चंदौली जिले के धानापुर कस्बे में पंडित भरतभूषण तिवारी की स्मृति में एक कैंडल मार्च निकाला गया। यह मार्च संघत मंदिर से शुरू होकर पूरे कस्बे का भ्रमण करते हुए शहीद पार्क पर समाप्त हुआ, जहाँ उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की गई।
इस श्रद्धांजलि सभा में क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों, युवाओं और समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने बड़ी संख्या में भाग लिया। उपस्थित लोगों ने भरतभूषण तिवारी को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उनके संघर्ष और योगदान को याद किया।
प्रहलादपुर के प्रधान आशुतोष सिंह मिंटू ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि पंडित भरतभूषण तिवारी केवल एक व्यक्ति नहीं थे, बल्कि अन्याय, अत्याचार और भ्रष्टाचार के विरुद्ध संघर्ष का प्रतीक थे। उन्होंने कहा कि उनका योगदान समाज को अन्याय के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा देता रहेगा।
मिंटू ने देश के विभिन्न हिस्सों में कथित एनकाउंटर की बढ़ती घटनाओं पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि यह न्याय व्यवस्था और संवैधानिक मूल्यों के लिए गंभीर विषय है। यदि किसी व्यक्ति के अपराध या निर्दोष होने का निर्णय न्यायालय के बजाय गोलियों से होने लगे, तो यह न्यायपालिका के अस्तित्व और संविधान द्वारा प्रदत्त विधि के शासन पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
उन्होंने जोर दिया कि भविष्य में किसी भी नागरिक के मौलिक अधिकारों का हनन न हो। मिंटू ने कहा कि लोकतंत्र में असहमति और जनहित की आवाज को दबाने का कोई भी प्रयास अंततः जनता के प्रतिरोध को मजबूत करता है। उन्होंने लोकतंत्र की रक्षा, संविधान की मर्यादा और न्याय की स्थापना के लिए समाज से एकजुट होकर संघर्ष करने का आह्वान किया।
सभा में उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर भरतभूषण तिवारी को श्रद्धांजलि दी और न्याय की लड़ाई में उनके परिवार तथा समाज के साथ खड़े रहने का संकल्प लिया। इस अवसर पर सुनील पाण्डेय, सतीश सेठ आका, दिनेश मिश्रा, विजय पाण्डेय सहित बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी और युवा मौजूद रहे।









