लखनऊ के सआदतगंज में पार्किंग विवाद के बाद तीन लोगों की हत्या से दहला इलाका, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर नौकरी, बेटी की पढ़ाई और आजीवन सुरक्षा का दिया भरोसा
लखनऊ। राजधानी लखनऊ के सआदतगंज क्षेत्र में कार पार्किंग को लेकर शुरू हुआ विवाद तीन लोगों की मौत के बाद बड़े राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दे में बदल गया। शिवाजी तिवारी, उनके भाई शिवेंद्र तिवारी उर्फ शंभू और शिवाजी के बेटे सुयश की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। घटना के बाद आक्रोशित परिजनों और स्थानीय लोगों ने आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। अंतिम संस्कार से पहले परिवार और प्रशासन के बीच कई घंटे तक बातचीत चली।
मंगलवार, 27 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे। उन्होंने परिजनों को सांत्वना दी और मृतकों की अर्थियों को कंधा देकर अंतिम यात्रा में हिस्सा लिया। सरकार की ओर से परिवार को नौकरी, बेटी की पढ़ाई का खर्च और आजीवन सुरक्षा सहित कई आश्वासन दिए गए।
पांच घंटे तक चला विरोध, फिर अंतिम संस्कार के लिए तैयार हुआ परिवार
तीनों मृतकों के शव पोस्टमार्टम के बाद घर पहुंचे तो परिवार और स्थानीय लोगों में गहरा शोक और आक्रोश देखने को मिला। परिजनों ने आरोपियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई, बुलडोजर कार्रवाई और फांसी की मांग करते हुए अंतिम संस्कार करने से पहले अपनी मांगें रखीं।
विरोध के बीच पुलिस और प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों ने परिवार से बातचीत की। करीब चार से पांच घंटे तक चली चर्चा के बाद उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष नीरज सिंह और लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल सहित अन्य अधिकारी पीड़ित परिवार से मिलने पहुंचे।
परिवार को कार्रवाई का भरोसा मिलने के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया आगे बढ़ी। इस दौरान इलाके में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई थी।
ब्रजेश पाठक ने दिया अर्थियों को कंधा, परिवार के लिए बड़े ऐलान
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने पीड़ित परिवार से मुलाकात के दौरान कहा कि सरकार इस मामले में सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगी। उन्होंने मृतक शिवेंद्र तिवारी की पत्नी रुचि तिवारी को लखनऊ नगर निगम में विशेष कार्याधिकारी (OSD) के पद पर नियुक्त करने का आश्वासन दिया।
इसके अलावा दंपती की बेटी की पढ़ाई का खर्च उसकी शिक्षा जारी रहने तक सरकार की ओर से उठाने की बात कही गई। परिवार के बचे हुए सदस्यों की आजीवन सुरक्षा, मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक अदालत में कराने और आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत कार्रवाई की दिशा में कदम उठाने का भी भरोसा दिया गया।
उपमुख्यमंत्री ने मृतकों की अर्थियों को कंधा देकर परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की। इन घोषणाओं के बाद परिवार की मांगों और सरकार के आश्वासनों को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
दो पुलिस अधिकारी निलंबित, छह लोगों की गिरफ्तारी की जानकारी
घटना के बाद पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठे। परिवार ने आरोप लगाया कि पड़ोसी परिवार के साथ पहले से चल रहे विवाद को लेकर शिकायतें की गई थीं, लेकिन समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।
इसके बाद लखनऊ के पुलिस आयुक्त ने सआदतगंज थाना प्रभारी संतोष कुमार आर्य और कश्मीरी मोहल्ला चौकी प्रभारी अजय चौरसिया को निलंबित कर दिया। दोनों अधिकारियों के खिलाफ विभागीय जांच के आदेश भी दिए गए।
पुलिस की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, मामले में छह लोगों की गिरफ्तारी हुई है। वहीं, लखनऊ विकास प्राधिकरण ने आरोपी पक्ष के मकान के कथित अवैध हिस्से पर कार्रवाई की। इन कदमों के बीच मामले की जांच और आरोपियों की कानूनी जवाबदेही पर सबकी नजर बनी हुई है।
पार्किंग विवाद से कैसे बिगड़े हालात?
प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, सआदतगंज के ब्राह्मणी टोला और नौबस्ता इलाके में दो पड़ोसी परिवारों के बीच कार पार्किंग और बरगद के पेड़ के पास चबूतरे से जुड़े विवाद को लेकर लंबे समय से तनाव था। 26 अक्टूबर को विवाद बढ़ने के बाद गोलीबारी हुई, जिसमें शिवाजी तिवारी, शिवेंद्र तिवारी और सुयश की मौत हो गई।
पुलिस ने आरोपी ऋषभ शुक्ला को घटनास्थल से हिरासत में लिया था। मामले में अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। घटना की पूरी परिस्थितियों और प्रत्येक आरोपी की जिम्मेदारी का निर्धारण जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर होगा।
अब परिवार को इंसाफ मिलने की उम्मीद
तीन लोगों की मौत के बाद पीड़ित परिवार के सामने अपनों को खोने का दर्द और भविष्य की चिंता दोनों हैं। सरकार ने नौकरी, शिक्षा और सुरक्षा को लेकर आश्वासन दिया है। पुलिस अधिकारियों का निलंबन, गिरफ्तारियां और कथित अवैध निर्माण पर कार्रवाई भी इस मामले में प्रशासनिक कदमों के रूप में सामने आई हैं।
अब अहम सवाल यह है कि जांच कितनी तेजी से आगे बढ़ती है, अदालत में सुनवाई कब शुरू होती है और सरकार की ओर से किए गए वादे कितनी जल्दी जमीन पर उतरते हैं। पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए निष्पक्ष जांच और कानूनी प्रक्रिया का समयबद्ध पालन महत्वपूर्ण होगा।










