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लखनऊ अग्निकांड: नाली में बच्चों का खून देख बिलख पड़े मां-बाप, रोती बहन बोली— ‘भाई खिड़की से कूद जाता तो बच जाता’

भ्रष्ट अफसरों की लापरवाही की कीमत 15 परिवारों ने चुकाई; बुढ़ापे के सहारे हमेशा के लिए सो गए! आखिर कब थमेगा ये खेल? 

लखनऊ | डिजिटल डेस्क

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के कोचिंग सेंटर में लगी भीषण आग ने सिर्फ 15 होनहार बच्चों की जान नहीं ली, बल्कि 15 हंसते-खेलते परिवारों को ताउम्र का ऐसा दर्द दे दिया है जिसे शब्दों में बयां करना नामुमकिन है। लखनऊ की उस दो मंजिला अवैध इमारत के बाहर और पोस्टमॉर्टम हाउस पर इस वक्त जो मंजर है, उसे देखकर वहां मौजूद हर शख्स की आंखें नम हैं।

किसी बूढ़े पिता ने अपने बुढ़ापे का एकमात्र सहारा खो दिया, तो किसी मां की गोद हमेशा के लिए सूनी हो गई। सबसे ज्यादा दिल दहला देने वाला नजारा तब सामने आया जब इमारत की नाली में बहता हुआ बच्चों का खून देखकर उनके मां-बाप वहीं जमीन पर बैठकर फूट-फूटकर बिलखने लगे।

“भैया डर गया था, वरना खिड़की से कूद जाता…”

हादसे का शिकार हुए एक छात्र की चश्मदीद बहन का रो-रोकर बुरा हाल है। बदहवास हालत में उसने बताया:

“धुआं इतना ज्यादा था कि भैया अंदर ही फंस गए। अगर वो थोड़ा हिम्मत दिखाते और इमारत की खिड़की से नीचे कूद जाते, तो शायद उनके पैर में चोट आती, वो जख्मी हो जाते… लेकिन आज मेरे बीच जिंदा तो होते! वो अंदर ही डर गए और जहरीले धुएं ने उन्हें हमसे छीन लिया।”

पोस्टमॉर्टम हाउस पर गूंजती चीखें और जलते सवाल

लखनऊ के पोस्टमॉर्टम हाउस पर सोमवार सुबह से ही अपनों की तलाश में भटकते परिजनों की चीखें गूंज रही हैं। जैसे ही डॉक्टरों की टीम ने शवों को शिनाख्त के लिए बाहर निकाला, वहां कोहराम मच गया।

  • इकलौते चिराग बुझ गए: मृतकों में कई ऐसे छात्र थे जो अपने माता-पिता की इकलौती संतान थे और घर की गरीबी दूर करने का सपना लेकर लखनऊ में रहकर प्रतियोगिता परीक्षाओं की तैयारी कर रहे थे।

  • सिस्टम की भेंट चढ़ी मासूमियत: परिजनों का रो-रोकर एक ही सवाल है कि जब साल 2016 में ही इस अवैध इमारत को ढहाने का आदेश जारी हो चुका था, तो आखिर अधिकारियों ने इसे 10 साल तक ‘मौत का कुआं’ बनने के लिए क्यों छोड़ दिया?

हादसे से जुड़े मुख्य भावनात्मक और प्रशासनिक बिंदु

पीड़ित परिवार का पक्ष प्रशासन की अब तक की कार्रवाई
परिजनों का रोना: नाली में बच्चों का खून देख बदहवास हुए माता-पिता। 4 अफसर सस्पेंड: लापरवाही के आरोप में संबंधित विभाग के 4 अधिकारी निलंबित।
मासूमों की उम्र: 20 से 30 साल के 15 स्टूडेंट्स (10 पुरुष, 5 महिलाएं) की मौत। 4 आरोपी अरेस्ट: कोचिंग संचालक और अवैध बिल्डिंग के मालिक समेत 4 गिरफ्तार।
बहन का दर्द: ‘भाई अगर कूद जाता तो आज हमारे बीच जिंदा होता।’ जांच तेज: मुख्यमंत्री के आदेश पर मामले की उच्च स्तरीय जांच जारी।

कब थमेगा रसूखदारों और भ्रष्ट अफसरों का ये खूनी खेल?

यह पहला मौका नहीं है जब किसी अवैध कमर्शियल बिल्डिंग में फायर सेफ्टी मानकों की अनदेखी के कारण मासूम छात्रों की जान गई हो। लेकिन लखनऊ के इस हादसे ने सिस्टम के उस सबसे क्रूर चेहरे को बेनकाब किया है, जहां 2016 के ध्वस्तीकरण आदेश को रसूख और रिश्वत के दम पर निरस्त कर दिया गया।

आज 15 परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है, उनके घरों के चूल्हे ठंडे पड़ चुके हैं। प्रशासन ने भले ही 4 अफसरों को सस्पेंड कर दिया हो, लेकिन पीड़ित परिवारों का कहना है कि यह सस्पेंशन उनके बच्चों को वापस नहीं ला सकता। दोषियों पर ऐसी सख्त कार्रवाई होनी चाहिए जो आगे के लिए नजीर बने। 

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