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जन्मशताब्दी विशेष : सिद्धांतों की राजनीति के पुरोधा थे पूर्व मंत्री पंडित काशीनाथ मिश्र

छात्रसंघ अध्यक्ष से कैबिनेट मंत्री तक का गौरवपूर्ण सफर, गांधी-नेहरू-लोहिया की विचारधारा के सशक्त संवाहक

राजीव शंकर चतुर्वेदी
पूर्वांचल राज्य ब्यूरो
बलिया। पूर्वांचल की राजनीति में सादगी, वैचारिक प्रतिबद्धता और जनसेवा की अमिट छाप छोड़ने वाले उत्तर प्रदेश के पूर्व मंत्री, प्रखर समाजवादी चिंतक एवं मूर्धन्य विद्वान पंडित काशीनाथ मिश्र की जन्मशताब्दी के अवसर पर 30 जून, प्रातः 10 बजे, टाउन हॉल (बापू भवन), बलिया में भव्य श्रद्धांजलि समारोह एवं सर्वदलीय विचार गोष्ठी का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम का विषय “गांधी, नेहरू, लोहिया के विचार सबके साथ पंडित काशीनाथ” रखा गया है, जिसमें विभिन्न राजनीतिक दलों के जनप्रतिनिधि, शिक्षाविद, साहित्यकार, समाजसेवी तथा प्रबुद्ध नागरिक पंडित काशीनाथ मिश्र के व्यक्तित्व, कृतित्व एवं उनके राजनीतिक योगदान पर अपने विचार व्यक्त करेंगे। पंडित काशीनाथ मिश्र का जन्म 26 जून 1926 को बलिया जनपद के बेलहरी विकासखंड के डांगरबाद (गरया) गांव में स्वर्गीय रामसुंदर मिश्र के घर हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव में हुई, जबकि हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट की शिक्षा राजकीय इंटर कॉलेज, बलिया से संपन्न हुई। उच्च शिक्षा के लिए उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया, जहां छात्र राजनीति में अपनी विलक्षण प्रतिभा का परिचय देते हुए वर्ष 1951 में छात्रसंघ अध्यक्ष निर्वाचित हुए। उस समय छात्रसंघ के उपाध्यक्ष बाद में देश के प्रधानमंत्री बने विश्वनाथ प्रताप सिंह थे। उनकी नेतृत्व क्षमता से प्रभावित होकर समाजवादी आंदोलन के महानायक डॉ. राममनोहर लोहिया ने उन्हें अपना व्यक्तिगत सहायक नियुक्त किया। वर्ष 1952 से 1962 तक उन्होंने डॉ. लोहिया के साथ रहकर समाजवादी विचारधारा के प्रचार-प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्ष 1962 में वे सोशलिस्ट पार्टी के टिकट पर बांसडीह पूर्वी विधानसभा क्षेत्र से विधायक निर्वाचित हुए तथा समाजवादी युवजन सभा के प्रदेश अध्यक्ष भी बने। इसी दौर में उन्होंने अनेक युवा नेताओं को समाजवादी आंदोलन से जोड़ा, जिनमें आगे चलकर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने मुलायम सिंह यादव भी शामिल रहे। राजनीतिक परिस्थितियों के परिवर्तन के बीच वर्ष 1972 में उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की नीतियों से प्रभावित होकर कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की। बाद में वे पुनः विधायक बने तथा उत्तर प्रदेश विधानसभा की प्राक्कलन समिति के अध्यक्ष का दायित्व संभाला। वर्ष 1980 में मुख्यमंत्री विश्वनाथ प्रताप सिंह तथा वर्ष 1982 में मुख्यमंत्री श्रीपति मिश्र के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार में उन्हें कैबिनेट मंत्री बनाया गया। मंत्री के रूप में उन्होंने विभिन्न विभागों में उल्लेखनीय कार्य करते हुए जनहित को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। पंडित काशीनाथ मिश्र का संपूर्ण सार्वजनिक जीवन गांधी, नेहरू और लोहिया के आदर्शों पर आधारित मूल्यनिष्ठ राजनीति का प्रेरक उदाहरण रहा। उन्होंने सत्ता को सेवा का माध्यम मानते हुए सामाजिक समरसता, लोकतांत्रिक मूल्यों और जनकल्याण के लिए आजीवन कार्य किया। जन्मशताब्दी समारोह में कामेश्वर चैरिटेबल ट्रस्ट के पदाधिकारी एवं सदस्यगण उन्हें श्रद्धासुमन अर्पित करेंगे। इस अवसर पर उनके आदर्शों, सिद्धांतों और जनसेवा की विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का संकल्प लिया जाएगा। आयोजकों के अनुसार यह कार्यक्रम केवल श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि मूल्याधारित राजनीति और लोकतांत्रिक आदर्शों के पुनर्स्मरण का भी महत्वपूर्ण अवसर होगा। 

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