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राजा भैया ने दशहरे पर किया शस्त्र पूजन, 500 से ज्यादा हथियारों के बीच बोले हाथी के दांत दिखाने के अलग होते हैं

प्रतापगढ़, उत्तर प्रदेश। विजयादशमी के अवसर पर कुंडा स्थित बेंती कोठी में आयोजित शस्त्र पूजन कार्यक्रम एक बार फिर चर्चा में आ गया। जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के अध्यक्ष और कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने मंगलवार, 20 अक्टूबर 2026 को पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पूजा-अर्चना की। इस दौरान 500 से अधिक हथियार रखे जाने की जानकारी सामने आई।

केसरिया साफे में नजर आए राजा भैया

कार्यक्रम के दौरान राजा भैया पारंपरिक धोती-कुर्ता और केसरिया साफा पहने नजर आए। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच शस्त्र पूजन किया गया। आयोजन में उनके जुड़वां बेटे शिवराज सिंह और बृजराज सिंह भी मौजूद रहे। इसके अलावा क्षेत्र के कई जनप्रतिनिधियों और समर्थकों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया।

बताया गया कि समर्थक भी अपने लाइसेंसी हथियारों के साथ पहुंचे थे। आयोजन में हथियारों के साथ पहचान संबंधी पर्चियां और लाइसेंस रखे जाने की बात भी सामने आई।

हाथी के दांत वाले बयान ने खींचा ध्यान

शस्त्र पूजन के दौरान राजा भैया के बयान की भी चर्चा होने लगी। हथियारों की संख्या को लेकर उन्होंने कहा, “हाथी के दांत दिखाने के अलग होते हैं, खाने के अलग।” उनके इस कथन को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चाएं हो रही हैं।

राजा भैया ने विजयादशमी पर शस्त्र पूजन को प्राचीन परंपरा बताते हुए धर्म और राष्ट्र की रक्षा के संकल्प की बात कही। उन्होंने भारतीय संस्कृति और पारंपरिक पहनावे को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया।

पुरानी परंपरा और नए सियासी मायने

बेंती कोठी में दशहरे पर शस्त्र पूजन का आयोजन लंबे समय से होता रहा है। हालांकि, बड़ी संख्या में हथियारों की मौजूदगी और राजा भैया के बयान के कारण इस बार भी यह कार्यक्रम सुर्खियों में है।

इस आयोजन को समर्थक धार्मिक और पारिवारिक परंपरा से जोड़कर देखते हैं। वहीं, हथियारों के सार्वजनिक प्रदर्शन और बयान को लेकर राजनीतिक हलकों में भी चर्चा हो रही है।

पहले भी उठ चुके हैं हथियारों को लेकर सवाल

राजा भैया के हथियारों को लेकर पहले भी विवाद सामने आ चुका है। सितंबर 2025 में उनकी पत्नी भानवी सिंह ने अवैध हथियारों को लेकर आरोप लगाए थे। राजा भैया के करीबी अक्षय प्रताप ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा था कि संबंधित हथियार लाइसेंसी हैं। इन आरोपों और जवाबों को अलग-अलग दावों के रूप में देखा जाना चाहिए।

दशहरे पर आयोजित इस बार के शस्त्र पूजन की तस्वीरों और वीडियो के सामने आने के बाद राजा भैया एक बार फिर चर्चा के केंद्र में हैं। धार्मिक परंपरा, बड़ी संख्या में हथियारों की मौजूदगी और उनके बयान ने इस आयोजन को राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बना दिया है।

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