पूर्वाचल राज्य संवाददाता : दीपू तिवारी
सोनभद्र रेणुकूट स्थित हिण्डालको प्राइमरी स्कूल यूनिट-2 में विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के लिए एक आकर्षक, ज्ञानवर्धक एवं प्रेरणादायक पुस्तक मेले का भव्य आयोजन किया गया। इस आयोजन का उद्देश्य बच्चों में पढ़ने की आदत विकसित करना, पुस्तकों के प्रति रुचि बढ़ाना तथा अभिभावकों को भी बच्चों के बौद्धिक विकास से जोड़ना था। कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों और अभिभावकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
विद्यालय की प्रधानाध्यापिका सुश्री दीपांविता रॉय ने बताया कि वर्तमान समय में बच्चों का रुझान डिजिटल माध्यमों की ओर तेजी से बढ़ रहा है, ऐसे में पुस्तकों के प्रति लगाव बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि पुस्तकें केवल ज्ञान का स्रोत ही नहीं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण और रचनात्मक सोच को विकसित करने का सशक्त माध्यम भी हैं। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए विद्यालय प्रशासन द्वारा इस पुस्तक मेले का आयोजन किया गया। उन्होंने यह भी जानकारी दी कि विद्यालय की ओर से बच्चों को सभी पुस्तकें निशुल्क उपलब्ध कराई जा रही हैं, ताकि प्रत्येक विद्यार्थी बिना किसी आर्थिक बाधा के ज्ञानार्जन कर सके।
पुस्तक मेले में विभिन्न विषयों एवं रुचियों से संबंधित पुस्तकों की आकर्षक प्रदर्शनी लगाई गई थी। इनमें बच्चों की कहानी की किताबें, नैतिक शिक्षा से जुड़ी पुस्तकें, सामान्य ज्ञान, विज्ञान, गणित एवं भाषा विषयों की सहायक पुस्तकें, गतिविधि पुस्तकें, चित्र पुस्तिकाएं तथा प्रेरणादायक साहित्य शामिल थे। मेले में छोटे बच्चों के लिए रंगीन एवं चित्रात्मक पुस्तकों की विशेष व्यवस्था की गई थी, जिससे उनमें पढ़ने के प्रति उत्सुकता और अधिक बढ़ी।
मेले में पहुंचे विद्यार्थियों ने अपने अभिभावकों के साथ मिलकर रुचिकर और उपयोगी पुस्तकों का चयन किया। बच्चों के चेहरे पर नई-नई पुस्तकों को देखकर उत्साह साफ झलक रहा था। कई विद्यार्थियों ने अपनी पसंदीदा कहानी एवं ज्ञानवर्धक पुस्तकों के बारे में चर्चा करते हुए खुशी व्यक्त की।
अभिभावकों ने भी विद्यालय की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन बच्चों के मानसिक एवं शैक्षिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
विद्यालय के शिक्षकों ने भी मेले में सक्रिय सहभागिता निभाई। उन्होंने विद्यार्थियों की आयु, रुचि एवं शैक्षिक आवश्यकता के अनुसार उपयुक्त पुस्तकों के चयन में मार्गदर्शन दिया।
शिक्षकों ने बच्चों को नियमित अध्ययन, पुस्तकालय उपयोग तथा पाठ्यक्रम से इतर पुस्तकों को पढ़ने के महत्व के बारे में भी बताया।
इस अवसर पर विद्यालय परिसर का वातावरण पूरी तरह शैक्षिक और प्रेरणादायक बना रहा। जगह-जगह पुस्तकों की आकर्षक सजावट की गई थी तथा विद्यार्थियों में ज्ञान प्राप्त करने की उत्सुकता दिखाई दे रही थी। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यालय और अभिभावकों के बीच संवाद एवं सहयोग को भी नई मजबूती मिली।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय प्रशासन द्वारा विद्यार्थियों को नियमित रूप से पुस्तक पढ़ने, पुस्तकालय का उपयोग करने तथा प्रतिदिन कुछ समय अध्ययन के लिए निर्धारित करने हेतु प्रेरित किया गया। यह पुस्तक मेला न केवल विद्यार्थियों के लिए ज्ञानवर्धक सिद्ध हुआ, बल्कि उनमें रचनात्मक सोच, भाषा कौशल और आत्मविश्वास विकसित करने की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।










