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मानसून की पहली बारिश में खुली सिस्टम की पोल: श्यामदेउरवा चौराहा बना ‘गंदे पानी का तालाब’, टूटा स्लैब हादसों को दे रहा दावत

पूर्वांचल राज्य ब्यूरो
महराजगंज ( घुघली) पल्टू मिश्रा
महराजगंज। मानसून की शुरुआत के साथ ही श्यामदेउरवा चौराहे की जलनिकासी व्यवस्था पूरी तरह सवालों के घेरे में आ गई है। जाम नालियों के कारण गंदा पानी मुख्य सड़क पर फैल रहा है, जिससे राहगीरों, दुकानदारों और स्थानीय लोगों को रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते नालियों की सफाई और जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं की गई, तो लगातार बारिश में हालात और भी भयावह हो सकते हैं।
ग्रामीणों के अनुसार चौराहे पर मार्कण्डेय के घर के सामने नाली पर रखा स्लैब करीब एक वर्ष से टूटा पड़ा है। इसके कारण पैदल चलने वाले, महिलाएं, बुजुर्ग और स्कूली बच्चों को आवागमन में जोखिम उठाना पड़ता है। कई बाइक सवार इस स्थान पर असंतुलित होकर गिर चुके हैं, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने अब तक इसकी मरम्मत कराना जरूरी नहीं समझा।
श्यामदेउरवा चौराहा क्षेत्र के रामपुर, रामपुर चकिया, बरईठवा, खपरदिकवा, लक्ष्मीपुर, बेलवा, नन्दना, सोहवल और मंसूरगंज सहित दर्जनों गांवों का प्रमुख संपर्क मार्ग है। प्रतिदिन हजारों लोग इसी रास्ते से आवागमन करते हैं। सड़क पर फैला गंदा पानी न केवल लोगों की आवाजाही में बाधा बन रहा है, बल्कि बदबू और गंदगी के कारण संक्रामक बीमारियों के फैलने का खतरा भी बढ़ गया है।
ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार ग्राम प्रधान और संबंधित अधिकारियों से नाली की नियमित सफाई, टूटे स्लैब की मरम्मत और स्थायी जलनिकासी व्यवस्था की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। सफाईकर्मी समय-समय पर नालियों की सफाई तो करते हैं, लेकिन निकाला गया कचरा नाली के किनारे ही छोड़ दिया जाता है। यही कचरा कुछ दिनों बाद दोबारा नाली में पहुंचकर उसे जाम कर देता है, जिससे समस्या जस की तस बनी रहती है। इसके अलावा रुके हुए पानी के कारण मच्छरों का प्रकोप भी तेजी से बढ़ रहा है।
स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि श्यामदेउरवा चौराहे की जलनिकासी व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त कराया जाए, टूटे हुए स्लैब को बदला जाए और नालियों की वैज्ञानिक ढंग से सफाई कराई जाए, ताकि बरसात के मौसम में लोगों को राहत मिल सके। लोगों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो वे जनहित में आंदोलन करने के लिए भी मजबूर होंगे।

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