हरिद्वार-अयोध्या | डिजिटल डेस्क
29 जून 2026 — अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी मामले और ट्रस्ट के दो बड़े स्तंभों— चंपत राय व अनिल मिश्रा के इस्तीफों के बाद अब देश के सबसे बड़े अखाड़ों के संतों का गुस्सा भी फूट पड़ा है। श्रीपंचायती अखाड़ा निरंजनी (हरिद्वार) के पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज ने इस पूरे विवाद पर एक बेहद कड़ा और नीतिगत बयान जारी किया है।
स्वामी कैलाशानंद गिरि ने सीधे तौर पर मांग की है कि राम मंदिर की कमान और पूरा प्रबंधन अब पूरी तरह से संतों के हाथों में सौंप दिया जाना चाहिए, सरकार को इसमें केवल निगरानीकर्ता (मॉनिटर) की भूमिका में रहना चाहिए।
“प्रभु के दरबार में गड़बड़ी करने वाले बख्शे नहीं जाएंगे, मोदी-योगी पर पूरा भरोसा”
हरिद्वार में पत्रकारों से बात करते हुए स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज ने कहा कि श्रीराम मंदिर में अगर कोई भी वित्तीय गड़बड़ी या आस्था से खिलवाड़ हुआ है, तो दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
उन्होंने देश और राज्य के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए कहा:
“देश में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के रहते श्रीराम जन्मभूमि से जुड़े मामले में कोई भी पापी बच नहीं सकता। जांच एजेंसियां अपना काम कर रही हैं, लेकिन हमारी स्पष्ट मांग है कि राम मंदिर का प्रबंधन अब पूरी तरह ‘संतों’ के पास होना चाहिए। सरकार का काम सिर्फ व्यवस्थाओं की निगरानी करना होना चाहिए, न कि मंदिर के आंतरिक मामलों को चलाना। जब संत कमान संभालेंगे, तो ऐसी वित्तीय कमियां या लापरवाही कभी नहीं होगी।”
भावुक हुए महामंडलेश्वर: “मंदिर में सबसे पहला दान मैंने ही किया था”
बयान के दौरान स्वामी कैलाशानंद गिरि काफी भावुक नजर आए। उन्होंने मंदिर से अपने निजी और आत्मिक जुड़ाव को साझा करते हुए एक बड़ा खुलासा किया।
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पहला गुप्त दान: महाराज ने बताया कि जब राम मंदिर के निर्माण और आंदोलन की शुरुआत हो रही थी, तब श्रीराम मंदिर के लिए सबसे पहला दान उन्होंने स्वयं अपने हाथों से समर्पित किया था।
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भक्तों का दर्द: उन्होंने कहा कि जब किसी ऐसे व्यक्ति को, जिसने मंदिर की एक-एक ईंट के लिए प्रार्थना और दान किया हो, चढ़ावे में चोरी की खबर मिलती है, तो दिल छलनी हो जाता है। यही वजह है कि अब अखाड़े और संत समाज इस पूरे प्रबंधन को पारदर्शी बनाने के लिए संतों की सीधी भागीदारी की मांग कर रहे हैं।
मुख्य बिंदु और मामले का पूरा स्टेटस
| विवरण | ताजा इनसाइड अपडेट और संतों का स्टैंड |
| बयान देने वाले संत | स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज (पीठाधीश्वर, श्रीपंचायती अखाड़ा निरंजनी) |
| मुख्य मांग | राम मंदिर का पूरा मैनेजमेंट संतों को सौंपा जाए, सरकार सिर्फ मॉनिटरिंग करे। |
| निजी जुड़ाव | दावा किया कि राम मंदिर निर्माण के लिए सबसे पहला दान उन्होंने ही दिया था। |
| ताजा प्रशासनिक अपडेट | SIT की रेड के बाद 8 आरोपी जेल में हैं; अनुकल्प के घर से मिली डायरी खंगाली जा रही है। |
| राजनीतिक माहौल | चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद नए ट्रस्टियों के नामों पर चर्चा तेज। |
संतों की मांग से गर्माई यूपी की राजनीति
स्वामी कैलाशानंद गिरि के इस बयान ने अयोध्या विवाद को एक बिल्कुल नया मोड़ दे दिया है। अब तक यह लड़ाई केवल विपक्ष बनाम सरकार (सपा-कांग्रेस बनाम भाजपा) के बीच चल रही थी, लेकिन अब देश के सबसे शक्तिशाली अखाड़ों में से एक ‘निरंजनी अखाड़े’ के महामंडलेश्वर के इस बयान के बाद सरकार और आरएसएस (RSS) पर राम मंदिर ट्रस्ट के पुनर्गठन को लेकर दबाव बेहद बढ़ गया है। संत समाज का मानना है कि ब्यूरोक्रेसी और कैशियरों के भरोसे मंदिर छोड़ने का नतीजा ही यह विवाद है।









