पूर्वाचल राज्य संवाददाता दीपू तिवारी
सोनभद्र रेणुकूट नगरवासियों को आपातकालीन स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से शुरू की गई रेणुकूट नगर पंचायत की एंबुलेंस सेवा आज बदहाली की तस्वीर बनकर रह गई है। कभी जनसेवा का प्रतीक मानी जाने वाली यह एंबुलेंस अब ऐसी स्थिति में पहुंच गई है कि इसे चालू करने के लिए चार-चार लोगों को धक्का लगाना पड़ रहा है। चिंताजनक बात यह है कि यदि उस समय एंबुलेंस में कोई गंभीर मरीज मौजूद होता, तो उसकी जान भी जोखिम में पड़ सकती थी। यह दृश्य न केवल नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि जनहित से जुड़ी महत्वपूर्ण योजनाओं की उपेक्षा को भी उजागर करता है।
नगर पंचायत के पूर्व अध्यक्ष शिव प्रताप सिंह उर्फ बबलू सिंह ने अपने कार्यकाल में नगरवासियों की आवश्यकताओं को देखते हुए एंबुलेंस सेवा शुरू कराई थी। उनका उद्देश्य था कि दुर्घटना, गंभीर बीमारी अथवा अन्य आपातकालीन परिस्थितियों में गरीब एवं जरूरतमंद लोगों को समय पर अस्पताल पहुंचाने की सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। उस समय इस पहल की नगरवासियों ने सराहना की थी और इसे जनहित में उठाया गया एक सराहनीय कदम माना गया था।
वर्षों तक इस एंबुलेंस ने अनेक मरीजों और जरूरतमंद परिवारों को राहत पहुंचाई। कई मौकों पर यह वाहन गंभीर मरीजों के लिए जीवनरक्षक साबित हुआ। लेकिन समय बीतने के साथ रखरखाव और नियमित मरम्मत के अभाव में इसकी स्थिति लगातार खराब होती चली गई।
हाल ही में नगर क्षेत्र में सामने आए दृश्य ने लोगों को हैरान कर दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार नगर पंचायत की एंबुलेंस इतनी जर्जर हो चुकी है कि उसे स्टार्ट करने के लिए चार लोगों को धक्का लगाना पड़ा। जिस वाहन का उद्देश्य मरीजों को त्वरित चिकित्सा सुविधा तक पहुंचाना था, वही वाहन आज स्वयं दूसरों के सहारे चलने को मजबूर दिखाई दे रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि आपातकालीन सेवा से जुड़े वाहन की ऐसी स्थिति बेहद गंभीर मामला है और इससे मरीजों की सुरक्षा पर भी प्रश्नचिह्न लगते हैं।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि यदि समय-समय पर एंबुलेंस का उचित रखरखाव कराया जाता तो आज यह स्थिति उत्पन्न नहीं होती। लोगों का आरोप है कि जनहित की इस महत्वपूर्ण सुविधा की अनदेखी की गई, जिसके कारण लाखों रुपये की सार्वजनिक संपत्ति धीरे-धीरे अनुपयोगी होती जा रही है।
नगर के सामाजिक कार्यकर्ताओं और वरिष्ठ नागरिकों का मानना है कि जनप्रतिनिधियों द्वारा शुरू की गई जनकल्याणकारी योजनाओं को राजनीतिक मतभेदों और व्यक्तिगत विरोध से ऊपर उठकर आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उनका कहना है कि जनता के हित में शुरू की गई योजनाएं किसी व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि पूरे समाज की धरोहर होती हैं। इसलिए उनका संरक्षण और संचालन निरंतर जारी रहना चाहिए।
नगरवासियों ने नगर पंचायत प्रशासन तथा संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि एंबुलेंस की वर्तमान स्थिति का तत्काल संज्ञान लिया जाए। वाहन की तकनीकी जांच कराकर उसे शीघ्र दुरुस्त कराया जाए, ताकि आपातकालीन परिस्थितियों में लोगों को पुनः इसका लाभ मिल सके। यदि वाहन मरम्मत योग्य नहीं है तो नगर की आवश्यकता को देखते हुए नई एंबुलेंस उपलब्ध कराई जाए।
रेणुकूट में चार लोगों द्वारा धक्का लगाकर चलाए जा रहे एंबुलेंस का दृश्य आज कई गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। यह केवल एक खराब वाहन की कहानी नहीं, बल्कि उन जनकल्याणकारी योजनाओं की हकीकत भी बयां करता है जो शुरुआत में जनता के लिए वरदान साबित होती हैं, लेकिन समय के साथ उपेक्षा की भेंट चढ़ जाती हैं। अब देखना यह होगा कि जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस गंभीर विषय पर क्या कदम उठाते हैं और नगरवासियों को पुनः बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में क्या प्रयास किए जाते हैं।










