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हाईकोर्ट के फैसले से असंतुष्ट किन्नर समाज, नेग परंपरा को बताया सांस्कृतिक अधिकार

पूर्वाचल राज्य संवाददाता: दीपू तिवारी
सोनभद्र। माननीय उच्च न्यायालय के हालिया निर्णय को लेकर किन्नर समाज में गहरा असंतोष व्यक्त किया जा रहा है। विश्व हिंदू महासंघ उत्तर प्रदेश किन्नर प्रकोष्ठ की जिला अध्यक्ष सोनभद्र एवं सनातनी किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर किरन नंदगिरी ने कहा कि समाज की ओर से प्रभावी पैरवी नहीं हो पाई, जिसके कारण उनका पक्ष न्यायालय के समक्ष सही ढंग से प्रस्तुत नहीं किया जा सका।

किन्नर समुदाय का कहना है कि वे “वसूली” नहीं करते, बल्कि पारंपरिक रूप से जन्म, विवाह जैसे खुशी के अवसरों पर “नेग” प्राप्त करते हैं, जो उनकी सामाजिक एवं सांस्कृतिक परंपरा का हिस्सा है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि हर समाज की तरह उनके समुदाय में भी कुछ असामाजिक तत्व हो सकते हैं, लेकिन उनके आधार पर पूरे समाज को दोषी ठहराना उचित नहीं है।

किन्नर समाज का अस्तित्व प्राचीन काल से रहा है और धार्मिक ग्रंथों में भी उनका उल्लेख सम्मानपूर्वक मिलता है। समाज का कहना है कि उनकी परंपराएं आस्था और सामाजिक मान्यताओं से जुड़ी हैं, लेकिन वर्तमान निर्णय उनके अस्तित्व और परंपराओं को गलत रूप में प्रस्तुत करता है।

इसी के चलते किन्नर समाज इस फैसले को उच्च अदालत में चुनौती देने की तैयारी कर रहा है। साथ ही आम जनता से अपील की गई है कि वे किन्नर समाज के प्रति सम्मान और सहयोग का भाव बनाए रखें, क्योंकि यह समुदाय आज भी सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ है।

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