पूर्वांचल राज्य ब्यूरो
महराजगंज ( घुघली) पल्टू मिश्रा
सीएम के आदेश और ध्वनि प्रदूषण के नियमों पर उठे सवाल, तेज आवाज के बीच पुलिस कराती रही यातायात डायवर्जन; कार्रवाई नहीं होने पर उठ रही उंगलियां
महराजगंज, दुर्गा पूजा के दौरान घुघली में तेज आवाज में बज रहे साउंड सिस्टम को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। स्थानीय स्तर पर दावा किया जा रहा है कि अत्यधिक तेज ध्वनि के कारण कई दुकानों के शीशे टूट गए। यदि यह दावा सही है, तो यह केवल ध्वनि प्रदूषण का मामला नहीं, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा और प्रशासनिक निगरानी पर भी बड़ा सवाल है। आखिर पूजा के नाम पर ध्वनि की सीमा का उल्लंघन हुआ, तो जिम्मेदार अधिकारियों ने समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं की?
एक ओर सरकार ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण और नियमों के पालन की बात करती है, वहीं दूसरी ओर घुघली में तेज आवाज को लेकर उठ रही शिकायतों ने व्यवस्था की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी है कि ध्वनि प्रदूषण विभाग की निगरानी कहां थी और निर्धारित मानकों से अधिक आवाज होने पर उसे रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए?
तेज आवाज के बीच यातायात डायवर्जन, ध्वनि पर नियंत्रण क्यों नहीं?
बताया जा रहा है कि अधिक ध्वनि के कारण प्रशासन को सड़क पर यातायात की दिशा बदलनी पड़ती रही। ऐसे में सवाल उठता है कि जब प्रशासन यातायात व्यवस्था संभालने में सक्रिय था, तो तेज आवाज पर नियंत्रण के लिए प्रभावी कदम क्यों नहीं दिखाई दिए? क्या संबंधित अधिकारियों ने ध्वनि स्तर की जांच की थी? यदि नियमों का उल्लंघन पाया गया, तो साउंड संचालकों के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
संचालक दोषी या प्रशासन जिम्मेदार?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल जवाबदेही का है। यदि साउंड संचालकों ने निर्धारित ध्वनि सीमा का उल्लंघन किया, तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, यदि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने रहे, तो उनकी भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। हालांकि, दुकानों के शीशे टूटने और ध्वनि स्तर के निर्धारित सीमा से अधिक होनेसंचालक दोषी या प्रशासन जिम्मेदार?
इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल जवाबदेही का है। यदि साउंड संचालकों ने निर्धारित ध्वनि सीमा का उल्लंघन किया, तो उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं, यदि शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार अधिकारी मूकदर्शक बने रहे, तो उनकी भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। हालांकि, दुकानों के शीशे टूटने और ध्वनि स्तर के निर्धारित सीमा से अधिक होने के दावों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी आवश्यक है।
ध्वनि प्रदूषण से स्वास्थ्य को खतरा, समय रहते नियंत्रण जरूरी
अत्यधिक तेज आवाज लोगों की सुनने की क्षमता, नींद और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। ऐसे में त्योहारों के दौरान धार्मिक आयोजनों की गरिमा बनाए रखते हुए ध्वनि संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित करना प्रशासन की जिम्मेदारी है।अब सवाल यह है कि क्या जिम्मेदार अधिकारी इस मामले की जांच कराएंगे? क्या ध्वनि स्तर की माप कराकर नियमों का उल्लंघन करने वालों पर कार्रवाई होगी? या फिर दुकानदारों और आम नागरिकों की शिकायतें व्यवस्था के शोर में ही दबकर रह जाएंगी?
घुघली के नागरिकों को अब प्रशासन से स्पष्ट जवाब और निष्पक्ष जांच की अपेक्षा है।









