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दिल्ली पुलिस में बड़ा घटनाक्रम: ACP मनस्वी वशिष्ठ निलंबित, मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन के बाद बढ़ा विवाद

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस में वकीलों और पुलिसकर्मियों के बीच जारी विवाद ने मंगलवार, 3 नवंबर को नया मोड़ ले लिया। पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाली ACP मनस्वी वशिष्ठ को निलंबित किए जाने की खबर सामने आई है। यह कार्रवाई सोमवार को दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर हुए प्रदर्शन के एक दिन बाद हुई है। इस घटनाक्रम ने शाहदरा थाने से शुरू हुए विवाद को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।

मुख्यालय के बाहर जुटे थे सैकड़ों पुलिसकर्मी

सोमवार, 2 नवंबर को दिल्ली पुलिस के करीब 500 पुलिसकर्मी पुलिस मुख्यालय के बाहर एकत्र हुए थे। इनमें ACP मनस्वी वशिष्ठ और स्थानांतरित किए गए SHO अरुण कुमार के समर्थन में पहुंचे पुलिसकर्मी भी शामिल थे। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि दोनों अधिकारियों के तबादले पर पुनर्विचार किया जाए और पुलिसकर्मियों की सुरक्षा तथा कार्यस्थल पर आने वाली चुनौतियों को लेकर स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए।

प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों ने पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार से मुलाकात की मांग उठाई। उनकी प्रमुख मांगों में वकीलों और पुलिस के बीच विवाद की स्थिति से निपटने के लिए स्पष्ट SOP तैयार करना, पुलिसकर्मियों की शिकायतों के लिए व्यवस्था बनाना और अदालत परिसरों में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम करना शामिल था।

रिपोर्टों के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पुलिसकर्मियों के प्रतिनिधिमंडल की बातचीत भी हुई। इसके बाद पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने पुलिसकर्मियों से संवाद किया।

3 नवंबर को ACP के निलंबन की खबर

प्रदर्शन के अगले दिन ACP मनस्वी वशिष्ठ के निलंबन की खबर सामने आई। मीडिया रिपोर्टों में पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया गया कि उन्हें निलंबन पत्र प्राप्त हुआ है। बताया गया कि कार्रवाई सोमवार को हुए प्रदर्शन से जुड़ी है। हालांकि, निलंबन आदेश के विस्तृत आधार और विभागीय प्रक्रिया को लेकर सार्वजनिक रूप से पूरी जानकारी सामने नहीं आई है।

इसलिए निलंबन की खबर और उसके पीछे बताए जा रहे कारणों को अलग-अलग समझना जरूरी है। आधिकारिक आदेश का विस्तृत विवरण सामने आने के बाद ही कार्रवाई के आधार पर स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।

23 अक्टूबर को शाहदरा थाने से शुरू हुआ था विवाद

इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 23 अक्टूबर को शाहदरा पुलिस स्टेशन में हुए विवाद से हुई थी। मामला अधिवक्ता ललित बंसल को कथित तौर पर चोट लगने की घटना से जुड़ा था। इस मामले में अधिवक्ता अमूल्य रतन शिकायतकर्ता बताए गए हैं।

वकीलों का आरोप था कि मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर जब कुछ अधिवक्ता शाहदरा थाने पहुंचे, तो ACP मनस्वी वशिष्ठ और तत्कालीन SHO अरुण कुमार के साथ उनका विवाद हुआ। वकीलों ने आरोप लगाया कि पुलिस अधिकारियों ने उनके साथ अनुचित व्यवहार किया और ACP ने सर्विस रिवॉल्वर दिखाकर उन्हें धमकाया।

दूसरी ओर, ACP वशिष्ठ ने इन आरोपों को गलत बताया था। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, उनका पक्ष था कि हथियार को लेकर की गई कार्रवाई को गलत तरीके से पेश किया गया। इस मामले में दोनों पक्षों के आरोपों और दावों की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण है।

तबादले के बाद वकीलों की हड़ताल खत्म

विवाद के बाद दिल्ली की जिला अदालतों के वकीलों ने अनिश्चितकालीन न्यायिक कार्य से विरत रहने का ऐलान किया था। वकील संबंधित पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और मामले की निष्पक्ष जांच की मांग कर रहे थे।

28 अक्टूबर को ACP मनस्वी वशिष्ठ को गांधी नगर सब-डिवीजन से स्पेशल पुलिस यूनिट फॉर वुमेन एंड चिल्ड्रेन (SPUWAC) में स्थानांतरित किया गया। वहीं, शाहदरा थाने के तत्कालीन SHO इंस्पेक्टर अरुण कुमार को सिक्योरिटी यूनिट भेज दिया गया। इन तबादलों के बाद जिला अदालतों की वकील समन्वय समिति ने हड़ताल वापस लेने का फैसला किया था।

पुलिसकर्मियों की मांगों ने बढ़ाई थी हलचल

तबादले के बाद पुलिस विभाग के एक वर्ग में असंतोष सामने आया। पुलिसकर्मियों ने मांग उठाई कि अधिकारियों के खिलाफ दर्ज शिकायतों की निष्पक्ष जांच हो, पुलिसकर्मियों की सुरक्षा के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश बनाए जाएं और अदालत परिसरों में ड्यूटी के दौरान आने वाली समस्याओं का समाधान किया जाए।

प्रदर्शन के दौरान पुलिसकर्मियों ने शिकायत निवारण व्यवस्था और SOP बनाने की मांग भी रखी। इस घटनाक्रम ने पुलिस और वकीलों के बीच समन्वय, थानों में शिकायतों के निस्तारण तथा अदालत परिसरों में सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है।

अब आगे क्या?

ACP मनस्वी वशिष्ठ के निलंबन के बाद इस पूरे मामले में विभागीय जांच और दोनों पक्षों की शिकायतों पर कार्रवाई को लेकर निगाहें टिकी हैं। एक ओर वकीलों ने पुलिस अधिकारियों के व्यवहार पर सवाल उठाए थे, तो दूसरी ओर पुलिसकर्मियों ने अपने सहयोगियों के तबादलों और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आपत्ति जताई थी।

अब अहम सवाल यह है कि शाहदरा थाने की घटना, दोनों पक्षों की शिकायतों और पुलिस मुख्यालय के बाहर हुए प्रदर्शन की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है। आधिकारिक आदेश और जांच के निष्कर्ष सामने आने के बाद ही इस विवाद की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो पाएगी।

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