देवरिया में अवैध हिरासत पर हाईकोर्ट सख्त, SP और SHO को फटकार; ₹65 हजार मुआवजे का आदेश
प्रयागराज/देवरिया: देवरिया के गौरी बाजार थाने में चार लोगों को कथित तौर पर कई दिनों तक अवैध हिरासत में रखने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। बुधवार, 9 सितंबर 2026 को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने थाने की CCTV व्यवस्था और पुलिस के स्पष्टीकरण पर गंभीर सवाल उठाए। मामले में देवरिया के पुलिस अधीक्षक अभिजीत आर. शंकर और संबंधित SHO को व्यक्तिगत रूप से अदालत में पेश होना पड़ा।
13 से 24 अप्रैल के बीच हिरासत का आरोप
मामला महेंद्र गौर और तीन अन्य लोगों की ओर से दाखिल बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका से जुड़ा है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि चारों को 13 अप्रैल से 24 अप्रैल 2026 के बीच गौरी बाजार थाने में कथित तौर पर अवैध रूप से हिरासत में रखा गया। अदालत ने इस अवधि की CCTV फुटेज मंगाकर हिरासत से जुड़े आरोपों की वास्तविकता जांचने की कोशिश की थी।
CCTV खराब होने की दलील पर कोर्ट नाराज
पुलिस की ओर से बताया गया कि CCTV सिस्टम में खराबी थी और इसी वजह से संबंधित अवधि की रिकॉर्डिंग उपलब्ध नहीं है। सुनवाई के दौरान अदालत ने इस स्पष्टीकरण पर सवाल उठाए। कोर्ट ने पूछा कि अगर कैमरा बाद में काम कर रहा था तो उसकी रिकॉर्डिंग कहां है और CCTV खराब होने की कोई जनरल डायरी (GD) एंट्री क्यों नहीं की गई।
रिपोर्ट के अनुसार, SHO ने अदालत को बताया कि CCTV सिस्टम 12 अप्रैल के आसपास खराब हुआ था, जबकि SP ने कहा कि उन्हें कैमरे के काम नहीं करने की जानकारी नहीं दी गई थी। अदालत ने इसी विरोधाभास और रिकॉर्डिंग के अभाव को गंभीरता से लिया।
‘माफी मुझसे नहीं, उन लोगों से मांगो’
सुनवाई के दौरान देवरिया SP ने अदालत से बिना शर्त माफी मांगी। इस पर जस्टिस अतुल श्रीधरन ने कहा कि माफी अदालत से नहीं, बल्कि उन लोगों से मांगनी चाहिए जिन्हें कथित तौर पर हिरासत में रखा गया था। रिपोर्टों के अनुसार, सुनवाई के दौरान अदालत ने पुलिस अधिकारियों की सफाई पर बेहद तीखी टिप्पणी करते हुए उन्हें ‘Bunch of Liars’ यानी ‘झूठों का झुंड’ तक कहा।
SHO को सस्पेंड क्यों नहीं किया?
कोर्ट ने देवरिया SP से यह भी पूछा कि CCTV संबंधी गंभीर लापरवाही के लिए संबंधित SHO के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई। अदालत ने सवाल किया कि SHO को निलंबित या सेवा से हटाने जैसी कार्रवाई क्यों नहीं हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, कोर्ट ने SHO की भूमिका और उनके द्वारा CCTV खराब होने के संबंध में GD एंट्री नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए।
पीड़ितों को ₹65 हजार मुआवजा
हाईकोर्ट ने कथित गैरकानूनी हिरासत के मामले में चार याचियों को कुल ₹65,000 मुआवजा देने का आदेश दिया। तीन याचियों को ₹20-20 हजार और एक याची को ₹5 हजार दिए जाने हैं। अदालत ने निर्देश दिया कि यह रकम संबंधित SHO के वेतन से वसूल की जाए।
पुलिस जवाबदेही पर कोर्ट का सख्त संदेश
इस सुनवाई में अदालत ने पुलिस हिरासत में नागरिकों के अधिकारों और पुलिस रिकॉर्ड की पारदर्शिता को लेकर सख्त रुख दिखाया। CCTV रिकॉर्डिंग का गायब होना और खराबी की आधिकारिक एंट्री न होना अदालत के लिए खास चिंता का विषय बना। मामले में कोर्ट की टिप्पणियां पुलिस अधिकारियों की जवाबदेही पर स्पष्ट संदेश देती हैं।










