बरेली, उत्तर प्रदेश | 4 अक्टूबर 2026
बरेली। उत्तर प्रदेश के बरेली में शव की गलत पहचान का हैरान करने वाला मामला सामने आया है। जिस 72 वर्षीय मंशालाल को मृत समझकर परिवार ने अंतिम संस्कार कर दिया था, वह अगले ही दिन जिंदा घर लौट आए। इसके बाद परिवार और पुलिस के सामने सबसे बड़ा सवाल खड़ा हुआ कि जिस शव का अंतिम संस्कार किया गया, वह आखिर किसका था। पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला कि ट्रेन हादसे में जान गंवाने वाले बुजुर्ग चंद्रिका सिंह थे। उनकी उम्र और हुलिया मंशालाल से मिलते-जुलते थे, जिसके कारण पहचान में गलती हुई।
दोस्त से मिलने निकले थे मंशालाल
जानकारी के मुताबिक, न्यू मॉडर्न रेलवे कॉलोनी निवासी मंशालाल शुक्रवार को पीलीभीत में रहने वाले अपने दोस्त से मिलने की बात कहकर घर से निकले थे। इसी दौरान इज्जतनगर क्षेत्र में शहीद गेट रेलवे क्रॉसिंग के पास ट्रेन की चपेट में आने से एक बुजुर्ग की मौत हो गई।
हादसे की सूचना मिलने पर मंशालाल के बेटे केशव और परिवार के अन्य सदस्य मौके पर पहुंचे। शव के कपड़े और हुलिया अपने पिता से मिलता-जुलता देखकर उन्होंने उसकी पहचान मंशालाल के रूप में कर ली। पुलिस की औपचारिकताओं और पोस्टमार्टम के बाद शुक्रवार शाम परिवार ने शव का अंतिम संस्कार कर दिया।
अगले दिन घर लौटे तो उड़ गए होश
परिवार अंतिम संस्कार के बाद शोक में डूबा था। रिश्तेदार और पड़ोसी सांत्वना देने पहुंच रहे थे। इसी बीच शनिवार को मंशालाल अचानक घर लौट आए। उन्हें सामने देखकर परिवार के लोग हैरान रह गए।
जब स्पष्ट हुआ कि मंशालाल जीवित हैं, तो परिवार पुलिस चौकी पहुंचा और पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। इसके बाद पुलिस ने रेलवे ट्रैक पर मिले शव की वास्तविक पहचान की जांच शुरू की।
चंद्रिका सिंह के परिवार ने भी दर्ज कराई थी जानकारी
जांच के दौरान डिफेंस कॉलोनी निवासी आलोक यादव पुलिस चौकी पहुंचे। उन्होंने बताया कि उनके पिता चंद्रिका सिंह शुक्रवार सुबह टहलने के लिए घर से निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। चंद्रिका सिंह रेलवे से सेवानिवृत्त लोको पायलट थे।
आलोक ने पुलिस को अपने पिता की तस्वीर और उनके कपड़ों व हुलिए की जानकारी दी। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया कि ट्रेन हादसे में जान गंवाने वाले व्यक्ति चंद्रिका सिंह ही थे। दोनों बुजुर्गों की उम्र करीब 72 वर्ष थी और उनके हुलिए में समानता थी। इसी वजह से शव की पहचान करने में गलती हुई।
पुलिस ने क्या बताया
इज्जतनगर थाना प्रभारी सुरेश चंद्र गौतम के मुताबिक, शुरुआती जांच में मृतक की पहचान चंद्रिका सिंह के रूप में हुई है। पुलिस ने दोनों परिवारों को घटनाक्रम की जानकारी दी। मामले में शव की पहचान के दौरान हुई गलती सामने आई है।
इस घटना ने शव की शिनाख्त की प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार पुलिस ने इसे शुरुआती जांच में पहचान संबंधी मानवीय चूक बताया है।
एक गलती से दो परिवारों पर टूटा दुख
एक परिवार ने अपने सदस्य को मृत समझकर अंतिम संस्कार कर दिया, जबकि दूसरे परिवार को बाद में पता चला कि उनके लापता परिजन की मौत हो चुकी है। मंशालाल के जीवित लौटने से उनके परिवार को राहत मिली, लेकिन चंद्रिका सिंह के परिजनों के लिए यह घटना गहरे सदमे की वजह बनी।










