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केतन अग्रवाल हत्याकांड: 10 करोड़ के मानहानि नोटिस से बढ़ा विवाद, वैज्ञानिक जांच के सहारे पुलिस तलाश रही सच

पुणे। चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच अब दो समानांतर मोर्चों पर आगे बढ़ रही है। एक ओर पुलिस वैज्ञानिक तकनीकों के जरिए मजबूत साक्ष्य जुटाने में लगी है, वहीं दूसरी ओर अदालत के बाहर शुरू हुई कानूनी जंग ने इस हाई-प्रोफाइल मामले को नया मोड़ दे दिया है। हाल ही में भेजे गए 10 करोड़ रुपये के मानहानि नोटिस ने पूरे प्रकरण को और अधिक चर्चा में ला दिया है।


10 करोड़ के मानहानि नोटिस से बढ़ी हलचल

मामले में नया घटनाक्रम तब सामने आया जब एडवोकेट आशुतोष श्रीवास्तव ने आरोपी सिया गोयल के भाई साहिल गोयल को 10 करोड़ रुपये का मानहानि नोटिस भेजा।

बताया गया कि अदालत में सिया गोयल ने बयान दिया था कि उनके वकील आशुतोष श्रीवास्तव नहीं बल्कि विपुल दुशिंग हैं। इसी बयान के बाद वकील पक्ष ने दावा किया कि उनकी पेशेवर प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है।

नोटिस में साहिल गोयल से मांग की गई है कि वे कथित आरोप वापस लें, सार्वजनिक रूप से माफी मांगें और भविष्य में ऐसे बयान न देने का लिखित आश्वासन दें। इस घटनाक्रम के बाद कानूनी हलकों में नई बहस शुरू हो गई है।


वैज्ञानिक जांच पर पुलिस का पूरा फोकस

इधर पुणे पुलिस जांच को वैज्ञानिक आधार पर मजबूत करने में जुटी हुई है। पुलिस ने अदालत को बताया है कि मुख्य आरोपी चेतन चौधरी की पहचान स्थापित करने के लिए उसका ‘गेट एनालिसिस’ (Gait Analysis) कराया जाएगा।

इस तकनीक में किसी व्यक्ति की चाल, कदमों की लंबाई, शरीर की गतिविधि और चलने के तरीके का विश्लेषण कर उसकी तुलना सीसीटीवी फुटेज में दिखाई देने वाले व्यक्ति से की जाती है।

पुलिस का मानना है कि यह जांच आरोपी की मौजूदगी साबित करने में अहम भूमिका निभा सकती है।


हुडी और मास्क ने बढ़ाई जांच की चुनौती

पुलिस के अनुसार 18 जून को लोहागढ़ किले पर हुई घटना के दौरान एक संदिग्ध व्यक्ति हुडी और मास्क पहनकर पहाड़ी की ओर जाता दिखाई दिया था।

सीसीटीवी फुटेज में उसका चेहरा स्पष्ट नहीं दिख रहा है, जिसके कारण पहचान करना मुश्किल हो रहा है। इसी वजह से वैज्ञानिक विश्लेषण का सहारा लिया जा रहा है।


मौजूदगी स्वीकार, लेकिन पुलिस को चाहिए पुख्ता सबूत

जांच में यह सामने आया है कि सिया गोयल और चेतन चौधरी ने घटना वाले दिन लोहागढ़ किले पर अपनी मौजूदगी स्वीकार की है।

हालांकि पुलिस का कहना है कि केवल मौजूदगी स्वीकार करना अपराध सिद्ध करने के लिए पर्याप्त नहीं है। इसलिए फॉरेंसिक और तकनीकी साक्ष्यों के जरिए पूरे घटनाक्रम को प्रमाणित करने का प्रयास किया जा रहा है।


री-क्रिएशन और पासपोर्ट की तलाश जारी

पुलिस जांच के तहत कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर काम कर रही है, जिनमें शामिल हैं—

  • घटनास्थल का री-क्रिएशन
  • वारदात की सटीक लोकेशन की पुष्टि
  • केतन अग्रवाल के लापता पासपोर्ट की तलाश
  • डिजिटल और फॉरेंसिक साक्ष्यों का विश्लेषण

जांच एजेंसियों का उद्देश्य सभी उपलब्ध साक्ष्यों को जोड़कर अदालत में मजबूत केस प्रस्तुत करना है।


निष्कर्ष

केतन अग्रवाल हत्याकांड अब केवल एक आपराधिक जांच तक सीमित नहीं रह गया है। एक ओर वैज्ञानिक तकनीकों के माध्यम से पुलिस सच्चाई तक पहुंचने का प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर 10 करोड़ रुपये के मानहानि नोटिस ने मामले को नया कानूनी आयाम दे दिया है। आने वाले दिनों में पुलिस की फॉरेंसिक रिपोर्ट और अदालत में होने वाली सुनवाई इस बहुचर्चित मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी। 

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