें मिलीं। वहीं, अखिलेश यादव का 403 विधानसभा सीटों पर ध्यान केंद्रित करने वाला बयान बताता है कि पार्टी की रणनीति अब राज्य के अगले विधानसभा चुनाव की ओर बढ़ रही है।
राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही राजनीतिक दलों का ध्यान अब संगठन, जनसंपर्क और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर रहने की संभावना है।









