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भारत-नेपाल बॉर्डर पर नशीली दवाओं की तस्करी का पर्दाफाश, पुरन्दरपुर पुलिस ने दो तस्करों को दबोचा—90 हजार का माल जब्त

रानीपुर चौराहे पर सनसनीखेज छापा; कोडिसन सिरप व कैप्सूल नेपाल ले जा रहे मुकेश-योगेश गिरफ्तार; युवाओं में “कॉकटेल ड्रग” का बढ़ता खतरा

पूर्वांचल राज्य ब्यूरो
महराजगंज, 7 मई। भारत-नेपाल सीमा पर मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे सतत अभियान में पुरन्दरपुर पुलिस को गुरुवार को बड़ी कामयाबी हासिल हुई। पुलिस ने दो कुख्यात तस्करों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से 123 बोतल नशीला कोडिसन सिरप, 960 स्पस्टीक कैप्सूल, एक बाइक (नंबर UP55X4270) और दो स्मार्टफोन बरामद किए। बरामद सामग्री की अनुमानित कीमत 90 हजार रुपये से अधिक बताई जा रही है।
अभियान की रूपरेखा व कार्रवाई का विवरण
पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी के विशेष निर्देशों पर अपर पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ कुमार और क्षेत्राधिकारी फरेंदा दीपशिखा वर्मा के कुशल पर्यवेक्षण में पुरन्दरपुर थाना टीम ने यह सफल कार्रवाई की। विभागीय सूत्रों के अनुसार, गुप्तचर (मुखबिर) से विश्वसनीय सूचना प्राप्त हुई थी कि गोरखपुर शहर से सोनौली सीमा की ओर एक बाइक पर भारी मात्रा में नशीले सिरप व कैप्सूल लदी तस्करी की जा रही है।
सूचना मिलते ही पुरन्दरपुर थाना प्रभारी निरीक्षक के नेतृत्व में पुलिस टीम ने रानीपुर चौराहे पर अचूक घेराबंदी की। संदिग्ध बाइक को रोका गया तो उस पर सवार दो व्यक्तियों ने भागने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें घेरकर हिरासत में ले लिया। प्राथमिक जांच में बाइक के डिक्की व बैग से नशीली वस्तुएं बरामद हुईं।
गिरफ्तार तस्करों का खुलासा
गिरफ्तार आरोपितों की पहचान सिद्धार्थनगर जिले के डुमरियागंज थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम निवासी मुकेश पाण्डेय (उम्र 32 वर्ष) पुत्र रामप्रकाश पाण्डेय और गोरखपुर जिले के खोराबार मोहल्ला निवासी योगेश तिवारी (उम्र 50 वर्ष) पुत्र रामनरेश तिवारी के रूप में हुई। दोनों पर पूर्व में भी छोटे-मोटे आपराधिक मामले दर्ज हैं।
लंबी पूछताछ में तस्करों ने पूरा राज खोल दिया। उन्होंने बताया कि वे गोरखपुर व सिद्धार्थनगर के स्थानीय मेडिकल स्टोरों से कोडिसन सिरप (प्रति बोतल 100 मिली) व स्पस्टीक कैप्सूल सस्ते में खरीदते थे। फिर इन्हें बाइक पर लादकर सोनौली सीमा पार कर नेपाल के बाजारों में ऊंचे दामों पर बेचते थे। यह अवैध धंधा पिछले छह माह से फल-फूल रहा था, जिससे उन्हें मोटी कमाई हो रही थी। पुलिस को संदेह है कि इनके पीछे एक बड़ा नेटवर्क कार्यरत है।
स्वास्थ्य जोखिम व सामाजिक संकट
पुलिस अधिकारियों ने चेतावनी दी कि कोडिसन सिरप व स्पस्टीक कैप्सूल जैसी दवाओं का चिकित्सीय उपयोग सीमित होता है, लेकिन तस्कर इन्हें नशे के लिए दुरुपयोग में बेच रहे हैं। युवाओं में इनके मिश्रण से तैयार “कॉकटेल ड्रग” (जिसमें सिरप, कैप्सूल व अन्य मादक पदार्थ मिलाए जाते हैं) का प्रचलन चिंताजनक रूप से बढ़ गया है। इससे लिवर-किडनी फेलियर, हृदय गति रुकना, मानसिक भ्रम, हिंसा व असामयिक मौत जैसी गंभीर समस्याएं हो रही हैं।
महराजगंज, गोरखपुर व सिद्धार्थनगर जैसे सीमावर्ती जिलों में सैकड़ों युवा इस नशे के जाल में फंस चुके हैं। स्थानीय अस्पतालों में ऐसे मरीजों की संख्या दोगुनी हो गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि सीमा पर खुली तस्करी से पूरा क्षेत्र नशे की चपेट में आ रहा है।
एसपी का बयान व आगे की रणनीति
जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचे एसपी शक्ति मोहन अवस्थी ने पत्रकारों से बातचीत में कहा, “सीमा सुरक्षा अभियान के तहत टीमें 24 घंटे अलर्ट मोड पर हैं। अब तक 20 से अधिक तस्कर पकड़े जा चुके हैं। मुखबिरों को पुरस्कार की योजना है।” उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों पर नजर रखें व नशे के लक्षण दिखने पर तुरंत पुलिस से संपर्क करें।
आरोपितों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट, आर्म्स एक्ट व अन्य संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर पूछताछ जारी है। पुलिस बड़े नेटवर्क का पर्दाफाश करने के लिए रेड बढ़ाने की तैयारी में है। 

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