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हर विधानसभा में 27 हजार वोट बढ़ाने का लक्ष्य, बूथ स्तर पर सपा का फोकस; जानिए अखिलेश यादव का पूरा प्लान

उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों की तैयारियां तेज हो गई हैं। समाजवादी पार्टी ने भी चुनावी रणनीति को बूथ स्तर तक मजबूत करने की कवायद शुरू कर दी है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पार्टी कार्यकर्ताओं को हर विधानसभा क्षेत्र में 27 हजार वोट बढ़ाने का लक्ष्य दिया है। इसके लिए घर-घर संपर्क, तकनीक के इस्तेमाल और नए मतदाताओं को पार्टी से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।

अखिलेश यादव ने 20 सितंबर को लखनऊ में प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक के बाद इस रणनीति की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि पार्टी हर विधानसभा क्षेत्र में अपने वोटों की संख्या 27 हजार बढ़ाने के लक्ष्य पर काम करेगी। उन्होंने इसे भाजपा के वोटों में इतनी ही कमी लाने के रूप में भी बताया। पार्टी का जोर ऐसे परिवारों तक पहुंचने पर है, जो उसके मुताबिक अन्याय या अत्याचार से प्रभावित रहे हैं।

सपा की रणनीति में बूथ स्तर की सक्रियता को अहम माना जा रहा है। करीब 3 हजार बूथ वाले विधानसभा क्षेत्र में 27 हजार वोट बढ़ाने का लक्ष्य औसतन लगभग 90 अतिरिक्त वोट प्रति बूथ बैठता है। इसी वजह से बूथ कार्यकर्ताओं की भूमिका बढ़ जाती है। पार्टी इससे पहले भी हर बूथ पर नए मतदाताओं को जोड़ने की रणनीति पर काम कर चुकी है। अगस्त 2026 में सपा ने बूथ लेवल एजेंटों से हर बूथ पर कम से कम पांच नए मतदाताओं को जोड़ने के लिए कहा था।सपा के लिए 2022 का विधानसभा चुनाव भी इस रणनीति का एक आधार है। उस चुनाव में पार्टी ने 111 सीटें जीती थीं, जबकि भाजपा को 255 सीटों पर जीत मिली थी। अब सपा का फोकस सिर्फ अपनी जीती हुई सीटों को बचाने तक सीमित नहीं है, बल्कि उन विधानसभा क्षेत्रों में भी पकड़ मजबूत करने की कोशिश है जहां पिछली बार मुकाबला अपेक्षाकृत करीबी रहा था।

2024 के लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन को उत्तर प्रदेश की कई विधानसभा सीटों पर बढ़त मिली थी। हालांकि लोकसभा और विधानसभा चुनाव के आंकड़ों को सीधे एक-दूसरे का परिणाम मानना उचित नहीं होगा, लेकिन सपा के लिए 2024 का प्रदर्शन संगठन और वोट आधार के आकलन का एक संदर्भ जरूर है।अखिलेश यादव ने चुनावी तैयारी में तकनीक के इस्तेमाल के साथ-साथ घर-घर संपर्क पर भी जोर दिया है। पार्टी कार्यकर्ताओं को लोगों की समस्याएं सुनने, उनकी चिंताओं को समझने और न्याय व सम्मान के मुद्दों पर संवाद करने की बात कही गई है। सपा किसानों से जुड़े मुद्दों को भी अपने अभियान में प्रमुखता देने की तैयारी में है। इनमें डीजल, पेट्रोल, खाद, कीटनाशक और फसलों की कीमत जैसे मुद्दे शामिल हैं।

इसके साथ ही सपा अपनी PDA रणनीति को भी आगे बढ़ा रही है। पार्टी की प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक में PDA की सातवीं ऑडिट रिपोर्ट जारी किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। पार्टी का प्रयास पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों के बीच अपने संगठन और राजनीतिक आधार को मजबूत करने का है।दूसरी ओर भाजपा भी 2027 को ध्यान में रखते हुए बूथ स्तर पर संगठन को मजबूत करने में जुटी है। ऐसे में यूपी की चुनावी राजनीति में बूथ मैनेजमेंट, नए मतदाताओं को जोड़ना और अलग-अलग सामाजिक समूहों तक पहुंच बनाना आने वाले समय में प्रमुख रणनीतिक मुद्दे बने रह सकते हैं।

कुल मिलाकर अखिलेश यादव का 27 हजार वोट वाला फॉर्मूला सपा के संगठन को विधानसभा से लेकर बूथ स्तर तक सक्रिय करने की रणनीति का हिस्सा है। पार्टी का लक्ष्य मौजूदा समर्थकों को बनाए रखने के साथ नए मतदाताओं और नए सामाजिक समूहों तक अपनी पहुंच बढ़ाना है। हालांकि यह रणनीति चुनाव में किस तरह का असर डालेगी, इसका आकलन चुनाव के दौरान मतदाताओं के वास्तविक रुझान और सीटवार मुकाबले के आधार पर ही किया जा सकेगा।

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