राजीव शंकर चतुर्वेदी
पूर्वांचल राज्य ब्यूरो
बलिया। मनियर ब्लॉक के दिघेड़ा ग्राम पंचायत के रानीपुर निवासी सात साल की रागिनी का इलाज सरकार करायेगी। कूद-कूदकर स्कूल जाने का वीडियो मुख्यमंत्री तक पहुंची। इसके बाद सीएम के निर्देश पर जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। गुरुवार को बालिका को डीएम कार्यालय पहुंचाया गया। वहां पर जिला अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ को बुलाकर बच्ची के पैर की जांच-पड़ताल कराया गया। अब उसे इलाज के लिए हायर सेंटर ले जाया जायेगा। रानीपुर निवासी देवेन्द्र राजभर की बेटी सात वर्षीय रागिनी के कूदते हुए स्कूल जाने का वीडियो कुछ दिनों पहले सोशल मिडिया पर वॉयरल हुआ था। इसके बाद बुधवार को रानीपुर पहुंचे डीएम मंगला प्रसाद सिंह ने बच्ची को दो ट्राइसाइकिल, स्कूल बैग और कॉपी किताब उपलब्ध कराया। डीएम ने रागिनी की मेडिकल जांच कराने का निर्देश दिया था। गुरुवार को परिवार के लोग रागिनी को लेकर डीएम कार्यालय लेकर पहुंचे। वहां पर सीएमओ डॉ. अभय नारायन राय की मौजूदगी में सदर अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. करन सिंह चौहान को बुलाया गया। जांच के बाद उन्होंने बताया कि बच्ची को हायर सेंटर ले जाने की सलाह दी। उनका कहना है कि साल 2022 में सड़क दुर्घटना में बच्ची के दोनों पैर टूट गये थे। इलाज के बाद एक पैर ठीक हो गया, जबकि बायें पैर की हड्डी जुड़ नहीं सकी। इसके चलते एक पैर छोटा हो गया और कूदते और झूककर चलने से कमर भी टेढ़ी हो गयी। उनका कहना है कि इसका इलाज बड़े अस्पताल में ही सम्भव है जहां पर बच्चों के हड्डी रोग विशेषज्ञ तैनात होंगे। इसके बाद रागिनी को बीएचयू ले जाने की चर्चा है। डीएम का कहना है कि लड़की के इलाज का पूरा खर्च सरकार वहन करेगी।
फिजिक्स वाले अलख पांडेय ने दी 10 लाख रुपये की मदद
बलिया। रागिनी की कहानी सामने आने के बाद समाज के विभिन्न वर्गों से भी मदद के हाथ बढ़े हैं। फिजिक्स वाला के सह-संस्थापक एवं सीईओ अलख पांडेय ने बच्ची के इलाज के लिए 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता भेजी है। रागिनी की मां बबीता देवी के मुताबिक, अलख पांडेय ने फोन पर उनसे बात की और बताया कि बच्ची के इलाज के लिए उनके खाते में 10 लाख रुपये भेजे गए हैं। इसके अलावा आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह की ओर से भी 26 हजार रुपये की सहायता भेजे जाने की जानकारी सामने आई है। उन्होंने बीडियो काल पर बात भी की। डीएम कार्यालय पहुंची रागिनी ने इलाज की बात सुनकर कहा कि डीएम अंकल ने बताया है कि उसका पैर ठीक हो जाएगा। इसके बाद उसने डीएम को धन्यवाद देते हुए कहा- थैंक्यू अंकल।
फ्रैक्कर के बाद बिगड़ी रागिनी की स्थिति
बलिया। रागिनी की मां बबीता देवी ने बताया कि जब रागिनी करीब छह माह की थी, तब उसकी तबीयत खराब थी। वह उसे गोद में लेकर दवा लेने जा रही थीं। इसी दौरान रास्ते में हादसा हो गया। दुर्घटना में रागिनी के पैर में गंभीर चोट आई थी। इलाज कराया गया, लेकिन पैर पूरी तरह ठीक नहीं हो सका। परिवार ने आर्थिक स्थिति कमजोर होने के बावजूद इलाज कराया, लेकिन अपेक्षित लाभ नहीं मिला। रागिनी के पिता देवेंद्र राजभर हैदराबाद में मजदूरी करते हैं। गांव में रागिनी अपनी मां, दादा-दादी के साथ रहती है। मां के अनुसार, रागिनी एक पैर के सहारे ही अपने रोजमर्रा के काम करती है। आसपास के बच्चे जब स्कूल बैग लेकर उसके घर के सामने से गुजरते थे तो वह उन्हें देखकर रोने लगती थी। वह भी स्कूल जाकर पढ़ना चाहती थी। रागिनी की यही इच्छा अब उसके लिए मदद का रास्ता बन गई है। डीएम की पहल के बाद उसे ट्राइसाइकिल मिली और अब मुख्यमंत्री के निर्देश पर उसके इलाज की प्रक्रिया भी शुरू हो गई है









