UP MLC Election 2026: मतदान से ठीक पहले मतदाता सूची में अजीबोगरीब प्रविष्टियों से मचा हड़कंप, करीब 30 मामलों की जानकारी सामने आई, जांच के बाद जिम्मेदार कर्मचारियों पर कार्रवाई के निर्देश
लखनऊ/फतेहपुर/झांसी। उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक सीटों के चुनाव से ठीक पहले मतदाता सूची में ऐसी गलतियां सामने आई हैं, जिन्होंने चुनावी रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कहीं मतदाता के नाम वाले कॉलम में ‘अली के पास है’ दर्ज मिला, तो कहीं पिता के नाम की जगह ‘बीकॉम’ लिखा होने की शिकायत सामने आई। कुछ प्रविष्टियों में पूरे वाक्य तक नाम के रूप में दर्ज पाए गए।
मामला सामने आने के बाद निर्वाचन अधिकारियों ने जांच शुरू की। 22 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में गड़बड़ियों की पुष्टि हुई है। जांच के आधार पर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए गए हैं। चुनाव से ठीक पहले इन गलतियों ने मतदाता सूची की शुद्धता को लेकर बहस तेज कर दी है।
कहीं ‘अली के पास है’, कहीं पिता के नाम पर ‘बीकॉम’
फतेहपुर में एक मतदाता के नाम वाले कॉलम में ‘अली के पास है’ दर्ज होने का मामला सामने आया। वहीं, झांसी और इलाहाबाद-झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जुड़ी अन्य प्रविष्टियों में मतदाताओं के नाम और उनके पिता के नाम में असामान्य शब्द दर्ज होने की शिकायतें सामने आईं।
कुछ मतदाता पर्चियों में नाम की जगह पूरा वाक्य दर्ज होने की बात भी सामने आई। इन प्रविष्टियों के सोशल मीडिया पर प्रसारित होने के बाद निर्वाचन व्यवस्था की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठने लगे।
‘राम ने यादव को मारा’ जैसी प्रविष्टि ने चौंकाया
मतदाता सूची में ‘राम ने यादव को मारा’ जैसी प्रविष्टि भी चर्चा में आई। इसके अलावा कुछ रिकॉर्ड में पिता के नाम वाले कॉलम में ‘मूर्ख चंद्र यादव’ और ‘बीकॉम’ जैसे विवरण दर्ज होने की खबरें सामने आईं।
ऐसी गलतियां केवल नाम की वर्तनी तक सीमित नहीं दिखतीं, बल्कि कुछ मामलों में पूरे विवरण के गलत दर्ज होने का संकेत देती हैं। हालांकि, हर प्रविष्टि के पीछे की वजह अलग-अलग रिकॉर्ड की जांच से ही स्पष्ट हो सकती है।
चुनाव आयोग ने लिया संज्ञान, जांच रिपोर्ट के बाद कार्रवाई के निर्देश
मामले की जानकारी मिलने के बाद उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक निर्वाचन क्षेत्र के निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी और झांसी के मंडलायुक्त विमल कुमार दुबे से जांच रिपोर्ट मांगी थी।
रिपोर्टों के मुताबिक, जांच में गलत प्रविष्टियों की पुष्टि होने के बाद जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने तथा कार्रवाई के निर्देश दिए गए। करीब 30 मामलों का उल्लेख भी रिपोर्टों में सामने आया है।
प्रशासन का आश्वासन—गलती के कारण पात्र मतदाता वंचित न हों
मतदाता सूची में नाम या अन्य विवरण गलत होने से संबंधित लोगों के मन में मतदान को लेकर असमंजस पैदा हो सकता है। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी है कि शिकायतों का समय पर निस्तारण किया जाए और पात्र मतदाताओं के अधिकार सुरक्षित रहें।
मतदाता सूची में त्रुटि मिलने का अर्थ अपने आप यह नहीं है कि संबंधित व्यक्ति अपात्र है या उसका नाम जानबूझकर गलत दर्ज किया गया है। हर मामले में उपलब्ध दस्तावेजों और आधिकारिक रिकॉर्ड के आधार पर स्थिति स्पष्ट करना जरूरी है।
23 अक्टूबर के मतदान से पहले क्यों अहम है मामला?
उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की सीटों के लिए 23 अक्टूबर 2026 को मतदान निर्धारित है। ऐसे समय में मतदाता सूची की त्रुटियां सामने आने से रिकॉर्ड की विश्वसनीयता, जांच व्यवस्था और जिम्मेदारी तय करने जैसे सवाल महत्वपूर्ण हो गए हैं।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि गलत प्रविष्टियां किस प्रक्रिया के तहत दर्ज हुईं, उन्हें कितनी जल्दी सुधारा गया और जांच के आधार पर संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं।
निष्कर्ष: मतदाता सूची लोकतांत्रिक प्रक्रिया का अहम दस्तावेज है। उसमें नाम और पारिवारिक विवरण जैसी बुनियादी जानकारियों की गलतियां सामने आना गंभीर प्रशासनिक सवाल खड़े करता है। जरूरी है कि जांच पारदर्शी हो, गलतियां सुधारी जाएं और किसी भी पात्र मतदाता को केवल लिपिकीय त्रुटि के कारण मतदान के अधिकार से वंचित न होना पड़े।










