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Bharat Tiwari Encounter:सरेंडर के बाद गोली मारने पर उठे सवाल, वायरल वीडियो और थानेदार के निलंबन ने खोली बिहार पुलिस की पोल!

आरा/पटना: बिहार के भोजपुर (आरा) जिले में हुआ भरत तिवारी एनकाउंटर (Bharat Tiwari Encounter Case) इस वक्त पूरे सूबे में सियासी और प्रशासनिक गलियारों में भूचाल लाए हुए है। सोशल मीडिया पर एक के बाद एक वायरल हो रहे वीडियो और परिजनों के गंभीर आरोपों ने बिहार पुलिस की ‘क्राइम कंट्रोल’ थ्योरी को कटघरे में खड़ा कर दिया है। जहाँ एक तरफ पुलिस इसे आत्मरक्षा में की गई जवाबी कार्रवाई बता रही है, वहीं दूसरी तरफ वायरल वीडियो स्क्रिप्टेड और फर्जी एनकाउंटर की तरफ इशारा कर रहे हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय थानेदार को सस्पेंड भी किया जा चुका है, जिसने आग में घी का काम किया है।

क्या है वायरल वीडियो में? जिसने मचाया तहलका

इस पूरे एनकाउंटर केस में सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट वह वीडियो है जो सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहा है।

  • वीडियो का सच: वायरल वीडियो में कुख्यात भरत तिवारी पुलिस टीम के सामने बेखौफ खड़ा नजर आता है। वह पुलिस को खुलेआम चुनौती देते हुए कहता दिख रहा है कि “अगर हिम्मत है तो गोली मारो।”

  • संदेह के घेरे में पुलिस: वीडियो में जिस तरह की बातचीत और परिस्थितियां दिख रही हैं, उसे देखकर एक्सपर्ट्स और आम जनता का मानना है कि पुलिस के पास अपराधी को जिंदा पकड़ने का पूरा मौका था। इसके बावजूद एनकाउंटर में उसकी मौत हो जाना पुलिसिया कार्यशैली पर गंभीर दाग लगाता है।

परिजनों का गंभीर आरोप: “सरेंडर के बाद पीठ में मारी गोली”

भरत तिवारी की मौत के बाद अस्पताल से लेकर आरा की सड़कों तक परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा है। परिजनों का साफ तौर पर कहना है कि यह कोई मुठभेड़ नहीं बल्कि एक सोची-समझी ‘कस्टोडियल किलिंग’ (हिरासत में हत्या) है।

“भरत ने पुलिस के सामने पूरी तरह सरेंडर कर दिया था। उसने अपने हथियार डाल दिए थे और वह जांच में सहयोग करने को तैयार था। लेकिन पुलिस ने अपनी पीठ थपथपाने और मामले को रफा-दफा करने के लिए उसे बेहद करीब से गोली मार दी।” — भरत तिवारी के परिजन

थानेदार का निलंबन: पुलिस बैकफुट पर क्यों?

एनकाउंटर के तुरंत बाद उठते सवालों के बीच भोजपुर एसपी की कार्रवाई ने इस बात को हवा दे दी है कि दाल में कुछ काला जरूर है। मामले की प्राथमिक जांच और सोशल मीडिया पर फूटे जन आक्रोश के बाद संबंधित थानेदार को तत्काल प्रभाव से निलंबित (Suspend) कर दिया गया है। प्रशासन का कहना है कि यह निलंबन प्रक्रियात्मक चूक और कानून के तय नियमों (Standard Operating Procedure) का पालन न करने के कारण किया गया है। लेकिन पब्लिक डोमेन में इसे पुलिस द्वारा अपनी गलती मानने के रूप में देखा जा रहा है।

भरत तिवारी एनकाउंटर केस ने खड़े किए ये 4 बड़े सवाल:

  1. जिंदा पकड़ने की कोशिश क्यों नहीं हुई? जब भरत तिवारी वीडियो में बिना किसी कवर के पुलिस के सामने खड़ा था, तो उसे पैर में गोली मारकर या काबू करके जिंदा क्यों नहीं पकड़ा गया?

  2. वीडियो किसने और क्यों बनाया? एनकाउंटर जैसी संवेदनशील कार्रवाई के दौरान वीडियो कौन शूट कर रहा था और यह सोशल मीडिया पर कैसे लीक हुआ? क्या यह खौफ पैदा करने के लिए जानबूझकर किया गया?

  3. सरेंडर थ्योरी का सच क्या है? क्या वाकई भरत तिवारी सरेंडर कर चुका था? पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की टीम इस पर क्या कहती है?

  4. हथियारों की बरामदगी पर संशय: पुलिस का दावा है कि दोनों तरफ से फायरिंग हुई, तो फिर मौके से पुलिस को क्या सबूत मिले और पुलिस टीम का कोई जवान चोटिल क्यों नहीं हुआ?

निष्कर्ष और आगे क्या?

बिहार में अपराधियों के बढ़ते मनोबल के बीच एनकाउंटर की खबरें अक्सर आती हैं, लेकिन जब एनकाउंटर के कानूनी पहलुओं पर सवाल उठते हैं, तो मानवाधिकार आयोग (NHRC) और अदालतें सख्त रुख अपनाती हैं। भरत तिवारी एनकाउंटर केस अब महज एक अपराधी के खात्मे की कहानी नहीं रह गया है, बल्कि यह बिहार पुलिस के ‘कानून के राज’ वाले इकबाल की परीक्षा बन चुका है। 

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