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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: VHP-ट्रस्ट की अहम बैठक, क्या चंपत राय पर गिरेगी गाज?

डिजिटल डेस्क | अयोध्या

अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावा और दानराशि के प्रबंधन को लेकर उठे विवाद के बीच विश्व हिंदू परिषद (VHP) और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक महत्वपूर्ण बैठक ने नए संगठनात्मक और राजनीतिक संकेत दिए हैं। बंद कमरे में हुई इस बैठक को विशेष जांच दल (SIT) की जांच और बढ़ते विवाद के मद्देनजर बेहद अहम माना जा रहा है। हालांकि बैठक के बाद किसी भी तरह का आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया।

वरिष्ठ पदाधिकारियों की मौजूदगी में हुआ मंथन

बैठक में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र, निर्माण प्रभारी गोपाल राव के अलावा विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री बजरंग लाल बांगड़ा, केंद्रीय संगठन महामंत्री मिलिंद परांडे और केंद्रीय सह-संगठन महामंत्री विनायक राव सहित कई वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे।

सूत्रों के अनुसार बैठक में मंदिर के चढ़ावा प्रबंधन, एसआईटी जांच और संगठन की आगामी रणनीति पर विस्तार से चर्चा हुई।

क्या संगठन अपनी छवि बचाने की तैयारी में?

सूत्रों का दावा है कि दान और चढ़ावे को लेकर उठे विवाद के कारण ट्रस्ट और विश्व हिंदू परिषद की छवि प्रभावित होने की आशंका पर भी चर्चा हुई। इसी कारण जिम्मेदारी तय करने और भविष्य की रणनीति बनाने जैसे मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

हालांकि, इस संबंध में ट्रस्ट या विहिप की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

इस्तीफे की चर्चाओं ने बढ़ाई हलचल

बैठक के बाद पूरे दिन अयोध्या में यह चर्चा तेज रही कि ट्रस्ट महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्र अपने पद छोड़ सकते हैं। हालांकि देर शाम तक न तो ट्रस्ट और न ही विश्व हिंदू परिषद की ओर से किसी संभावित इस्तीफे की पुष्टि की गई।

फिलहाल इन चर्चाओं को केवल अटकलें माना जा रहा है।

आरोपियों की संपत्तियों की भी हो रही जांच

चढ़ावा विवाद की जांच कर रही एजेंसियां गिरफ्तार आरोपियों की आर्थिक स्थिति और संपत्तियों की भी जांच कर रही हैं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार यदि जांच में अवैध तरीके से अर्जित संपत्ति के प्रमाण मिलते हैं, तो संबंधित संपत्तियों को चिह्नित कर जब्ती की कार्रवाई की जा सकती है।

सूत्रों के अनुसार कुछ आरोपियों की आर्थिक स्थिति में पिछले कुछ वर्षों के दौरान असामान्य वृद्धि के संकेत मिले हैं, जिनकी गहन जांच जारी है।

शुरुआती जांच पर भी उठ रहे सवाल

सूत्रों के मुताबिक मामला सामने आने के बाद शुरुआती छह से सात दिनों तक ट्रस्ट स्तर पर कर्मचारियों से पूछताछ होती रही। बाद में विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया।

हालांकि शुरुआती जांच प्रक्रिया को लेकर लगाए जा रहे इन दावों की अब तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।

जांच पर टिकी सबकी निगाहें

फिलहाल एसआईटी पूरे मामले की विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है। जांच के निष्कर्ष और ट्रस्ट की ओर से भविष्य में लिए जाने वाले संभावित फैसलों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।

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