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काशी के यशस्वी साहित्यकार प्रो. उमापति दीक्षित का राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान

वाराणसी। काशी की समृद्ध साहित्यिक एवं पत्रकारितामूलक परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित करने वाले वरिष्ठ साहित्यकार, पत्रकारिता-चिंतक एवं केंद्रीय हिंदी संस्थान, शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार, आगरा में सेवारत प्रो. उमापति दीक्षित को पत्रकारिता एवं संपादन के क्षेत्र में उनके विशिष्ट एवं बहुआयामी योगदान के लिए आगरा स्थित ताज प्रेस क्लब द्वारा आयोजित भव्य समारोह में सम्मानित किया गया।

देश के विभिन्न प्रांतों से पधारे लगभग दो सौ पत्रकारों, साहित्यकारों एवं मीडिया-जगत् के प्रतिनिधियों की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित इस समारोह में आगरा के लोकप्रिय सांसद तथा केंद्रीय राज्य मंत्री प्रो. एस .पी. सिंह बघेल ने प्रो. दीक्षित को अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया। इस अवसर पर ताज प्रेस क्लब के अध्यक्ष श्री मनोज मिश्रा तथा सचिव श्री आलोक द्विवेदी सहित अनेक वरिष्ठ पत्रकार उपस्थित रहे।

उल्लेखनीय है कि काशी की सांस्कृतिक चेतना, हिंदी भाषा-साहित्य, पत्रकारिता एवं लोकपरंपराओं पर प्रो. उमापति दीक्षित का दीर्घकालिक अध्ययन एवं लेखन विशेष रूप से चर्चित रहा है। हिंदी पत्रकारिता, संपादन-कला, सांस्कृतिक विमर्श तथा भारतीय ज्ञान-परंपरा के विविध आयामों पर उनके लेख, शोध एवं समीक्षात्मक कृतियाँ विद्वत् समाज में सम्मानपूर्वक उद्धृत की जाती हैं। उनकी लेखनी में काशी की सांस्कृतिक आत्मा, भारतीय चिंतन की गाम्भीर्यपूर्ण परंपरा तथा राष्ट्रीय चेतना का अद्वितीय समन्वय परिलक्षित होता है।

वक्ताओं ने अपने उद्बोधन में कहा कि प्रो. दीक्षित का साहित्यिक एवं पत्रकारितामूलक अवदान केवल अकादमिक उपलब्धि नहीं, बल्कि हिंदी भाषा और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों के संरक्षण एवं संवर्धन का सतत् यज्ञ है। उनकी संपादकीय दृष्टि तथ्यनिष्ठा, भाषिक शुचिता तथा वैचारिक संतुलन का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करती है। वस्तुतः उनका समग्र कृतित्व उस शास्त्रीय आदर्श का मूर्त रूप है जिसमें ज्ञान, साधना और लोकमंगल का त्रिवेणी-संगम दृष्टिगोचर होता है।

काशी के साहित्यिक एवं बौद्धिक जगत् ने इस सम्मान को नगर की सांस्कृतिक प्रतिष्ठा से भी जोड़कर देखा है। विद्वज्जनों का मत है कि यह सम्मान न केवल प्रो. उमापति दीक्षित की दीर्घकालीन पत्रकारिता-साधना एवं संपादकीय दक्षता का अभिनंदन है, अपितु काशी की उस ज्ञान-परंपरा का भी सम्मान है जिसने सदैव राष्ट्र के वैचारिक एवं सांस्कृतिक नेतृत्व का दायित्व निभाया है।

यह सम्मान हिंदी पत्रकारिता, साहित्य एवं सांस्कृतिक विमर्श के क्षेत्र में प्रो. दीक्षित के अविस्मरणीय योगदान की राष्ट्रीय स्तर पर हुई सार्थक प्रतिष्ठा के रूप में दीर्घकाल तक स्मरण किया जाएगा।

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