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CEC ज्ञानेश कुमार पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, Form-6 विवाद पर CJI सूर्यकांत की दो टूक, चुनाव आयोग से मांगा जवाब

CEC ज्ञानेश कुमार पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, Form-6 विवाद पर CJI सूर्यकांत की दो टूक, चुनाव आयोग से मांगा जवाब

नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार, 5 अक्टूबर 2026 को महत्वपूर्ण सुनवाई की। याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े करीब 14 फैसले चुनाव आयोग के अन्य दो आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल ज्ञानेश कुमार को पद से निलंबित करने का अंतरिम आदेश देने से इनकार किया, लेकिन केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

Form-6 पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

सुनवाई के दौरान Form-6 में किए गए बदलाव को लेकर भी अहम टिप्पणी हुई। CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने Form-6 के किसी संशोधित संस्करण को मंजूरी नहीं दी है। अदालत ने यह भी कहा कि रिकॉर्ड सामने आने के बाद देखा जाएगा कि फॉर्म में बदलाव किसने किया।

Form-6 नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में शामिल कराने के लिए निर्धारित वैधानिक फॉर्म है। SIR के दौरान इसके ऑनलाइन संस्करण में एक अतिरिक्त घोषणा जोड़े जाने को लेकर विवाद खड़ा हुआ था। इस घोषणा में आवेदक से पुराने मतदाता रिकॉर्ड में स्वयं, माता-पिता या दादा-दादी के नाम से जुड़ी जानकारी मांगी गई थी।

चुनाव आयोग के दावे और कोर्ट की टिप्पणी

विवाद के बीच चुनाव आयोग ने 26 सितंबर को कहा था कि SIR से जुड़ी Form-6 की घोषणा को सुप्रीम कोर्ट के 27 मई के आदेश में बरकरार रखा गया था। हालांकि, 5 अक्टूबर की सुनवाई में CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि अदालत ने Form-6 में किए गए किसी संशोधन को मंजूरी नहीं दी थी। अब इस मामले में रिकॉर्ड की जांच के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी।

चुनाव आयोग ने इससे पहले यह भी बताया था कि जिन राज्यों में SIR पूरा हो चुका है, वहां Form-6 से अतिरिक्त SIR घोषणा को हटाया गया है। जिन क्षेत्रों में SIR जारी है, वहां प्रक्रिया से जुड़ी घोषणा उपलब्ध रहने की बात कही गई थी।

क्या CEC ने अकेले लिए SIR से जुड़े फैसले

याचिकाकर्ताओं की ओर से आरोप लगाया गया है कि SIR से जुड़े कई फैसले अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए। सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इन आरोपों को तथ्य के रूप में स्वीकार नहीं किया है। अदालत ने कहा कि पहले चुनाव आयोग का जवाब और संबंधित रिकॉर्ड देखना जरूरी है।

अदालत के सामने यह सवाल भी है कि तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में निर्णय लेने की निर्धारित प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं। यदि रिकॉर्ड से प्रक्रिया का उल्लंघन सामने आता है, तो अदालत संबंधित फैसलों की वैधानिकता पर विचार कर सकती है।

मीडिया रिपोर्ट के आधार पर नहीं होगी तत्काल कार्रवाई

सुनवाई के दौरान अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि केवल किसी मीडिया रिपोर्ट के आधार पर CEC के खिलाफ अंतरिम कार्रवाई नहीं की जा सकती। अदालत को संबंधित पक्षों का जवाब और आधिकारिक रिकॉर्ड देखना होगा। इसी आधार पर फिलहाल निलंबन की अंतरिम मांग पर आदेश नहीं दिया गया।

CEC को हटाने की मांग पहले भी उठ चुकी है

ज्ञानेश कुमार को हटाने की मांग को लेकर विपक्षी दलों ने अप्रैल 2026 में भी संसद में पहल की थी। 6 अप्रैल को लोकसभा अध्यक्ष और राज्यसभा सभापति ने उस समय दाखिल किए गए प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया था। इसके बाद 24 अप्रैल को विपक्ष के 73 राज्यसभा सांसदों ने नए आधारों के साथ CEC को हटाने की मांग वाला नोटिस दिया था।

अब आगे क्या होगा

सुप्रीम कोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब केंद्र सरकार, चुनाव आयोग, ज्ञानेश कुमार और अन्य संबंधित पक्षों के जवाब महत्वपूर्ण होंगे। अदालत रिकॉर्ड के आधार पर यह देखेगी कि SIR से जुड़े निर्णयों में चुनाव आयोग की निर्धारित निर्णय प्रक्रिया का पालन हुआ था या नहीं और Form-6 में हुए बदलाव की जिम्मेदारी किसकी थी। फिलहाल अदालत ने CEC को निलंबित करने का कोई अंतरिम आदेश नहीं दिया है।

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