इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि सास-ससुर को अपनी बहू से भरण-पोषण पाने का कानूनी अधिकार नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि संबंधित कानून में सास या ससुर को इस श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है।
क्या कहा कोर्ट ने
न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की पीठ ने कहा कि धारा 125 के तहत भरण-पोषण पाने वालों की सूची सीमित है और इसमें सास-ससुर शामिल नहीं हैं। यह प्रावधान अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत भी समान रूप से लागू माना गया।
किस मामले में आया फैसला
यह निर्णय राकेश कुमार और एक अन्य की आपराधिक पुनरीक्षण याचिका पर सुनवाई के दौरान दिया गया। अदालत ने निचली अदालत के आदेश का परीक्षण करते हुए कानूनी स्थिति स्पष्ट की।
कोर्ट की अहम टिप्पणी
अदालत ने कहा कि कानून में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि भरण-पोषण का दावा पति-पत्नी, नाबालिग बच्चों और माता-पिता तक सीमित है। इसलिए सास-ससुर द्वारा बहू से भरण-पोषण मांगने का अधिकार कानून में नहीं दिया गया है।
क्यों अहम है फैसला
यह निर्णय पारिवारिक विवादों से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इससे स्पष्ट हो गया है कि बहू पर सास-ससुर के भरण-पोषण की कानूनी जिम्मेदारी नहीं बनती।
मुख्य बिंदु
- इलाहाबाद हाईकोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला
- सास-ससुर बहू से नहीं मांग सकते भरण-पोषण
- धारा 125 में नहीं है सास-ससुर का उल्लेख
- आगरा के मामले में आया निर्णय
- न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की पीठ ने सुनाया आदेश









