Home / Uncategorized / जब कानून के रखवाले ही कानून का पालन न करें, तो जनता का विश्वास कैसे बने?

जब कानून के रखवाले ही कानून का पालन न करें, तो जनता का विश्वास कैसे बने?

दीपू तिवारी
पूर्वांचल राज्य संवाददाता, सोनभद्र

लोकतंत्र की सफलता केवल संविधान और कानूनों के अस्तित्व से सुनिश्चित नहीं होती, बल्कि इस बात से तय होती है कि उन कानूनों का पालन कितनी निष्पक्षता और ईमानदारी से कराया जाता है। किसी भी राष्ट्र में कानून व्यवस्था को बनाए रखने की जिम्मेदारी पुलिस, प्रशासन और न्यायिक संस्थाओं पर होती है। जब यही संस्थाएं जनता के विश्वास का आधार बनती हैं, तब समाज में शांति, सुरक्षा और न्याय का वातावरण स्थापित होता है।

लेकिन जब समय-समय पर कानून के दुरुपयोग, भ्रष्टाचार, पक्षपात अथवा शक्ति के अनुचित प्रयोग से जुड़े आरोप सामने आते हैं, तो आम नागरिकों के मन में कई प्रश्न खड़े होने लगते हैं। जनता यह सोचने को विवश हो जाती है कि यदि कानून का पालन करवाने वाले ही कानून की मर्यादाओं का सम्मान नहीं करेंगे, तो आम नागरिकों से इसकी अपेक्षा कैसे की जा सकती है।

समाज के गरीब, वंचित और कमजोर वर्ग सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। उनके पास न तो पर्याप्त संसाधन होते हैं और न ही प्रभावशाली पहुंच, जिसके कारण वे न्याय प्राप्त करने के लिए पूरी तरह सरकारी तंत्र पर निर्भर रहते हैं। ऐसे में यदि उन्हें निष्पक्षता का अनुभव नहीं होता, तो व्यवस्था के प्रति उनका विश्वास कमजोर पड़ना स्वाभाविक है।

पुलिस और प्रशासन का दायित्व केवल अपराध नियंत्रण तक सीमित नहीं है। उनका सबसे महत्वपूर्ण कार्य नागरिकों को सुरक्षा का भरोसा देना, उनके अधिकारों की रक्षा करना और कानून के प्रति सम्मान की भावना विकसित करना है। वर्दी किसी व्यक्ति को विशेषाधिकार नहीं देती, बल्कि उसके कर्तव्यों और जिम्मेदारियों को और अधिक बढ़ा देती है। इसलिए किसी भी शिकायत, आरोप या विवाद की स्थिति में निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई आवश्यक हो जाती है।

राजनीतिक व्यवस्था भी लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है। जनप्रतिनिधियों का दायित्व जनता की समस्याओं को समझना और उनके समाधान के लिए कार्य करना है। लेकिन जब जनता को यह महसूस होने लगे कि रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, सड़क, बिजली और सुरक्षा जैसे बुनियादी मुद्दों पर अपेक्षित ध्यान नहीं दिया जा रहा है, तो असंतोष और निराशा का वातावरण बनने लगता है।

आज आवश्यकता इस बात की है कि शासन और प्रशासन दोनों जनता के प्रति अपनी जवाबदेही को प्राथमिकता दें। कानून का शासन तभी प्रभावी माना जाएगा जब उसका पालन बिना किसी भेदभाव के सभी पर समान रूप से लागू हो। चाहे वह सामान्य नागरिक हो, प्रभावशाली व्यक्ति हो या फिर कोई सरकारी अधिकारी—सभी के लिए कानून एक समान होना चाहिए।

लोकतंत्र की सबसे बड़ी शक्ति जनता का विश्वास है। यह विश्वास वर्षों में बनता है, लेकिन कुछ गलत घटनाएं इसे कमजोर कर सकती हैं। इसलिए आवश्यक है कि संस्थाएं पारदर्शी, जवाबदेह और संवेदनशील बनें तथा ईमानदारी से कार्य करने वालों को संरक्षण और सम्मान मिले।

जब कानून निष्पक्ष होगा, व्यवस्था पारदर्शी होगी और जवाबदेही सुनिश्चित होगी, तभी जनता का विश्वास मजबूत होगा और लोकतंत्र अपनी वास्तविक भावना के अनुरूप कार्य कर सकेगा।

जनता का विश्वास ही लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत है, और इस विश्वास की रक्षा करना व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है।

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *