यूपी पंचायत चुनाव 2027 के बाद!
योगी सरकार का बड़ा फैसला, 57 हजार ग्राम पंचायतों में जल्द लगेंगे ‘प्रशासक’
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर अब लगभग विराम लग गया है। योगी सरकार ने साफ संकेत दे दिए हैं कि पंचायत चुनाव अब 2027 विधानसभा चुनाव के बाद ही कराए जाएंगे। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह ओबीसी आरक्षण को लेकर गठित किया गया विशेष पिछड़ा वर्ग आयोग है, जिसकी रिपोर्ट नवंबर 2026 तक आने की संभावना है।
प्रदेश की 57 हजार 695 ग्राम पंचायतों में मौजूदा प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो रहा है। ऐसे में पंचायतीराज विभाग ने शासन को प्रस्ताव भेजा है कि पंचायतों में अस्थायी रूप से प्रशासक नियुक्त किए जाएं या मौजूदा प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाया जाए। शासन स्तर पर इस प्रस्ताव पर तेजी से मंथन चल रहा है।
OBC आयोग के गठन से बदला चुनावी समीकरण
यूपी सरकार ने पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन कर दिया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस राम अवतार सिंह को आयोग का अध्यक्ष बनाया गया है।
आयोग में दो रिटायर्ड अतिरिक्त जिला जज और दो रिटायर्ड आईएएस अधिकारियों को सदस्य बनाया गया है। आयोग पंचायत स्तर से लेकर जिला पंचायत तक पिछड़े वर्ग की आबादी और राजनीतिक प्रतिनिधित्व का विस्तृत अध्ययन करेगा।
सरकार को आयोग की रिपोर्ट नवंबर 2026 तक मिलने की उम्मीद है। इसके बाद ही पंचायत सीटों पर आरक्षण का अंतिम निर्धारण किया जाएगा।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद उठाया गया कदम
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 4 फरवरी 2025 को यूपी सरकार को पंचायत चुनावों में ओबीसी आरक्षण लागू करने के लिए आयोग गठित करने का निर्देश दिया था। सुप्रीम कोर्ट के “ट्रिपल टेस्ट” नियम के तहत बिना वैज्ञानिक सर्वे और आयोग की रिपोर्ट के स्थानीय निकाय चुनावों में ओबीसी आरक्षण लागू नहीं किया जा सकता।
इसी वजह से पंचायत चुनाव की प्रक्रिया अब लंबी होती नजर आ रही है।
26 मई के बाद क्या होगा?
मौजूदा ग्राम प्रधानों, ब्लॉक प्रमुखों और जिला पंचायत अध्यक्षों का कार्यकाल 26 मई 2026 को समाप्त हो रहा है। ऐसे में सरकार के सामने प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है।
सूत्रों के मुताबिक, ग्राम पंचायतों में प्रशासक नियुक्त किए जा सकते हैं। वहीं कुछ स्तरों पर मौजूदा प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाने पर भी चर्चा चल रही है।
अगर प्रशासक नियुक्त होते हैं, तो पंचायतों का संचालन प्रशासनिक अधिकारियों और पंचायत सचिवों के जरिए किया जाएगा।
कौन हैं जस्टिस राम अवतार सिंह?
रिटायर्ड जस्टिस राम अवतार सिंह का जन्म 15 जनवरी 1949 को बिजनौर में हुआ था।
1976 में वे उत्तर प्रदेश न्यायिक सेवा में शामिल हुए।
1991 में उच्च न्यायिक सेवा में पदोन्नति हुई।
2005 में जिला जज बने और 2009 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किए गए।
जनवरी 2011 में रिटायर हुए।
वे 2022 में भी उत्तर प्रदेश ओबीसी आयोग के अध्यक्ष रह चुके हैं।
पंचायत चुनाव टलने के राजनीतिक मायने
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंचायत चुनाव टलने का असर सीधे 2027 विधानसभा चुनाव पर पड़ेगा। पंचायतें ग्रामीण राजनीति की सबसे मजबूत इकाई मानी जाती हैं। ऐसे में ओबीसी आरक्षण और पंचायत चुनाव दोनों आने वाले समय में यूपी की राजनीति का बड़ा मुद्दा बनने जा रहे हैं।










