प्रयागराज | 19 अक्टूबर 2026
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी के चर्चित प्रमोद कुमार निगम हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे नंदलाल राय उर्फ बबलू राय को बड़ी कानूनी राहत दी है। अदालत ने उनकी अपील पर अंतिम फैसला आने तक दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगा दी है। साथ ही, उनकी जमानत अर्जी भी मंजूर कर ली गई है।
यह मामला राजनीतिक चर्चा में इसलिए आया है क्योंकि नंदलाल राय ने अदालत में दलील दी थी कि वह वर्ष 2027 में होने वाला उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं। उनके वकील के मुताबिक, राय निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में या अवसर मिलने पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के टिकट पर चुनाव लड़ने की इच्छा रखते हैं।
2027 के चुनाव का हवाला देकर मांगी राहत
नंदलाल राय की आपराधिक अपील पर न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने सुनवाई की। बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि राय दोषी ठहराए जाने से पहले भाजपा के सक्रिय कार्यकर्ता रहे थे और अब आगामी विधानसभा चुनाव में हिस्सा लेना चाहते हैं।
अदालत ने अपने आदेश में इस बात पर विचार किया कि दोषसिद्धि पर रोक नहीं लगने की स्थिति में चुनाव लड़ने का उनका अवसर प्रभावित हो सकता है। पीठ ने पूर्व के न्यायिक फैसलों का उल्लेख करते हुए मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के आधार पर दोषसिद्धि तथा सजा पर रोक लगाने का निर्णय लिया।
अप्रैल 2025 में सुनाई गई थी उम्रकैद
नंदलाल राय को वर्ष 2017 में हुए प्रमोद कुमार निगम हत्याकांड में वाराणसी की अदालत ने अप्रैल 2025 में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इसके बाद उन्होंने फैसले को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट में अपील दायर की और अपील का निपटारा होने तक दोषसिद्धि तथा सजा पर रोक लगाने की मांग की।
प्रमोद कुमार निगम को राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़ा सक्रिय व्यक्ति बताया गया है। मामले में बचाव पक्ष ने दलील दी कि अभियोजन का मामला परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है। वकील ने प्राथमिकी में नाम नहीं होने, गवाहों की विश्वसनीयता और साक्ष्यों से जुड़े कुछ पहलुओं पर भी सवाल उठाए। ये बचाव पक्ष की अदालत में रखी गई दलीलें हैं, न कि अपील पर अंतिम न्यायिक निष्कर्ष।
मुख्तार अंसारी से करीबी के दावे भी चर्चा में
नंदलाल राय का नाम मीडिया रिपोर्टों में दिवंगत माफिया-राजनेता मुख्तार अंसारी के करीबी के तौर पर भी सामने आता रहा है। हालांकि, इस पहलू को आरोप या रिपोर्टों में किए गए दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
क्या अब चुनाव लड़ सकेंगे नंदलाल राय?
हाईकोर्ट के आदेश से राय को फिलहाल कानूनी राहत मिली है, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि उन्हें हत्या के मामले में बरी कर दिया गया है। उनकी अपील पर अंतिम फैसला अभी बाकी है। दोषसिद्धि और सजा पर रोक के चुनावी प्रभाव तथा अन्य लागू कानूनी शर्तों के आधार पर ही उनकी उम्मीदवारी की स्थिति तय होगी।
अदालत ने जमानत के लिए निर्धारित औपचारिकताओं और कुछ शर्तों का पालन करने का निर्देश भी दिया है। ऐसे में इस मामले का अगला महत्वपूर्ण चरण उनकी लंबित अपील की सुनवाई और उस पर आने वाला अंतिम फैसला होगा।
डिस्क्लेमर: यह खबर अदालत के आदेश और उपलब्ध रिपोर्टों पर आधारित है। हाईकोर्ट ने फिलहाल दोषसिद्धि और सजा पर रोक लगाई है; इसे अंतिम बरी होने का फैसला नहीं माना जाना चाहिए।









