पूर्वांचल राज्य संवाददाता दीपू तिवारी
सोनभद्र रेणुकूट। हिंडाल्को रामलीला परिषद के तत्वावधान में रामलीला के सातवें दिन विभीषण शरणागति, रावण मंदोदरी वार्ता और सेतुबंध रामेश्वर स्थापना की लीला का जीवंत चित्रण किया गया।
रावण को उनके अनुज विभीषण द्वारा समझाया जाता है कि राम और आप संधि कर लीजिए और माता जानकी को आदर सहित राम को सौंप दीजिए। ऐसा करने से आपका ही भला होगा। यह सुनकर रावण क्रोधित हो जाता है और विभीषण को पैर की ठोकर मारकर लंका से बाहर कर देता है।
विभीषण राम जी की शरण मे आ जाता है। राम जी विभीषण से पूछते है कि सागर को कैसे पार किया जाए, तब विभीषण के बताए अनुसार राम जी सागर से रास्ता मांगने के लिए उनसे विनय करते है। तीन दिन बीत जाने के पश्चात राम जी क्रोध से सागर को सुखाने के लिए ब्रह्मास्त्र का संधान करते है। तब सागर प्रकट हो जाता है। क्षमा याचना करता है। और राम जी को सेतु बनाने के लिए मार्ग बताता है। नल-नील के नेतृत्व में सेतु निर्माण का कार्य प्रारंभ होता है और राम जी रामेश्वरम की स्थापना करते हैं।
उसके बाद सुग्रीव के कहने पर श्री राम रावण को समझने के लिए अंगद को लंका जाने को कहते हैं।
मंचन से पहले मुख्य अतिथि रिडक्शन प्लांट हेड श्री जयेश पावर ने सपत्नी वैदिक विधि-विधान से गणेश पूजन कर मंचन का विधिवत शुभारंभ किया। इस दौरान रामलीला परिषद के अध्यक्ष पी0 के0 उपाध्याय, सचिव आदित्य प्रकाश पांडे, कोषाध्यक्ष श्री पद्माकर मिश्रा एवं निर्देशक श्री राजेन्द्र सिंह और श्री राजेश सिंह मौजूद रहे।









