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पीलीभीत वोटर लिस्ट विवाद में चुनाव आयोग का बड़ा एक्शन, दो SDM सस्पेंड; बिना अनुमति नहीं हो सकेगी बहाली

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में मतदाता सूची में कथित गड़बड़ी के मामले में चुनाव आयोग ने सख्त कदम उठाया है। आयोग ने पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ERO) रहे मयंक गोस्वामी और हेमंत चौधरी को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने का निर्देश दिया है। दोनों अधिकारियों के आरोप-पत्र आयोग को जांच और परीक्षण के लिए भेजे जाएंगे। आयोग ने स्पष्ट किया है कि उसकी पूर्व अनुमति के बिना दोनों अधिकारियों की बहाली नहीं की जा सकेगी।

दोनों अधिकारी पहले पीलीभीत से हटाए जा चुके थे और उन्हें लखनऊ में प्रतीक्षा सूची में रखा गया था। अब चुनाव आयोग के ताजा निर्देश के बाद उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई का दायरा बढ़ गया है। आयोग ने उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा को इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है।

13,779 फॉर्म-8 आवेदन दर्ज, 10,470 हुए स्वीकृत

मामले की जांच में सामने आया कि 31 मई से 29 अगस्त 2026 के बीच पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में मतदाता विवरण में संशोधन के लिए 13,779 फॉर्म-8 आवेदन ऑनलाइन दर्ज किए गए। इनमें से 10,470 आवेदन स्वीकृत किए गए, जबकि 3,309 आवेदन निरस्त हुए।

जांच के दौरान इन आवेदनों से संबंधित भौतिक फॉर्म और सहायक दस्तावेज कार्यालय में उपलब्ध नहीं मिले। इसी आधार पर मतदाता सूची में दर्ज बदलावों की प्रक्रिया और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठे। मामले में पहले ही दो अधिकारियों और वोटर रजिस्ट्रेशन सेंटर के कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है।

एफआईआर में BNS की धारा 198 जोड़ने का निर्देश

चुनाव आयोग ने पहले से दर्ज एफआईआर में भारतीय न्याय संहिता की धारा 198 जोड़ने के निर्देश भी दिए हैं। यह धारा लोक सेवक द्वारा कानून के निर्देश की अवहेलना से संबंधित है। आयोग ने संबंधित अधिकारियों को मामले की कानूनी कार्रवाई को गंभीरता से आगे बढ़ाने और अदालत में प्रभावी पैरवी सुनिश्चित करने को कहा है।

इसके साथ ही आयोग ने वोटर रजिस्ट्रेशन सेंटर के कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार के खिलाफ की गई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र के पांच सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों यानी AEROs की भूमिका की जांच कर तीन दिन के भीतर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है।

पीलीभीत की चारों विधानसभा सीटों की मतदाता सूची की जांच

आयोग ने पीलीभीत जिले की चारों विधानसभा सीटों की मतदाता सूचियों की दोबारा जांच कराने को कहा है। जिला निर्वाचन अधिकारी को इस जांच की विस्तृत रिपोर्ट एक सप्ताह के भीतर उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की टिप्पणी के साथ आयोग को भेजनी होगी।

यह कार्रवाई केवल पीलीभीत तक सीमित नहीं रखी गई है। आयोग ने उत्तर प्रदेश के सभी जिला निर्वाचन अधिकारियों और निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों की मतदाता सूचियों की गहन समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं।

पूरे प्रदेश में फॉर्म 6, 7 और 8 की होगी दोबारा जांच

चुनाव आयोग ने विशेष रूप से फॉर्म 6, 7 और 8 के जरिए मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और विवरण में संशोधन की प्रक्रिया की जांच करने को कहा है। इन फॉर्मों से जुड़े ऑनलाइन रिकॉर्ड, दस्तावेज और डेटा एंट्री का मिलान किया जाएगा, ताकि किसी भी तरह की अनियमितता सामने आने पर कार्रवाई की जा सके।

मयंक गोस्वामी पर संपत्ति को लेकर अलग आरोप की भी चर्चा

मयंक गोस्वामी पर पीलीभीत में तैनाती के दौरान कथित तौर पर करोड़ों रुपये अर्जित करने और धन को रियल एस्टेट में लगाने का एक अलग आरोप भी लगाया जा रहा है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि या जांच का आधिकारिक निष्कर्ष फिलहाल उपलब्ध नहीं है। इसलिए इसे प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता। इस पहलू पर किसी आधिकारिक जांच या कार्रवाई की पुष्टि होने पर ही स्थिति स्पष्ट होगी।

चुनाव आयोग के ताजा निर्देशों के बाद अब जांच का दायरा पीलीभीत की चारों विधानसभा सीटों से बढ़कर पूरे उत्तर प्रदेश की मतदाता सूचियों तक पहुंच गया है। तीन दिन और एक सप्ताह की समय-सीमा में मांगी गई रिपोर्टों के बाद यह स्पष्ट होगा कि इस मामले में अन्य किन अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका सामने आती है।

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