करीब एक घंटे चली मुलाकात, भाजपा पर लगाए अन्याय और फर्जी मुकदमों के आरोप | जौहर विश्वविद्यालय का मुद्दा उठाया | रामपुर सीट के उम्मीदवार पर अखिलेश ने नहीं खोले पत्ते
रामपुर, उत्तर प्रदेश। उत्तर प्रदेश की राजनीति में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और वरिष्ठ नेता आजम खान की मुलाकात ने नई सियासी चर्चा छेड़ दी है। गुरुवार, 22 अक्टूबर को अखिलेश यादव रामपुर जिला जेल पहुंचे और आजम खान से करीब एक घंटे तक बातचीत की। मुलाकात के बाद सपा प्रमुख ने साफ संदेश दिया कि पार्टी में आजम खान का महत्व बरकरार है।
अखिलेश यादव ने कहा, “आजम थे, आजम हैं और आजम रहेंगे।” उन्होंने आरोप लगाया कि आजम खान और उनके परिवार को राजनीतिक रूप से निशाना बनाया गया है और उनके खिलाफ दर्ज मुकदमों के कारण उन्हें लंबे समय तक जेल में रहना पड़ा। हालांकि, मुकदमों को लेकर अखिलेश के आरोप उनके राजनीतिक पक्ष का हिस्सा हैं; संबंधित मामलों का फैसला कानूनी प्रक्रिया के तहत होगा।
जेल से बाहर आए अखिलेश का भाजपा पर हमला
आजम खान से मुलाकात के बाद पत्रकारों से बातचीत में अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि किसी राजनीतिक परिवार को इतना अन्याय नहीं झेलना पड़ा, जितना आजम खान के परिवार को झेलना पड़ा है।
सपा प्रमुख ने कहा कि मुकदमों के जरिए सच्चाई को हमेशा के लिए कैद नहीं रखा जा सकता। उन्होंने उम्मीद जताई कि आजम खान को न्याय मिलेगा और वह जल्द स्वस्थ होकर सामान्य जीवन में लौटेंगे।
अखिलेश ने रामपुर के लोगों के साथ समाजवादी पार्टी के रिश्ते को केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि भावनात्मक भी बताया।
जौहर विश्वविद्यालय को लेकर भी उठाया मुद्दा
मुलाकात के बाद अखिलेश यादव ने मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय का जिक्र करते हुए कहा कि आजम खान ने शिक्षा, पढ़ाई और युवाओं के भविष्य को लेकर जो सपना देखा था, उसे समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता पूरा करने का प्रयास करेंगे।
उन्होंने भाजपा सरकार पर विश्वविद्यालय को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया। अखिलेश के मुताबिक, शिक्षा संस्थानों और युवाओं के भविष्य को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। विश्वविद्यालय को लेकर चल रहे विवादों पर उनका बयान राजनीतिक बहस का हिस्सा बन गया है।
2027 के चुनाव पर आजम खान से चर्चा
अखिलेश यादव ने बताया कि आजम खान के साथ आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव को लेकर भी बातचीत हुई। उनके अनुसार, सभी 403 विधानसभा सीटों और गठबंधन सहयोगियों से मिले सुझावों पर चर्चा की गई।
जब उनसे रामपुर सदर सीट से समाजवादी पार्टी के संभावित उम्मीदवार के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने नाम बताने से इनकार कर दिया। अखिलेश ने कहा कि उम्मीदवार के नाम का खुलासा अभी नहीं किया जाएगा।
इस बयान के बाद रामपुर की सियासत में आजम खान की भूमिका और आगामी चुनाव में उनकी सलाह के महत्व को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
आजम खान के परिवार से भी मिले सपा प्रमुख
जेल में मुलाकात के बाद अखिलेश यादव आजम खान के आवास पर भी पहुंचे। वहां उन्होंने आजम खान के परिवार के सदस्यों, जिनमें उनकी पत्नी तंजीन फातिमा भी शामिल हैं, से मुलाकात की।
इस दौरे को ऐसे समय में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे जोर पकड़ रही हैं। आजम खान लंबे समय से रामपुर और प्रदेश की राजनीति में प्रभावशाली चेहरा रहे हैं।
भाजपा ने भी साधा निशाना
अखिलेश यादव की रामपुर यात्रा पर भाजपा की ओर से भी प्रतिक्रिया आई। भाजपा नेताओं ने सपा पर आजम खान को लेकर राजनीतिक प्राथमिकताओं के सवाल उठाए और पिछली सपा सरकार के दौरान कानून-व्यवस्था को लेकर आलोचना की।
इस तरह जेल में हुई मुलाकात के बाद सपा और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी तेज हुआ है।
रामपुर से 2027 तक क्या होगा सियासी संदेश?
अखिलेश यादव का यह दौरा सिर्फ एक मुलाकात तक सीमित नहीं रहा। आजम खान के प्रति समर्थन जताने, जौहर विश्वविद्यालय का मुद्दा उठाने और आगामी विधानसभा चुनाव पर चर्चा का उल्लेख करने से इसके राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।
हालांकि, रामपुर सीट से उम्मीदवार कौन होगा और आजम खान की सलाह को पार्टी किस रूप में आगे बढ़ाएगी, यह अभी स्पष्ट नहीं है। फिलहाल अखिलेश का संदेश साफ है कि समाजवादी पार्टी आजम खान को अपने राजनीतिक और भावनात्मक रिश्ते का अहम हिस्सा मानती है।










