📍 प्रयागराज/वाराणसी | एजुकेशन-लीगल डेस्क
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय में पिछले 12-13 वर्षों से संविदा पर कार्यरत गैर-शिक्षण कर्मचारियों के नियमितीकरण को लेकर अहम आदेश जारी किया है।
न्यायमूर्ति दिनेश पाठक की पीठ ने रिट याचिका संख्या 18901/2024 का निस्तारण करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला
BHU के संविदा कर्मचारियों को मिली राहत
12-13 साल से कार्यरत कर्मचारियों का मामला
कोर्ट ने VC को 3 महीने में फैसला देने का आदेश
एक हफ्ते में नया आवेदन देने का निर्देश
देरी पर कोर्ट ने लगाया ₹2000 का जुर्माना
यूनिवर्सिटी के रवैये पर कोर्ट सख्त
भर्ती प्रक्रिया को फैसले के अधीन रखा गया
40 कर्मचारियों ने दायर की थी याचिका
नियमितीकरण पर अब जल्द होगा बड़ा फैसला
⚖️ कोर्ट का सख्त रुख
सुनवाई के दौरान विश्वविद्यालय की ओर से बार-बार जवाब दाखिल करने में देरी पर अदालत ने कड़ा रुख अपनाया। इससे पहले न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने BHU को अंतिम मौका देते हुए ₹2000 का हर्जाना लगाया था, जिसे ‘हाई कोर्ट बार एसोसिएशन, इलाहाबाद’ में जमा करने का निर्देश दिया गया।
📄 क्या है पूरा मामला?
याचिकाकर्ता अनूप कुमार समेत 40 कर्मचारियों ने अदालत में बताया कि वे वर्ष 2013-14 से BHU में ऑफिस असिस्टेंट और ऑडिट असिस्टेंट जैसे पदों पर लगातार कार्यरत हैं।
लंबे समय से सेवा देने के बावजूद उनका नियमितीकरण नहीं किया गया, जिसके खिलाफ उन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।
📌 कोर्ट के अहम निर्देश
▪️ याचिकाकर्ता एक सप्ताह के भीतर कुलपति को नया प्रत्यावेदन देंगे
▪️ BHU कुलपति को 3 महीने के भीतर निर्णय लेना अनिवार्य
▪️ हालिया भर्ती विज्ञापन (07/2024-2025) इस फैसले के अधीन रहेगा
🔍 क्या है असर?
इस आदेश से लंबे समय से संविदा पर कार्यरत कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है। अब सबकी नजर BHU प्रशासन के फैसले पर है, जो आने वाले समय में इन कर्मचारियों के भविष्य को तय करेगा।










