पूर्वांचल राज्य ब्यूरो
महराजगंज:अखंड सौभाग्य, अटूट विश्वास और दांपत्य प्रेम का महापर्व करवा चौथ गुरुवार को महराजगंज जनपद सहित ग्रामीण अंचलों में पारंपरिक श्रद्धा और भारी उत्साह के साथ मनाया गया। पति की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए महिलाओं ने दिनभर निर्जला व्रत रखकर कठिन साधना की। हालांकि, इस बार त्योहार पर मौसम का मिजाज पूरी तरह बदला नजर आया। बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ और पश्चिमी विक्षोभ के असर के चलते जिले में मौसम पूरी तरह प्रभावित रहा, जिससे रात को व्रती महिलाओं को चांद का दीदार नहीं हो सका।
तूफानी प्रकोप से बदला मौसम, बाजारों की रौनक हुई फीकी
गुरुवार सुबह से ही जनपद में आसमान घने काले बादलों से पटा रहा। ठंडी हवाओं के चलने और रुक-रुक कर हुई हल्की बूंदाबांदी ने मौसम में अचानक तल्खी ला दी। बेमौसम बदले इस मिजाज का असर त्योहार की तैयारियों पर भी साफ देखने को मिला। घुघली, निचलौल और नौतनवा सहित जिले के प्रमुख बाजारों में दोपहर के समय बूंदाबांदी होने की वजह से खरीदारी प्रभावित हुई, जिससे दुकानदारों को भी कुछ हद तक नुकसान उठाना पड़ा। मौसम की इस प्रतिकूलता के बावजूद महिलाओं का हौसला डिगा नहीं और उन्होंने विधि-विधान से पर्व की शुरुआत की।
चांद की ओझल ओट ने बढ़ाया इंतजार, छलनी लेकर छतों पर डटी रहीं सुहागिनें
शाम को महिलाओं ने नए वस्त्र और पारंपरिक शृंगार में सज-धजकर करवा माता की सामूहिक पूजा-अर्चना की और पुरोहितों से कथा सुनी। जैसे ही रात को पंचांग के अनुसार चंद्रोदय का समय हुआ, सुहागिनें छलनी और पूजा की थाली लेकर छतों पर पहुंच गईं। हालांकि, घने बादलों की मोटी परत और लगातार जारी बूंदाबांदी की वजह से आसमान में चांद पूरी तरह ओझल रहा। काफी देर तक टकटकी लगाए इंतजार करने के बाद भी जब चंद्रमा के दर्शन नहीं हुए, तो व्रती महिलाओं की उत्सुकता चिंता में बदलने लगी।
धार्मिक नियमों और पंचांग के अनुसार खोला गया व्रत
ऐसी विकट स्थिति में महिलाओं ने सनातन परंपरा के अनुसार शास्त्रों में वर्णित ज्योतिषीय विकल्पों का सहारा लिया। चंद्रोदय के निर्धारित समय को आधार मानकर व्रतियों ने चंद्रमा के उदय होने की दिशा (उत्तर-पूर्व) की ओर मुख किया और जल का अर्घ्य दिया। कई परिवारों में सुहागिनों ने भगवान शिव के मस्तक पर विराजमान चंद्रमा का ध्यान कर पूजा संपन्न की, तो वहीं अधिकांश जगहों पर थाली या दीवार पर चावल के आटे और चंदन से प्रतीकात्मक चांद की आकृति बनाकर विधि-विधान से दर्शन किए गए। इसके बाद पतियों के हाथों जल ग्रहण कर महिलाओं ने अपना कठिन व्रत खोला और घर के बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया। प्रतिकूल मौसम भी महराजगंज की महिलाओं की अडिग धार्मिक आस्था को कम नहीं कर सका।










