अयोध्या | डिजिटल डेस्क
1 जुलाई 2026 — अयोध्या राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में आज विशेष जांच टीम (SIT) और स्थानीय पुलिस को अब तक की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली कामयाबी मिली है। मंदिर के चढ़ावे की पाई-पाई खंगाल रही पुलिस ने जब मुख्य आरोपियों के ठिकानों पर एक साथ ‘महा-छापेमारी’ की, तो बरामद हुए सामान को देखकर खुद अधिकारियों के होश उड़ गए।
जांच टीमों ने आरोपी अविनाश के घर से 20 लाख रुपये नगद (Cash) और 1,000 अमेरिकी डॉलर ($1,000 USD) बरामद किए हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि यह सारा पैसा एक विशेष संदूक में छिपाकर रखा गया था, जिस पर ‘रामराज्य कोष’ लिखा हुआ था और बकायदा एक QR कोड भी चिपका हुआ था!
लवकुश और अनुकल्प के घरों पर भी ताबड़तोड़ छापेमारी, परिजनों से पूछताछ
बुधवार सुबह से ही एसआईटी (SIT) और पुलिस की कई टीमों ने इस हाई-प्रोफाइल घोटाले के अन्य मुख्य आरोपियों लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा के घरों पर भी एक साथ दबिश दी।
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दस्तावेजों की जब्ती: पुलिस ने दोनों आरोपियों के घरों के कोने-कोने को खंगाला और कई संदिग्ध बैंक पासबुक, रसीदें और जमीनों के दस्तावेज जब्त किए हैं।
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परिजनों पर शिकंजा: घर में मौजूद माता-पिता और अन्य रिश्तेदारों से बंद कमरे में घंटों पूछताछ की गई, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस चोरी की रकम से कहीं कोई बेनामी संपत्ति तो नहीं खरीदी गई थी।
‘रामराज्य कोष’ और QR कोड का क्या है रहस्य?
आरोपी अविनाश के घर से मिले संदूक और उस पर लगे QR कोड ने जांच की दिशा को पूरी तरह बदल दिया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इसके पीछे एक समानांतर (Parallel) ठगी का रैकेट चल रहा था:
“आरोपियों ने मंदिर के आधिकारिक खजाने के अलावा अपना एक खुद का ‘सीक्रेट संदूक’ बना रखा था, जिसे उन्होंने ‘रामराज्य कोष’ का नाम दिया। इस पर लगे QR कोड के जरिए श्रद्धालुओं से सीधे अपने निजी खातों में डिजिटल दान लिया जाता था। बरामद हुए $1,000 डॉलर इस बात का सबूत हैं कि विदेशी भक्तों को भी इस फर्जीवाड़े का शिकार बनाया गया।”
आज की छापेमारी और बरामदगी का पूरा स्टेटस
| मुख्य बिंदु | ताजा इनसाइड अपडेट (1 जुलाई 2026) |
| कैश बरामदगी | आरोपी अविनाश के ठिकाने से ₹20,00,000 नगद। |
| विदेशी मुद्रा | $1,000 अमेरिकी डॉलर (फॉरेन करेंसी) भी जब्त। |
| मुख्य सबूत | ‘रामराज्य कोष’ लिखा संदूक और संदिग्ध QR कोड बरामद। |
| ताजा एक्शन | लवकुश मिश्रा और अनुकल्प मिश्रा के घरों पर SIT का महा-सर्च ऑपरेशन। |
| जांच का अगला कदम | बरामद QR कोड की डिजिटल फॉरेंसिक जांच और बैंक खातों को फ्रीज करना। |
इंटरनेशनल मनी ट्रेल की आशंका, रडार पर कई सफेदपोश
डॉलर की बरामदगी और ‘रामराज्य कोष’ के डिजिटल नेटवर्क के सामने आने के बाद अब यह साफ हो गया है कि यह कोई साधारण क्लर्क की चोरी नहीं है। जैसा कि उत्तर प्रदेश के पूर्व डीजीपी ने अंदेशा जताया था, यह एक संगठित आर्थिक अपराध है। संघ प्रमुख मोहन भागवत को सौंपी गई सीक्रेट रिपोर्ट के बाद अब योगी सरकार इस मामले में जीरो-टॉलरेंस की नीति अपना रही है, और जल्द ही इस रैकेट से जुड़े कुछ बड़े रसूखदारों की गिरफ्तारियां भी हो सकती हैं।










