सोनभद्र/लखनऊ | पूर्वांचल राज्य संवाददाता: दीपू तिवारी
सोशल मीडिया पर वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ लगातार आरोप लगाना एक आरक्षी को भारी पड़ गया। विभागीय जांच में गंभीर आरोप सिद्ध होने के बाद पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ ने आरक्षी सुनील कुमार शुक्ला को पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया है। इस संबंध में कमिश्नरेट की ओर से आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कार्रवाई की जानकारी दी गई।
प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, आरक्षी सुनील कुमार शुक्ला ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कई गंभीर आरोप लगाए थे। इन आरोपों के बाद पुलिस विभाग ने पूरे मामले की विभागीय जांच कराई। जांच समिति ने संबंधित आरक्षी को अपना पक्ष रखने तथा अपने आरोपों के समर्थन में साक्ष्य प्रस्तुत करने का पूरा अवसर दिया, लेकिन वह कोई ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं करा सके।
जांच में यह भी पाया गया कि आरक्षी ने सोशल मीडिया का अनधिकृत उपयोग करते हुए विभाग की छवि धूमिल करने का प्रयास किया। साथ ही वरिष्ठ अधिकारियों के प्रति अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया, जिससे पुलिस विभाग की गरिमा और अनुशासन प्रभावित हुआ। जांच समिति ने इसे गंभीर अनुशासनहीनता माना।
विभागीय जांच में उत्तर प्रदेश सोशल मीडिया नीति-2023 तथा सरकारी सेवा आचरण नियमों के उल्लंघन की पुष्टि भी हुई। रिपोर्ट के अनुसार, बिना साक्ष्य सार्वजनिक मंचों पर अधिकारियों के विरुद्ध आरोप लगाना, विभागीय अनुशासन को प्रभावित करना तथा सोशल मीडिया के माध्यम से पुलिस विभाग की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना गंभीर दुराचार की श्रेणी में पाया गया।
जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस कमिश्नरेट लखनऊ ने कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए आरक्षी सुनील कुमार शुक्ला को तत्काल प्रभाव से पुलिस सेवा से बर्खास्त कर दिया।
पुलिस कमिश्नरेट का कहना है कि पुलिस बल एक अनुशासित संगठन है, जहां प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी से सेवा नियमों, आचरण संहिता तथा सोशल मीडिया संबंधी दिशा-निर्देशों का पालन अपेक्षित है। नियमों के उल्लंघन और अनुशासनहीनता के मामलों में विभाग की ओर से आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
इस कार्रवाई को पुलिस विभाग में अनुशासन और जवाबदेही बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, यह निर्णय विभागीय जांच के निष्कर्षों के आधार पर लिया गया है।










