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राजनितिक दृष्टिकोण से इंडी गठबंधन के लिए कितना फायदेमंद होगा जेएमएम का साथ ?

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राजनितिक दृष्टिकोण से इंडी गठबंधन के लिए कितना फायदेमंद होगा जेएमएम का साथ?
– एक चर्चा के अनुसार जेएमएम कर रहा 12 विधानसभा सीटों पर दावेदारी
– क्या जेएमएम का साथ चुनाव परिणामों पर डालेगा असर

संतोष सहाय, मुंगेर : झारखंड सीएम हेमंत सोरेन की पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा महागठबंधन में शामिल होकर बिहार के चुनावी मैदान में उतरने की कोशिष में हैं। जिसकी घोषणा तेजस्वी के घर पर हुई बैठक में हुई थी। जेएमएम के महागठबंधन में शामिल होने के बाद अब चर्चा इस बात की है कि हेमंत सोरेन की पार्टी बिहार की किन-किन सीटों पर चुनाव लड़ेगी?
इस बार महागठबंधन के साथ जेएमएम
झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के महागठबंधन (INDIA ब्लॉक) के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का निर्णय राजनीतिक दृष्टिकोण से बेहद अहम है, क्योंकि जेएमएम पहले बिहार में स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने की कोशिश करती आई है, लेकिन अब इस गठबंधन में शामिल होकर मुकाबले में उतर रही है। यह कदम न केवल भविष्य के राजनीतिक समीकरणों को प्रभावित करेगा, बल्कि अभियान के आधार-स्तर से लेकर चुनाव परिणामों तक इसका असर रहेगा।
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जेएमएम ने 12 सीटों पर ठोका है दावा
वैसे तो अभी सीट-शेयरिंग का अंतिम निर्धारण बाकी है, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जेएमएम ने महागठबंधन में 12 सीटों पर दावा पेश किया है। चर्चा यह भी है कि झारखंड मुक्ति मोर्चा को 7–8 सीट मिल सकती है। लेकिन आख़िर वो कौन से सीटें होंगी, जहां जेएमएम अपनी किस्मत आज़माएगी।
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जेएमएम की नजर में हैं बिहार की ये 6 सीटें
सूत्रों की माने तो पूर्णिया, बांका, धमदाहा, चकाई, तारापुर, कटोरिया जैसे निर्वाचन क्षेत्र फिलहाल जेएमएम की नजर में हैं। इसमें बांका, कटोरिया, चकाई, तारापुर आदि बिहार-झारखंड की सीमा पर स्थित विधानसभा सीटें है, जहां जेएमएम का प्रभाव है। इसके अलावा पूर्णिया और धमदाहा की सीट पर भी जेएमएम दावा कर रही है। धमदाहा में आदिवासी वोटरों की संख्या प्रभावी है।
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बोले जेएमएम के नेता – सीटें प्रभावशाली मिलनी चाहिए

नाम नहीं छापने की शर्त पर झारखंड मुक्ति मोर्चा के एक वारिष्ठ नेता ने NDTV को फ़ोन पर बताया कि महागठबंधन हिस्से के रूप में, RJD, कांग्रेस और वामपंथी दलों के साथ गठबंधन में, पार्टी कम सीटों पर भी मान सकती है, लेकिन सीट प्रभावशाली होनी चाहिए.
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सीमावर्ती और आदिवासी बहुल इलाकों में जेएमएम का अच्छा प्रभाव

जेएमएम बिहार के सीमावर्ती और आदिवासी बहुल इलाकों में महत्त्वपूर्ण वोट बैंक रखती है, जिससे गठबंधन को सामाजिक वोट बढ़ाने में मदद मिल सकती है। बिहार विधान सभा चुनाव में जेएमएम का शामिल होना आरजेडी केंद्रित गठबंधन में जोड़-तोड़ और विस्तार का संकेत हैं, जो सीट बांटने की प्रक्रिया को संतुलित बनाए रखने में सहायक होगा।
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वोटर अधिकार यात्रा में मंच पर महागठबंधन नेताओं के साथ मंच थे हेमंत सोरेन
बिहार विधानसभा चुनाव में जेएमएम का प्रदर्शन
बिहार विधानसभा चुनाव में झारखंड मुक्ति मोर्चा के पिछले प्रदर्शन की बात करें तो 2010 के चुनाव में जमुई के चकाई से सुमित सिंह ने झारखंड मुक्ति मोर्चा के टिकट पर जीत हासिल की थी। तो 2015 के चुनाव में जेएमएम 32 सीटों पर चुनाव लड़ी थी, और सभी सीटों पर जमानत जब्त हुई थी।
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जेएमएम का साथ आना सीमावर्ती राजनीति में बड़ा कदम

झारखंड मुक्ति मोर्चा का बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में महागठबंधन के हिस्से के तौर पर शामिल होना न केवल राजनीतिक दिशा में बदलाव है, बल्कि यह आदिवासी, सीमावर्ती और क्षेत्रीय राजनीति में एक बड़ा कदम है. इस बार महागठबंधन के साथ चुनाव लड़कर जेएमएम बिहार में अपनी उपस्थिति दर्ज कराना चाहेगी।
जेएमएम को मिलने वाली सीटें इस बात से भी तय होगी कि पिछले साल झारखंड में हुए चुनाव में राजद को कितनी सीटें दी गई थी। क्योंकि झारखंड में जेएमएम बड़े भाई की भूमिका में थी। लेकिन बिहार में अगर इंडी गठबंधन की बात करें तो राजद बड़े भाई की भूमिका में है। बात झारखंड विधानसभा चुनाव 2024 की करें तो जेएमएम ने राजद को 6 सीटें दी थी, जिसमें से 4 पर राजद उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी। जिनमे गोड्डा, देवघर, विश्रामपुर, और हुसैनाबाद शामिल हैं।
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जेएमएम ने झारखंड की 81 में से 6 सीटें आरजेडी को दी थी।
सियासी जानकारों का कहना है कि जब हेमंत सोरेन झारखंड की कुल 81 में से 6 सीट राजद को दे सकते हैं तो राजद को भी बिहार की 243 सीटों में से 7-8 सीट जेएमएम को देने में कोई दिक्कत नहीं होनी चाहिए। अब देखना है कि इंडिया गठबंधन जेएमएम सहित अन्य सहयोगियों में सीटों का बंटवारा कैसे करती है।

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