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कर्नाटक, पंजाब और हिमाचल में चुनाव आयोग सही था? स्मृति ईरानी ने राहुल गांधी और कांग्रेस से पूछा सवाल

नई दिल्ली

चुनाव आयोग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। इसी बीच बीजेपी की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी ने कांग्रेस और राहुल गांधी के चुनाव आयोग पर उठाए जा रहे सवालों को लेकर कई राज्यों का हवाला देते हुए पलटवार किया है।

29 सितंबर को नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान स्मृति ईरानी ने सवाल उठाया कि यदि कांग्रेस मौजूदा समय में चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रही है, तो हिमाचल प्रदेश, पंजाब, केरल और कर्नाटक जैसे उन राज्यों में चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर उसका क्या रुख था, जहां बीजेपी सत्ता में नहीं है।

मृत और डुप्लीकेट मतदाताओं के नाम को लेकर भी सवाल

स्मृति ईरानी ने मतदाता सूची में डुप्लीकेट प्रविष्टियों और मृत मतदाताओं के नामों को लेकर भी कांग्रेस से सवाल किया। उन्होंने पूछा कि यदि ऐसे नाम मतदाता सूची में मौजूद हैं तो उन्हें हटाने या सत्यापित करने की प्रक्रिया पर आपत्ति क्यों की जा रही है।

ईरानी का यह बयान ऐसे समय आया है जब कांग्रेस ने SIR को लेकर चुनाव आयोग पर गंभीर सवाल उठाए हैं और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने तथा SIR प्रक्रिया को रोकने की मांग की है।

चुनाव आयोग ने SIR पर क्या कहा

SIR को लेकर उठे विवाद के बीच चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को स्पष्ट किया था कि देशभर में SIR लागू करने संबंधी आदेश मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी की सर्वसम्मति से मंजूर किए गए थे। आयोग ने यह भी कहा कि संबंधित बैठकों के एजेंडे पहले से साझा करने और बैठक की कार्यवाही के रिकॉर्ड रखने की व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।

हालांकि, आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्षी दलों की आपत्तियां बनी हुई हैं। कांग्रेस का कहना है कि मतदाता सूची में बदलाव और SIR की प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता जरूरी है। राहुल गांधी ने भी मतदाता नामों में कथित बदलावों को लेकर चुनाव आयोग पर लगातार सवाल उठाए हैं।

सियासी बयानबाजी के बीच बढ़ा विवाद

स्मृति ईरानी के ताजा बयान ने SIR विवाद को एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है। एक ओर बीजेपी चुनाव आयोग के फैसलों को संस्थागत प्रक्रिया के तहत लिया गया निर्णय बता रही है, वहीं कांग्रेस मतदाता सूची में बदलाव और आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर जवाबदेही और पारदर्शिता की मांग कर रही है।

फिलहाल विवाद का केंद्र यही है कि SIR की प्रक्रिया, मतदाता सूची में बदलाव और चुनाव आयोग की निर्णय प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों का तथ्यात्मक समाधान किस तरह सामने आता है।

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