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Greater Noida PNB Fraud: बैंक में 35 करोड़ की कथित हेराफेरी, किसी के 51 लाख गायब तो किसी के खाते में बचे सिर्फ 1,290 रुपये

ग्रेटर नोएडा की ऐच्छर शाखा में खाताधारकों की शिकायतों से मचा हड़कंप, एफडी समय से पहले तोड़कर दूसरे खातों में रकम भेजने का आरोप; ब्रांच मैनेजर समेत पांच कर्मचारी निलंबित, पुलिस और बैंक की जांच जारी

ग्रेटर नोएडा। बैंक में जमा जीवनभर की कमाई सुरक्षित रहने की उम्मीद हर खाताधारक करता है, लेकिन ग्रेटर नोएडा के सेक्टर पाई-1 स्थित पंजाब नेशनल बैंक की ऐच्छर शाखा से जुड़ी शिकायतों ने ग्राहकों की चिंता बढ़ा दी है। खाताधारकों ने आरोप लगाया है कि उनकी जानकारी और अनुमति के बिना बचत खातों तथा फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से बड़ी रकम निकालकर दूसरे खातों में ट्रांसफर कर दी गई। शुरुआती शिकायतों में करीब 35 करोड़ रुपये की कथित हेराफेरी का मामला सामने आया है। हालांकि, इस रकम की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। <escape> </escape>

35 करोड़ की कथित गड़बड़ी, पांच बैंक कर्मचारी निलंबित

मामला सामने आने के बाद बैंक प्रबंधन ने शाखा के ब्रांच मैनेजर समेत पांच कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। शाखा में नए कर्मचारियों की तैनाती भी की गई है। बैंक की आंतरिक विजिलेंस टीम मामले की जांच कर रही है, जबकि बीटा-2 कोतवाली पुलिस को भी खाताधारकों की ओर से शिकायतें मिली हैं।

पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि कितने खातों से रकम प्रभावित हुई, लेन-देन किस प्रक्रिया से किए गए और पैसा किन खातों में पहुंचा। शिकायतों के आधार पर जांच जारी है। किसी कर्मचारी की जिम्मेदारी और कथित गड़बड़ी में उसकी भूमिका जांच के निष्कर्षों के बाद ही स्पष्ट होगी।

किसी ने बताया 51 लाख गायब, किसी के खाते में बची मामूली रकम

इस मामले में अलग-अलग खाताधारकों ने अपनी जमा पूंजी से जुड़ी गंभीर शिकायतें की हैं। एक ग्राहक राहुल ने दावा किया कि उनकी मां के खाते से करीब 51 लाख रुपये बिना अनुमति निकाल लिए गए। परिवार का कहना है कि खाते से जुड़ी जानकारी समय पर नहीं मिल सकी, जिसके कारण संदिग्ध लेन-देन का पता देर से चला।

एक अन्य खाताधारक सोनू ने अपने खाते से करीब 90 लाख रुपये गायब होने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि बैंक अधिकारियों ने रकम वापस दिलाने का आश्वासन दिया है। हालांकि, रकम की वापसी और पूरे मामले की स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।

इसी तरह सोनू सागर ने अपने पिता के खाते का हवाला देते हुए बताया कि उसमें पहले करीब 88 लाख रुपये जमा थे, जबकि हालिया स्टेटमेंट में केवल 1,290 रुपये का बैलेंस दिखाई दिया। उनके मुताबिक, खाते में पहले जमा रकम के मुकाबले इतनी कम राशि बचने से परिवार परेशान है।

एफडी तोड़कर दूसरे खातों में ट्रांसफर करने का आरोप

खाताधारकों की शिकायतों में केवल बचत खातों से रकम कम होने का मामला ही नहीं है। कई लोगों का आरोप है कि उनकी फिक्स्ड डिपॉजिट समय से पहले भुना दी गई और रकम दूसरे खातों में भेज दी गई।

कुछ ग्राहकों ने दावा किया कि उन्हें अपनी एफडी के बारे में जानकारी लेने बैंक पहुंचने पर पता चला कि जमा राशि पहले ही निकाली जा चुकी है। एक ट्रांसपोर्ट कारोबारी विनीत भाटी ने भी करीब 25 लाख रुपये से जुड़ी कथित गड़बड़ी की शिकायत की है। उनका आरोप है कि निवेश के सिलसिले में बैंक कर्मचारियों को दिए गए दस्तावेजों और हस्ताक्षरों के बाद रकम उनके बताए खाते के बजाय किसी अन्य खाते में पहुंच गई।

इन सभी मामलों में दस्तावेजों, बैंक रिकॉर्ड और लेन-देन की जांच से ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि रकम किस तरह ट्रांसफर हुई और संबंधित खाताधारकों की सहमति थी या नहीं।

बैंक के बाहर जुटे खाताधारक, कार्रवाई और रकम वापसी की मांग

रकम गायब होने की शिकायतें सामने आने के बाद कई खाताधारक बैंक शाखा पहुंचे और अपनी जमा पूंजी का हिसाब मांगा। लोगों ने संबंधित खातों की जांच, जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और रकम वापस दिलाने की मांग की।

पुलिस को मिली शिकायतों के आधार पर जांच शुरू की गई है। शुरुआती रिपोर्टों में 16 खाताधारकों की शिकायतों का जिक्र है। प्रभावित लोगों की अंतिम संख्या और वास्तविक वित्तीय नुकसान का आंकड़ा जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।

अब खाताधारकों को किस बात का इंतजार?

फिलहाल इस पूरे मामले में तीन सवाल सबसे अहम हैं—क्या खाताधारकों की रकम बिना अनुमति निकाली गई, संदिग्ध लेन-देन में किन लोगों की भूमिका रही और प्रभावित ग्राहकों को उनकी जमा पूंजी कब तक वापस मिलेगी?

ब्रांच मैनेजर समेत पांच कर्मचारियों का निलंबन कार्रवाई का अहम कदम है, लेकिन इससे अपने आप आरोप साबित नहीं हो जाते। बैंक की विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया, पुलिस की जांच और लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड सामने आने के बाद ही मामले की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।

ग्रेटर नोएडा की इस घटना ने बैंकिंग सुरक्षा, ग्राहकों की जमा पूंजी और शिकायतों के समयबद्ध निस्तारण को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अब खाताधारकों की निगाहें जांच और उनकी रकम की स्थिति स्पष्ट होने पर टिकी हैं।

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