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पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट के इंतजार में अटके पंचायत चुनाव, प्रधानों के कार्यकाल पर फिर छह माह की उम्मीद

सोनभद्र पूर्वांचल राज्य संवाददाता : दीपू तिवारी

लखनऊ। यूपी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव को लेकर स्थिति अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हो सकी है। पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट में संभावित देरी के चलते पंचायत चुनाव की प्रक्रिया आगे खिसकने के आसार हैं। ऐसी स्थिति में नवंबर के बाद ग्राम प्रधानों के कार्यकाल को एक बार फिर छह माह तक बढ़ाए जाने की चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, इस संबंध में अभी सरकार की ओर से कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है।

पंचायत चुनाव में देरी की प्रमुख वजह पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट को माना जा रहा है। आयोग की रिपोर्ट नवंबर-दिसंबर के बीच आने की संभावना है। रिपोर्ट मिलने के बाद ही पंचायत चुनाव की आगे की प्रक्रिया को गति मिलने की उम्मीद है। यदि रिपोर्ट आने में देरी होती है तो चुनाव कार्यक्रम भी प्रभावित हो सकता है।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव अप्रैल 2026 में प्रस्तावित थे, लेकिन निर्धारित समय पर चुनाव नहीं हो सके। इसके बाद राज्य सरकार ने 26 मई को ग्राम प्रधानों के कार्यकाल में छह माह का विस्तार किया था। यह विस्तारित अवधि नवंबर में समाप्त होने वाली है। ऐसे में यदि नवंबर तक चुनाव प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती है तो ग्राम पंचायतों के संचालन को लेकर सरकार के सामने नई चुनौती खड़ी हो सकती है।

सूत्रों के मुताबिक, पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट आने के बाद पंचायत चुनाव की तैयारियों में तेजी आने की संभावना है। दूसरी ओर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भी राजनीतिक और प्रशासनिक तैयारियां शुरू होनी हैं। ऐसे में पंचायत चुनाव और विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच समय-प्रबंधन सरकार के लिए अहम मुद्दा बन सकता है।

ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने की स्थिति में पंचायतों के संचालन के लिए प्रशासक नियुक्त करने की व्यवस्था को लेकर पहले भी विवाद सामने आ चुका है। सरकार ने कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रशासकों की नियुक्ति का विकल्प अपनाया था, लेकिन इलाहाबाद हाई कोर्ट ने इस व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए इसे असंवैधानिक करार दिया था।

इसके बाद पंचायतों के संचालन और चुनाव होने तक व्यवस्था बनाए रखने को लेकर सरकार के सामने संवैधानिक एवं प्रशासनिक चुनौती बनी हुई है। यही वजह है कि पंचायत चुनाव में देरी की स्थिति में सरकार के अगले कदम पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

यदि पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट आने में समय लगता है और पंचायत चुनाव आगे खिसकते हैं, तो मौजूदा ग्राम प्रधानों के कार्यकाल को दोबारा बढ़ाने का विकल्प सरकार के सामने हो सकता है। हालांकि, छह माह के अतिरिक्त विस्तार की चर्चा फिलहाल संभावनाओं और सूत्रों की जानकारी तक सीमित है।

अब निगाहें पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट और राज्य सरकार के अगले फैसले पर टिकी हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि पंचायत चुनाव की प्रक्रिया कब शुरू होगी और क्या मौजूदा ग्राम प्रधानों को एक बार फिर अतिरिक्त कार्यकाल दिया जाएगा। फिलहाल प्रदेश के ग्राम प्रधानों, पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीण जनता के बीच चुनाव की तारीख और कार्यकाल विस्तार को लेकर उत्सुकता बनी हुई है। 

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