चंदौली जिले के धानापुर के विजय दशमी तालाब पर उदयनाथ सिंह फाउंडेशन द्वारा आयोजित पांच दिवसीय श्रीराम कथा के तीसरे दिन गुरुवार को श्रद्धांलुओं कि भारी भीड़ उमड़ी कथावाचक पूज्य राजन जी महाराज ने गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस के प्रसंगों के माध्यम से श्रद्धालुओं को जीवन में भक्ति का महत्व समझाया तीसरे दिन पूर्वांचल के बाहुबली नेता और पूर्व सांसद धनंजय सिंह और बिहार सरकार के कैबिनेट मंत्री जमा खान भी शामिल हुए अंतर्राष्ट्रीय कथा वाचक राजन जी महाराज ने कहा कि जहां भगवान भोलेनाथ निवास करते हैं,वह स्थान अपने आप रमणीय हो जाता है। कैलाश पर्वत की सुंदरता केवल उसकी प्राकृतिक बनावट के कारण नहीं, बल्कि भगवान शिव के वहां निवास करने से भी है।उन्होंने कहा कि मनुष्य के भजन का गहरा प्रभाव होता है। शरीर बूढ़ा हो सकता है,लेकिन मन कभी बूढ़ा नहीं होता। भक्ति मन को सदैव तरोताजा बनाए रखती है। भगवान निराकार हैं,लेकिन भक्तों के प्रेम और भाव से वशीभूत होकर साकार रूप में प्रकट हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि भगवान शिव काशी में जीवों को तारक मंत्र के माध्यम से मुक्ति प्रदान करते हैं।कथा के दौरान माता पार्वती द्वारा भगवान श्रीराम के पृथ्वी पर प्रकट होने का कारण पूछने का प्रसंग सुनाया गया। राजन जी महाराज ने बताया कि जब धरती पर असुरों का आतंक बढ़ता है और देवता,गौ तथा ब्राह्मण दुखी होते हैं,तब भगवान धर्म की स्थापना और भक्तों के कष्ट दूर करने के लिए अवतार लेते हैं।उन्होंने भगवान श्रीराम के प्राकट्य से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का उल्लेख किया।इनमें जालंधर वध के बाद वृंदा का शाप, नारद जी का शाप, मनु और शतरूपा की कठिन तपस्या तथा राजा प्रतापभानु का प्रसंग शामिल रहा। उन्होंने कहा कि भगवान के अवतार के पीछे अनेक कारण और लीलाएं होती हैं।मनु और शतरूपा ने कठोर तपस्या करके भगवान को पुत्र रूप में प्राप्त करने का वरदान मांगा था।श्रीराम कथा के तीसरे दिन बिहार सरकार के कैबिनेट मंत्री जमा खान,पूर्व सांसद धनंजय सिंह,किरण प्रभाकर,भाजपा जिलाध्यक्ष काशीनाथ सिंह,राजयसभा सांसद साधना सिंह,पूर्व जिलाध्यक्ष अनिल सिंह,विधान परिषद सदस्य रिशु सिंह,राणा सिंह, सूर्यमुनी तिवारी,डॉ आनंद प्रकाश तिवारी,पूर्व विधायक रविंद्र त्रिपाठी,बंगाल के कैबिनेट मंत्री अतुल सिंह सहित अन्य लोग शामिल हुए
चंदौली जिले के धानापुर के विजय दशमी तालाब पर उदयनाथ सिंह फाउंडेशन द्वारा आयोजित पांच दिवसीय श्रीराम कथा









