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‘सच को जिंदा रखने के लिए…’, मल्लिकार्जुन खड़गे की कविता पर राज्यसभा में हंगामा

 संसद के मानसून सत्र का चौथा दिन भी भारी हंगामे की भेंट चढ़ गया। विपक्ष के विरोध और लगातार नारेबाजी के चलते लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी। आखिरकार दोनों सदनों की कार्यवाही पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई। इस दौरान राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे की कविता और उस पर संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू की आपत्ति चर्चा का केंद्र रही।

शाम करीब तीन बजे जब राज्यसभा की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई तो उपसभापति हरिवंश ने नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे को बोलने की अनुमति दी। खड़गे ने हाथ में एक पन्ना लेकर कविता पढ़नी शुरू की।

उन्होंने कहा,

“सच को जिंदा रखने के लिए मर जाएंगे,
ये दिल, ये जान सब कुर्बान कर जाएंगे,
मगर देश से अन्याय मिटाने के लिए हर चुनौती से टकरा जाएंगे…”

खड़गे आगे अपनी बात रखते, उससे पहले ही उपसभापति ने उन्हें रोकते हुए संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू को बोलने का मौका दिया।

केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि सदन में औपचारिक चर्चा शुरू करने की बात हो रही है, लेकिन विपक्ष बार-बार लिखी हुई बातें पढ़कर विरोध दर्ज करा रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह सदन नहीं चल सकता।

इसके बाद उपसभापति हरिवंश ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाना था। हालांकि, लगातार जारी हंगामे को देखते हुए उन्होंने राज्यसभा की कार्यवाही शुक्रवार सुबह 11 बजे तक के लिए स्थगित कर दी। इस दौरान विपक्षी सांसद शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी करते रहे।

 

लोकसभा में भी दिन की शुरुआत हंगामे के साथ हुई। कार्यवाही शुरू होते ही स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि प्रश्नकाल के दौरान केवल प्रश्नकाल ही चलेगा और सदस्यों से व्यवस्था बनाए रखने की अपील की।

इसके बावजूद विपक्षी सांसद वेल में पहुंच गए और नारेबाजी जारी रखी। शोर-शराबे के बीच स्पीकर ने पहले सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी। 

दोपहर 12 बजे सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई, लेकिन विपक्ष का विरोध जारी रहा। हंगामे के बीच सूचीबद्ध सरकारी कार्य पूरे किए गए और सदन को दोपहर 2 बजे तक स्थगित कर दिया गया।

दोपहर 2 बजे पैनल के अध्यक्ष दिलीप सैकिया ने नियम 377 के तहत चर्चा शुरू कराने की कोशिश की, लेकिन विपक्षी सदस्य लगातार वेल में डटे रहे। बार-बार की अपील का भी कोई असर नहीं हुआ। अंततः लगातार व्यवधान के चलते लोकसभा की कार्यवाही भी पूरे दिन के लिए स्थगित कर दी गई।

 

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