लखनऊ। बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की भगवान श्रीकृष्ण को लेकर की गई टिप्पणी पर धार्मिक और राजनीतिक हलकों में विवाद गहरा गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इस बयान को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और आपत्तिजनक बताते हुए इसकी जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं, विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र शास्त्री ने सफाई देते हुए खेद जताया और कहा कि उनका उद्देश्य भगवान श्रीकृष्ण का अपमान करना नहीं था। हालांकि, अखिलेश यादव की ताजा प्रतिक्रिया के बाद यह मामला फिर चर्चा में आ गया है।
राम और कृष्ण की तुलना वाले बयान से शुरू हुआ विवाद
यह विवाद मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले के करेरा में आयोजित रामकथा के दौरान दिए गए धीरेंद्र शास्त्री के एक बयान से शुरू हुआ। सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में शास्त्री भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण के स्वरूप तथा उनकी मुद्राओं का उल्लेख करते हुए तुलना करते सुनाई दिए। उनकी टिप्पणी को कई लोगों ने भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अनुचित और अपमानजनक माना।
वीडियो सामने आने के बाद मथुरा और ब्रज क्षेत्र के कुछ संतों तथा धार्मिक लोगों ने आपत्ति जताई। उनका कहना था कि दोनों आराध्य पूजनीय हैं और उनके बीच इस तरह की तुलना से भक्तों की भावनाएं आहत हो सकती हैं।
अखिलेश यादव ने बताया सनातन समाज की एकता से जुड़ा मामला
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने 2 नवंबर को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पूजनीय अवतारों के बीच नकारात्मक भाव से अपमानजनक तुलना करना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके मुताबिक, भगवान श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण दोनों एक ही परम सत्ता के अवतार हैं और उनके भक्तों के बीच किसी प्रकार का भेद नहीं होना चाहिए।
अखिलेश ने सवाल उठाया कि जब दोनों अवतार अपने-अपने समय और परिस्थितियों के अनुरूप लोककल्याण से जुड़े हैं, तो उन्हें एक-दूसरे से बेहतर बताने वाली तुलना का औचित्य क्या है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह की टिप्पणियों से सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है।
सपा प्रमुख ने मामले की गहरी जांच कराने की मांग करते हुए सवाल किया कि क्या इसके पीछे कोई बाहरी या आंतरिक ताकत काम कर रही है। उन्होंने राजनीतिक दलों और उनके समर्थकों से भी ऐसे बयानों के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाने की अपील की।
माफी के बाद भी अखिलेश का रुख सख्त
विवाद बढ़ने के बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने वीडियो जारी कर अपनी बात स्पष्ट की। उन्होंने कहा कि उनकी टिप्पणी को गलत अर्थ में लिया गया है और उनका भगवान श्रीकृष्ण के प्रति अनादर का कोई भाव नहीं था। उन्होंने खुद को भगवान श्रीकृष्ण का भक्त बताते हुए कहा कि वे समाज में भगवान राम और कृष्ण के बीच कोई भेद पैदा नहीं करना चाहते थे। यदि उनकी बातों से किसी की भावनाएं आहत हुई हैं तो उन्होंने खेद जताया।
लेकिन 3 नवंबर को अखिलेश यादव ने इस सफाई के बाद भी अपना विरोध जारी रखा। उन्होंने कहा कि मानवीय भूलों के लिए क्षमा हो सकती है, लेकिन उनके अनुसार इस तरह की टिप्पणी को सामान्य भूल मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री के कार्यक्रमों पर आजीवन प्रतिबंध लगाने और नए कार्यक्रमों की अनुमति नहीं देने की मांग भी उठाई। साथ ही वैधानिक कार्रवाई की मांग दोहराई।
अहिल्याबाई होल्कर से लेकर मंदिरों तक का किया जिक्र
अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों से जुड़े कई अन्य विवादों का भी उल्लेख किया। उन्होंने देवी अहिल्याबाई होल्कर की मूर्ति, मणिकर्णिका घाट, मंदिरों को नुकसान पहुंचाने के आरोपों, शंकराचार्य और उनके बटुकों से जुड़े विवादों तथा जन्माष्टमी के आयोजन को लेकर उठे सवालों का जिक्र किया।
सपा अध्यक्ष ने इन घटनाओं को सामाजिक सौहार्द के नजरिए से देखने और इनके पीछे की परिस्थितियों की पड़ताल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म, मजहब, संप्रदाय या उनके आराध्यों और महापुरुषों के प्रति अपमानजनक टिप्पणी स्वीकार नहीं की जानी चाहिए।
बयान, सफाई और राजनीतिक प्रतिक्रिया के बीच बढ़ी बहस
इस पूरे प्रकरण में अब तीन स्तरों पर बहस चल रही है। पहला, धीरेंद्र शास्त्री की टिप्पणी का वास्तविक संदर्भ और उससे आहत हुई धार्मिक भावनाएं। दूसरा, उनकी ओर से दी गई सफाई और खेद जताने का मामला। तीसरा, अखिलेश यादव की ओर से उठाई गई जांच, वैधानिक कार्रवाई और कार्यक्रमों पर प्रतिबंध की मांग।
फिलहाल विवाद पर अलग-अलग धार्मिक और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। अब निगाहें इस बात पर हैं कि क्या इस मामले में कोई औपचारिक शिकायत या कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ती है, और क्या धीरेंद्र शास्त्री की सफाई के बाद विवाद शांत होता है या राजनीतिक बयानबाजी और तेज होती है।










