बांदा की जन अधिकार रैली में दिया बयान, बोले— कमजोरों को डराने वालों को चुनौती देने के लिए इस्तेमाल की ऐसी भाषा
उत्तर प्रदेश की राजनीति में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर का एक बयान चर्चा का विषय बन गया है। बांदा जिले के बबेरू में आयोजित जन अधिकार महारैली को संबोधित करते हुए राजभर ने खुद को देश का सबसे बड़ा गुंडा बताया। अपने संबोधन में उन्होंने मुख्तार अंसारी, धनंजय सिंह, बृजेश सिंह और अभय सिंह का नाम लेते हुए दावा किया कि ऐसे लोग उनके यहां दरबार लगाते थे।
राजभर के इस बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद राजनीतिक हलकों में बहस शुरू हो गई। उन्होंने सभा में मौजूद लोगों से कहा कि उन्हें किसी से डरने की जरूरत नहीं है। यदि कोई उनके समर्थकों को आंख दिखाने की कोशिश करेगा तो वे उसका जवाब देने की क्षमता रखते हैं। इसी दौरान उन्होंने आंख निकालने जैसी भाषा का भी इस्तेमाल किया, जिस पर विवाद खड़ा हो गया।
बांदा की रैली में क्या बोले ओपी राजभर
यह कार्यक्रम बांदा के बबेरू स्थित नवीन मंडी परिसर में भागीदारी पार्टी की ओर से आयोजित जन अधिकार महारैली थी। राजभर इसमें मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए थे। भाषण के दौरान उन्होंने कहा कि उन्होंने बांदा के बारे में बड़े दबंगों की चर्चा सुनी है, लेकिन उनसे बड़ा गुंडा पूरे देश में कोई नहीं है।
उन्होंने अपने दावे के समर्थन में मुख्तार अंसारी, बृजेश सिंह, धनंजय सिंह और अभय सिंह के नाम लिए। राजभर ने कहा कि ये लोग उनके यहां दरबार लगाते थे। हालांकि, इन नामों के साथ किया गया उनका दावा उनका व्यक्तिगत बयान है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। उल्लेखनीय है कि मुख्तार अंसारी का वर्ष 2024 में निधन हो चुका है।
सपा पर भी लगाए आरोप, प्रजापति समाज का उठाया मुद्दा
रैली में राजभर ने समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा के स्थानीय नेता और विधायक प्रजापति समाज के लोगों को कार्यक्रम में शामिल होने से रोकने के लिए दबाव बना रहे हैं। राजभर ने दावा किया कि लोगों को रैली में आने से हतोत्साहित किया जा रहा था।
उन्होंने प्रजापति समाज की राजनीतिक भागीदारी और अधिकारों का मुद्दा उठाते हुए लोगों से अपने संगठन को मजबूत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोग दूसरे दलों का झंडा उठाने के बजाय अपनी राजनीतिक पहचान और अपने संगठन के लिए काम करें।
वायरल बयान पर राजभर की सफाई
बयान को लेकर विवाद बढ़ने के बाद ओम प्रकाश राजभर ने सफाई देते हुए कहा कि उन्होंने कुछ गलत नहीं कहा। उनके मुताबिक, जिन इलाकों में दबंग लोग गरीबों और कमजोर वर्गों को डराकर रखते हैं, वहां वे ऐसे लोगों को चुनौती देने के लिए इस तरह की भाषा का इस्तेमाल करते हैं।
राजभर ने अपनी बात दोहराते हुए कहा कि उनका उद्देश्य कमजोर लोगों का हौसला बढ़ाना और उन्हें डर से बाहर निकालना है। इस सफाई के बाद भी उनके बयान में इस्तेमाल की गई भाषा को लेकर राजनीतिक चर्चा जारी है।
अखिलेश यादव और सपा की प्रतिक्रिया पर क्या है स्थिति
इस बयान को लेकर अखिलेश यादव की ओर से प्रतिक्रिया दिए जाने की बात भी चर्चा में है। हालांकि, उपलब्ध पुष्ट रिपोर्टों में उनके उस कथित बयान का स्पष्ट और पूरा विवरण नहीं मिला, जिसमें उन्होंने राजभर पर भाजपा को धमकाने का आरोप लगाया हो। इसलिए इस प्रतिक्रिया को आधिकारिक बयान के रूप में प्रकाशित करने से पहले उसका मूल वीडियो या प्रमाणित बयान देखना जरूरी है।
फिलहाल राजभर के बयान, उसमें लिए गए नामों और बाद में दी गई सफाई ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। सवाल यह भी उठ रहा है कि सार्वजनिक पद पर बैठे नेताओं की भाषा और राजनीतिक मंचों से दिए जाने वाले ऐसे बयानों की मर्यादा कहां तय होनी चाहिए।










